मनचाहा जीवनसाथी और अखंड सौभाग्य देने वाले 'सावन सोमवार व्रत' की शुरुआत किसने की थी? शिवपुराण में छिपा है जवाब
भगवान शिव सावन मास में अपने परिवार सहित कैलाश छोड़कर पृथ्वी पर निवास करते हैं। स्कंद और पद्म पुराण में छिपा है जवाब। ...और पढ़ें
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श्रावण मास में भगवान शिव अपने परिवार के साथ कहां निवास करते हैं? (Picture Credits- AI Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान शिव और उनके भक्तों को श्रावण मास का महीना अत्यंत प्रिय है। इस पूरे महीने भक्तगण भगवान शिव की सेवा और विशेष पूजा अर्चना कर उन्हें प्रसन्न करते हैं। माना जाता है कि, सावन मास के दौरान भगवान शिव अपने परिवार के साथ धरती पर निवास करते हैं।
एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषियों के अनुसार, स्कंद पुराण और पद्म पुराण में सावन के महीने में भगवान शिव के निवास स्थान को लेकर बहुत ही सुंदर वर्णन मिलता है। इस दौरान महादेव कैलाश छोड़कर पृथ्वी पर निवास करते हैं। मान्यता है कि, श्रावण मास में भगवान शिव, माता पार्वती, पुत्र कार्तिकेय- गणेश और बैल नंदी के साथ कैलाश छोड़कर धरती पर कहीं और निवास करने चले जाते हैं।
श्रावण मास में भगवान शिव कहां निवास करते हैं?
जब भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं, और सृष्टि का संचालन भगवान शिव द्वारा किया जाता है, तब भगवान शिव पृथ्वी पर उतरकर अपने ससुराल कनखल (आज के हरिद्वार के आसपास का हिस्सा) में निवास करते हैं। कनखल में ही माता सती के पिता और ब्रह्मा जी के मानस पुत्र दक्ष ने यज्ञ किया था
आषाढ़ शुक्ल एकादशी यानी देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु क्षीरसागर में चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। तब सृष्टि का संचालन एक महीने के लिए भगवान शिव द्वारा किया जाता है। माना जाता है कि, पूरे श्रावण मास भगवान शिव पृथ्वी पर रहकर मनुष्य, जीव-जंतु और पर्यावरण को संरक्षण प्रदान करते हैं।
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पृथ्वी लोक पर आगमन और जन-जन के समीप
सावन के महीने में महादेव कैलाश पर्वत छोड़कर अपनी ससुराल हरिद्वार (कनखल) और फिर पृथ्वी लोक पर निवास करते हैं। यह मान्यता है कि वे इस पूरे महीने अपनी प्रजा और भक्तों के दुख-दर्द दूर करने के लिए पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं। सावन में शिवजी केवल कैलाशपति नहीं, बल्कि धरापति बनकर जन-जन के समीप रहते हैं।
कुछ पौराणिक कथाओं में यह भी वर्णन देखने को मिलता है कि, श्रावण मास में पृथ्वी पर आने से पहले भगवान शिव अपने संपूर्ण परिवार के साथ हरिद्वार, ऋषिकेश, काशी और उज्जैन जैसे तीर्थों की भी यात्रा करते हैं।
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