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    हिंदू धर्म में किन दिनों में नहीं बनाई जाती रोटी? जानिए इसके पीछे की धार्मिक मान्यताएं

    Updated: Sat, 20 Jun 2026 08:00 PM (IST)

    भारतीय संस्कृति में कुछ खास तिथियों पर खाने के विशेष नियम हैं। इन दिनों में रोटी या अनाज से बने खाद्य पदार्थों का सेवन वर्जित माना जाता है और फलाहार य ...और पढ़ें

    हिंदू धर्म में किन दिनों में नहीं बनाई जाती रोटी?

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति में भोजन सिर्फ भूख मिटाने का जरिया नहीं है, बल्कि एक पवित्र काम माना जाता है। यही वजह है कि, हिंदू घरों में किचन को सबसे जरूरी और शुभ स्थान माना जाता है। सनातन परंपराओं, धार्मिक ग्रंथों और वास्तु शास्त्र में भोजन तैयार करने को लेकर कुछ खास नियम बताए गए हैं, जिनका पालन आज भी कई लोग करते है।

    कुछ खास तिथियों को धार्मिक नजरिए से महत्वपूर्ण माना जाता है, और इन दिनों में रोटी या अन्य खाद्य पदार्थों को तैयार करने से जुड़ी खास मान्यताएं भी निभाई जाती हैं। चूंकि इन दिनों में आध्यात्मिक साधना, व्रत, पूजा-जप पर जोर दिया जाता है, इसलिए भोजन में खास सावधानी बरती जाती है।

    धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, एकादशी का दिन काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, जब कई लोग अनाज का सेवन नहीं करते हैं। भगवान विष्णु को समर्पित इस खास दिनों में व्रत का पालन किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि, एकादशी पर रोटी या अनाज से बने अन्य खाद्य की तुलना में फलाहार का सेवन करना सबसे शुभ होता है।

    महाशिवरात्रि पर रोटी बनाने पर रोक

    इसी तरह महाशिवरात्रि के मौके पर भगवान शिव की पूजा की जाती है। इस दिन भी कई भक्त उपवास रखते हैं और पूरा दिन शिव के नाम का स्मरण करते हैं। माना जाता है कि, इस दिन सादा, सात्विक आहार करना शुभ माना जाता है। शिवरात्रि के मौके पर कई घरों में रोटी नहीं बनाई जाती है।

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    इसके बाद अमावस्या का भी हिंदू धर्म में खास धार्मिक महत्व है। इस दिन भी कई लोग उपवास करते हैं और पूरा दिन धार्मिक अनुष्ठान करते हुए गुजारते हैं। भारत के कई हिस्सों में मान्यता है कि, इस दिन भोजन की तैयारी और सेवन नहीं किया जाता है। कई लोग इस दिन फल खाकर समय व्यतीत करते हैं।

    श्राद्ध पक्ष के दौरान भी अलग-अलग तरह के नियमों का पालन किया जाता है। यह अवधि दिवंगत आत्माओं को सम्मान देने के साथ उन्हें याद करने का मौका होता है। इस दौरान कई लोग तामसिक भोजन से दूरी बना लेते हैं और सिर्फ सात्विक भोजन ही खाते हैं। कुछ स्थानों पर नियमित रूप से रोटी या सामान्य भोजन बनाने के बजाय खास भोग तैयार करने की परंपरा है।

    इन तिथियों पर न बनाए रोटियां

    पूर्णिमा पर रोटी बनाने से जुड़े नियम

    पूर्णिमा का दिन भी आध्यात्मिक नजरिए से बेहद खास माना जाता है। इस दिन कई लोग उपवास रखते हैं और ईश्वर की आराधना करते हैं। धार्मिक मत है कि, पूर्णिमा के दिन सात्विक जीवनशैली अपनाने और सादा भोजन खाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। इसी वजह से इस दिन रोटी बनाना अशुभ माना जाता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।