Janmashtami 2026: 15 साल बाद अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र का दुर्लभ संयोग, अलीगढ़ की टाइमिंग; बाजारों में धूम
Janmashtami 2026: इस बार 4 सितंबर को मनाई जाने वाली श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर 15 साल बाद अष्टमी तिथि और रोहिणी ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
जन्माष्टमी पर 15 साल बाद अष्टमी-रोहिणी नक्षत्र का संयोग।
मथुरा-वृंदावन सहित अलीगढ़ में जन्मोत्सव की तैयारी।
बाजारों में झूले, मूर्तियां और श्रृंगार सामग्री की धूम।
जागरण संवाददाता, अलीगढ़। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी चार सितंबर को मनाई जाएगी। इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का ऐसा संयोग बन रहा है, जिसे करीब 15 साल बाद देखने को मिल रहा है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भी इसी विशेष संयोग में हुआ था। ऐसे में मथुरा-वृंदावन समेत पूरे ब्रज में जन्माष्टमी और उसके अगले दिन नंदोत्सव की खास धूम देखने को मिलेगी।
श्री भैरव सेवा संस्थान के संस्थापक आचार्य भरत तिवारी ने बताया कि अष्टमी तिथि चार सितंबर की रात 2.25 बजे शुरू होकर पांच सितंबर रात 12.13 बजे तक रहेगी। रोहिणी नक्षत्र चार सितंबर रात 12.29 बजे से पांच सितंबर रात 11.04 बजे तक व निशीथ काल पूजा रात 11.56 बजे से 12.42 बजे तक (दिल्ली/पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आसपास) रहेगा।
जन्माष्टमी पर पूजन, मंदिरों में लड्डू गोपाल का शृंगार, घरों में झांकियां और आधी रात को कान्हा के जन्म का उत्सव इस पर्व को बेहद खास बना देता है।
बाजारों में तैयारियां जोरों पर
जन्माष्टमी को लेकर बाजारों में कान्हा के स्वागत की तैयारियां जोरों पर हैं। दुकानों पर रंग-बिरंगे झूले, पालने, राधा-कृष्ण की मूर्तियां और तरह-तरह के खिलौने सज गए हैं। छोटे-बड़े झूलों से लेकर आकर्षक खिलौने बच्चों और श्रद्धालुओं को खूब लुभा रहे हैं। जन्माष्टमी नजदीक आते ही बाजारों में इन सामानों की खरीदारी भी बढ़ने लगी है। कोई कन्हा के लिए फूलों से सजे पालने पसंद कर रहा है, तो कोई लकड़ी के बने मोतियों से सजे सिंघासन को खरीदने में लगे हुए हैं। वहीं कान्हा की सुंदर-सुंदर मूर्तियां भक्तों को ज्यादा लुभा रही हैं। जन्माष्टमी की तैयारियों में शहर के प्रमुख बाजार जैसे रेलवे रोड, रामघाट रोड, जयगंज आदि सजे हुए हैं।
श्रद्धालुओं में उत्साह
वहीं किशनपुर तिराहा स्थित श्री माधव दुकान के संचालक विवेक ने बताया कि इस बार जन्माष्टमी को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखा जा रहा है। पिछले साल के मुकाबले इस बार बाजारों में रौनक काफी जल्दी लौट आई है। हमारे पास विशेष रूप से हाथ से बने मोतियों और फूलों वाले झूलों की सबसे ज्यादा डिमांड है। भक्त अपने लड्डू गोपाल के लिए नए और आधुनिक डिजाइन के सिंघासन खूब पसंद कर रहे हैं।
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बाल गोपाल के श्रृंगार के सामान की मांग
वहीं दुकानदार रशमी ने बताया कि बाजारों में इस बार केवल मूर्तियों और झूलों की ही नहीं, बल्कि बाल गोपाल के श्रृंगार के सामानों की भी जबरदस्त धूम है। जरी, गोटा-पत्ती और नगों से सजी कान्हा की पोशाकें के साथ मैचिंग मुकुट-बांसुरी की दुकानें ग्राहकों से भरी हुई हैं। भक्त अपने कान्हा के लिए चांदी, लकड़ी और मोतियों से सजी बांसुरी, छोटे आकार के पीतल या लकड़ी के बने म्यूजिकल खिलौने डमरू, मिट्टी की गैया, मिट्टी के बर्तन और मटकी, लकड़ी का झुनझुना आदि को बहुत पसंद कर रहे हैं।
