शिवजी ने अमर कथा सुनाने से पहले नंदी, गणेश और पंचतत्वों को क्यों त्यागा? रहस्य जानकर उड़ जाएंगे होश
माता पार्वती ने भगवान शिव से अमरता का रहस्य पूछा, जिसके बाद शिवजी ने अमरनाथ गुफा में उन्हें अमर कथा सुनाई। ...और पढ़ें

जब शिव ने छोड़ा अपने गणों क साथ (Image Source: AI-Generated)
HighLights
माता पार्वती ने शिवजी से अमरता का रहस्य पूछा।
शिवजी ने अमरनाथ गुफा में अमर कथा सुनाई।
कबूतरों के जोड़े ने कथा सुनकर अमरत्व पाया।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान शिव से जुड़ी एक रोचक कथा जिसके बारे में श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड ने लिखा कि, सदियों पहले माता पार्वती ने शिवजी से पूछा कि, उन्होंने मुंड माला कब और क्यों धारण करना शुरू किया।
इस प्रश्न पर महादेव ने उत्तर देते हुए कहा कि, जब भी आपका जन्म होता, मैं अपनी माला में एक और सिर जोड़ लेता हूं। पार्वती जी ने कहा, मैं बार-बार मरती हूं, लेकिन आप अमर हैं। कृप्या करके मुझे इसका असल कारण बताइए। भोले शंकर ने उत्तर देते हुए कहा कि, आपको अमर कथा सुननी होगी।
अमरता वृत्तांत सुनाने से पहले क्या-क्या त्यागा
जिसके बाद शिवजी माता पार्वती को संपूर्ण कथा सुनाने के लिए तैयार हो गए। इसके बाद माता पार्वती और भगवान शिव दोनों एक ऐसी जगह चल पड़े जहां कोई भी प्राणी अमर कथा न सुन सके और आखिर में उन्होंने अमरनाथ गुफा को चुना। इसके पश्चात चुपके से उन्होंने अपने प्रिय भक्त और वाहन नंदी को पहलगाम में छोड़ दिया।
शेषनाग झील के किनारे उन्होंने अपने नागों को छोड़ दिया। भगवान गणेश को महागुण पर्वत पर छोड़ने का फैसला लिया। पंजतरणी में शिवजी ने जीवन के पंच तत्वों को त्याग दिया, जिनके वे स्वामी हैं। इन सभी को त्यागने के बाद भोले शंकर पार्वती माता को अपने साथ अमरनाथ गुफा में प्रवेश कर समाधि ले ली।
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जोड़े कबूतरों ने सुनी अमरता की कथा
इस बात को सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी जीवित प्राणी अमरता से जुड़ा वृत्तांत न सुन पाए, उन्होंने कालाग्नि को पैदा किया और उसे गुफा के अंदर और आसपास के सभी जीवों को नष्ट करने के लिए आग फैलाने का भी आदेश दिया। इसके बाद उन्होंने माता पार्वती को अमरता का रहस्य सुनाना शुरू किया। संयोगवश कबूतरों के एक जोड़े ने यह वृत्तांत सुन लिया और अमर हो गए।
कई तीर्थयात्री आज भी पवित्र कबतरों के उस जोड़े को देखने का दावा करते हैं और यह देखकर हैरान हो जाते हैं कि ये पक्षी इतने ठंडे और पहाड़ी क्षेत्र में कैसे जीवित रहते हैं।
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