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Janmashtami 2026: कान्हा को क्यों पहनाए जाते थे लड़कियों के कपड़े? कृष्ण की 4 अनसुनी कथाओं में छिपा है रहस्य

Updated: Wed, 02 Sep 2026 10:12 AM (IST)

Janmashtami 2026: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर जानिए भगवान कृष्ण की ऐसी रहस्यमयी कहानियां, जो उनके प्रेम और बाल-लीलाओं के गहरे रहस्यों को उजागर करती हैं।

भगवान कृष्ण की अनसुनी कहानियां (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2026) सिर्फ भगवान के जन्म का उत्सव नहीं है, बल्कि यह उनकी प्यारी लीलाओं और दिव्य प्रेम को याद करने का एक खूबसूरत मौका है। कान्हा का जीवन केवल महाभारत के युद्ध या गीता के उपदेशों तक सीमित नहीं है।

उनके जीवन से जुड़ी कई ऐसी लोकमान्यताएं और अनसुनी कहानियां हैं, जो सीधे हमारे दिलों को छू लेती हैं। आइए, जन्माष्टमी के इस शुभ अवसर पर जानते हैं कृष्ण की कुछ ऐसी ही मर्मस्पर्शी और रहस्यमयी कथाएं।

यशोदा मैया कान्हा को लड़की क्यों बनाती थीं?

बचपन में अक्सर माएं अपने बच्चों को बुरी नजर से बचाने के लिए तरह-तरह के जतन करती हैं। कान्हा के साथ भी ऐसा ही था। जन्म के बाद से ही कंस उन्हें मारने के लिए लगातार पूतना और बकासुर जैसे राक्षसों को भेज रहा था। ऐसे में अपने लाडले को बुरी शक्तियों से बचाने के लिए माता यशोदा उन्हें कई बार लड़कियों की तरह सजाती थीं, ताकि कोई उन्हें पहचान न सके। आज भी कई घरों में बच्चों को नजर से बचाने के लिए यही परंपरा निभाई जाती है।

बंदरों को क्यों खिलाते थे अपना प्रिय माखन?

हम सब जानते हैं कि कान्हा को माखन चुराना बहुत पसंद था, लेकिन क्या आप जानते हैं कि वो अपना चुराया हुआ माखन बंदरों को भी खिलाते थे? पौराणिक कथाओं के अनुसार, श्रीकृष्ण को अपना पिछला 'राम अवतार' याद था। त्रेता युग में माता सीता की खोज में वानर सेना ने ही भगवान राम की सबसे ज्यादा मदद की थी। उसी प्रेम और मदद के प्रति अपना आभार जताने के लिए कृष्ण जी बंदरों को माखन खिलाया करते थे।

जब गुरु दक्षिणा के लिए समुद्र की गहराइयों में उतरे

शिक्षा पूरी होने पर जब श्रीकृष्ण ने गुरु सांदीपनि से गुरु दक्षिणा मांगने का आग्रह किया, तो उन्होंने अपने उस मृत बेटे को वापस मांगा, जो समुद्र तट से गायब हो गया था। अपने गुरु की यह इच्छा पूरी करने के लिए श्रीकृष्ण समुद्र की गहराइयों में उतर गए। वहां उनका सामना 'पंचजन' नामक एक असुर से हुआ। कृष्ण ने उस असुर को हराकर यमलोक से अपने गुरु के पुत्र को वापस ला दिया।

राधा रानी ने क्यों भेजी अपने पैरों की धूल?

एक बार कृष्ण जी के सिर में भयंकर दर्द उठा। उन्होंने कहा कि अगर कोई सच्चा प्रेम करने वाला अपने पैरों की धूल उनके माथे पर लगा दे, तो यह दर्द ठीक हो जाएगा। यह सुनकर रुक्मिणी जी और नारद मुनि भी पीछे हट गए, क्योंकि भगवान के सिर पर पैर की धूल रखना घोर पाप माना जाता है। लेकिन, जब राधा रानी और गोपियों को यह बात पता चली, तो उन्होंने अपनी साड़ी पर चलकर तुरंत अपनी चरण रज (पैरों की धूल) भिजवा दी। उन्हें किसी पाप या नर्क का डर नहीं था, उनके लिए बस अपने कान्हा का दर्द दूर करना सबसे जरूरी था।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।