विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

जन्म के समय क्यों रोता है बच्चा? गरुड़ पुराण में छिपा है इसका गहरा रहस्य

Updated: Sun, 16 Aug 2026 06:30 PM (IST)

गरुड़ पुराण के अनुसार, जन्म के समय बच्चे का रोना केवल शारीरिक नहीं, बल्कि आत्मा के पूर्व जन्मों की यादें मिटने और नए जीवन के कष्टकारी बदलाव का प्रतीक है।

जन्म के समय शिशु के रोने के पीछे गरुड़ पुराण क्या कहता है?

जन्म के समय शिशु के रोने के पीछे गरुड़ पुराण क्या कहता है?

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जब एक बच्चे का जन्म होता है, तो उसका रोना अक्सर जीवन का संकेत माना जाता है। लेकिन क्या हो अगर वह रोना सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक भी हो? प्राचीन धर्म ग्रंथों में इससे कहीं ज्यादा रहस्यमय बातें बताई गई हैं।

गरुड़ पुराण जैसे धार्मिक ग्रंथों में आत्मा को पूर्णता सजग बताया गया है। यह पूर्व जन्मों, सीखों और गलतियों को याद रखती है। गर्भ में आत्मा गहन चिंतन करती है, मानो एक नई शुरुआत की तैयारी कर रही हो। आत्मा के लिए नया जन्म आसान नहीं होता है।

बच्चा गर्भ से बाहर आते ही क्यों रोता है?

गरुड़ पुराण के मुताबिक, यह बदलाव काफी कष्टकारी और पीड़ादायक होता है। गर्भ से बाहर निकलते ही आत्मा को एक तीव्र आघात लगता है। इस पल को असहनीय पीड़ा के रूप में वर्णित किया गया है।

गर्भ का सुख पल भर में गायब हो जाता है। आत्मा खोई हुई, दिशाहीन और विमुख महसूस करती है। यह सिर्फ एक शारीरिक घटना नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अलगाव है। ऐसे में शिशु की पहली चीख कोई इत्तेफाकी बात नहीं है। यह इस गहरे और जबरदस्त अनुभव की प्रतिक्रिया हो सकती है।

माया की शक्ति से यादें मिट जाती हैं

गरुड़ पुराण के अनुसार, बच्चे के जन्म लेते ही, एक शक्तिशाली ताकत 'माया' यानी भौतिक दुनिया का भ्रम उस पर हावी हो जाती है। विष्णु पुराण जैसे धार्मिक ग्रंथों में साफ-साफ लिखा है कि, यह भ्रम पिछली सभी यादों को मिटा देता है। आत्मा वह सब कुछ भूल जाती है, जो वह कभी जानती थी।

उसका अतीत, उससे मिले सबक और जागरुकता सब कुछ एक पल में खत्म हो जाता है। यह कोई इत्तेफाक नहीं है। यह जीवन-चक्र का ही एक हिस्सा है। अगर यह भूलने की प्रक्रिया न हो, तो नया जीवन जीना मुश्किल होगा। लेकिन

why newborn babies cry at birth garuda purana spiritual scientific reasons

बच्चे की पहली चीख का मतलब

विज्ञान बच्चे की पहली चीख को सेहत की निशानी मानते हैं और वैज्ञानिक तौर पर यह सच भी है। इससे फेफड़े सक्रिय होते हैं। लेकिन आध्यात्मिक नजरिए से ज्ञान लोग इसे अलग तरह से देखते हैं। वह चीख उलझन, डर और कुछ खोने के एहसास को जाहिर कर सकती है।

कुछ पल पहले तक आत्मा को सब कुछ याद था। अब उसे कुछ भी याद नहीं रहता। उस अचानक आए खालीपन से बेचैनी हो सकती है। वह चीख इसी नुकसान को बिना कहे बयां करती है। यह केवल जिंदगी की शुरुआत नहीं, बल्कि जागरूकता का अंत भी है।

यह भी पढ़ें- मृत्यु के बाद 'सोने की सीढ़ी' चढ़ाने से जुड़ी है गहरी मान्यता, गरुड़ पुराण में बताया गया है इसका विशेष महत्व

यह भी पढ़ें- मृत्यु के बाद यदि किसी व्यक्ति की तेरहवीं न की जाए तो क्या होता है? गरुड़ पुराण में बताए गए नियम जानें

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।