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    शादी के बाद बेटियां पहली हरियाली तीज मायके में ही क्यों मनाती हैं?

    Updated: Thu, 30 Jul 2026 07:47 PM (IST)

    हरियाली तीज का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, खासकर नवविवाहित महिलाओं के लिए। शादी के बाद पहली हरियाली तीज मायके में मनाने की परंपरा है, जिसके पीछे भा ...और पढ़ें

    नवविवाहित बेटियां शादी के बाद पहली हरियाली तीज मायके में ही क्यों मनाती हैं (Picture Credit: AI Generated)

    नवविवाहित बेटियां शादी के बाद पहली हरियाली तीज मायके में ही क्यों मनाती हैं (Picture Credit: AI Generated)

    HighLights

    1. नवविवाहित महिलाएं पहली हरियाली तीज मायके में मनाती हैं।

    2. मायके में बेटी को 'सिंधारा' और आशीर्वाद दिया जाता है।

    3. भगवान शिव-पार्वती और राधा-कृष्ण से जुड़ी है यह मान्यता।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन के महीने में आने वाली हरियाली तीज का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है और इसे सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत खास माना जाता है।

    इस दिन विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए उपवास करती हैं और माता पार्वती के साथ भगवान शिव का पूजन किया जाता है।

    इस पर्व का महत्व नवविवाहित लड़कियों के लिए और ज्यादा बढ़ जाता है और इसे बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाती हैं। अगर हम प्राचीन परंपराओं की बात करें तो शादी के बाद लड़की की पहली हरियाली तीज मायके में ही मनाई जाती है। आइए आपको बताते हैं इस परंपरा के पीछे के धार्मिक कारणों के बारे में।

    शादी के बाद पहली तीज मायके में क्यों मनाई जाती है?

    भारतीय संस्कृति में किसी भी लड़की का मायका उसके जीवन का वह स्थान होता है जहां उसे बचपन से लेकर विवाह तक प्यार, अपनापन और भावनात्मक जुड़ाव मिलता है। ऐसा कहा जाता है कि शादी के बाद जब बेटी पहली बार तीज का पर्व मनाती है तो उसे मायके की याद न आए, इसलिए यह पर्व धूम-धाम से मायके में ही मनाया जाता है।

    नवविवाहित बेटी को मायके के लोग सम्मानपूर्वक घर लाते हैं और उसे उपहार में श्रृंगार की चीजें, नए कपड़े, घेवर, मिठाइयां और गहने दिए जाए हैं। इस परंपरा को 'सिंधारा' या 'सिंजारा' कहा जाता है। इसे केवल एक रस्म नहीं माना जाता है बल्कि मायके के लोगों का आशीर्वाद भी माना जाता है।

    भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ी है मान्यता

    सावन में आने वाली हरियाली तीज का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन से है। शिवपुराण में इस बात का वर्णन मिलता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर हरियाली तीज के दिन ही भगवान शिव ने उन्हें अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया।

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    इसी वजह से हरियाली तीज पर महिलाएं उपवास करती हैं और माता पार्वती की पूजा करके अखंड सौभाग्य और का आशीर्वाद लेती हैं। यही नहीं इस व्रत को कुंवारी लड़कियां भी अच्छे वर की कामना में रखती हैं।

    हरियाली तीज के लिए राधा रानी से जुड़ी कथा

    हरियाली तीज पर बरसाना में राधा रानी और श्रीकृष्ण के झूलन महोत्सव की धूम रहती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन राधा रानी अपनी ससुराल नंदगांव से अपने मायके बरसाना आती हैं और इस उत्सव का आनंद लेती हैं। राधा रानी के हरियाली तीज पर मायके आने की परंपरा का अनुसरण करते हुए बेटियां शादी के बाद पहली हरियाली तीज मायके में ही मनाती हैं।

    हरियाली तीज की कई मान्यताओं में से एक है नवविवाहिता का मायके में इस पर्व को मनाना जिसे एक धार्मिक उत्सव का ही स्वरूप माना जाता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।