वास्तु के अनुसार सही दिशा में सही प्रतीक रखने से घर में आ सकती है सुख और समृद्धि
वास्तु शास्त्र के अनुसार सही दिशा में सही वास्तु प्रतीक रखने से घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सकता है। ...और पढ़ें
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घर का केंद्र ब्रह्मस्थान कहलाता है (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
उत्तर दिशा में वास्तु कछुआ आर्थिक स्थिरता लाता है।
ईशान कोण में लक्ष्मी कलश धन-धान्य बढ़ाता है।
घर के केंद्र में श्री यंत्र सकारात्मक ऊर्जा देता है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र में घर या कार्यस्थल में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बनाए रखने के कई उपाय बताए गए हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि घर की प्रत्येक दिशा में उस दिशा से संबंधित शुभ प्रतीक स्थापित किए जाएं, तो वातावरण में संतुलन, शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। वास्तु के अनुसार, हर दिशा किसी विशेष ऊर्जा और तत्व का प्रतिनिधित्व करती है, इसलिए उस दिशा से संबंधित प्रतीक रखने से शुभ परिणाम प्राप्त हासिल हो सकते हैं। चलिए तो फिर जानते हैं कि किस दिशा में क्या रखना चाहिए।
उत्तर दिशा
उत्तर दिशा धन, करियर और नए अवसरों को प्राप्त करने का प्रतीक मानी जाती है। इस दिशा में वास्तु कछुआ रखने से आर्थिक स्थिरता, व्यापार में प्रगति और जीवन में सकारात्मक अवसरों का आगमन हो सकता है।
उत्तर-पूर्व दिशा
उत्तर-पूर्व, जिसे ईशान कोण भी कहा जाता है, अत्यंत पवित्र दिशा मानी जाती है। यहां लक्ष्मी कलश स्थापित करने से घर में माता लक्ष्मी की कृपा, धन-धान्य की वृद्धि और उन्नति का माहौल बना रहता है।
पूर्व दिशा
पूर्व दिशा सूर्य के उदय और नई शुरुआत का प्रतीक है। इस दिशा में इंद्र देव का प्रतीक या तांबे का सूर्य रखने से मान-सम्मान, यश, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
दक्षिण-पूर्व दिशा
दक्षिण-पूर्व दिशा अग्नि तत्व से जुड़ी मानी जाती है। इस दिशा में कामधेनु की प्रतिमा या चित्र रखने से परिवार में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, सौभाग्य और इच्छाओं की पूर्ति होती है।
दक्षिण दिशा
दक्षिण दिशा में भगवान बुद्ध की मूर्ति रखने से मानसिक शांति, धैर्य, सकारात्मक सोच और पारिवारिक जुड़ाव बना रहता है। यह दिशा आत्मविश्वास और संतुलन का भी प्रतीक मानी जाती है।
दक्षिण-पश्चिम दिशा
दक्षिण-पश्चिम दिशा स्थिरता और रिश्तों का प्रतिनिधित्व करती है। यहां कल्पवृक्ष का प्रतीक रखने से परिवार में मजबूती, सुरक्षा और समृद्धि बनी रहती है।
पश्चिम दिशा
पश्चिम दिशा में पीतल का हाथी रखना शक्ति, बुद्धिमत्ता और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। यह घर में सकारात्मक ऊर्जा, सम्मान और उन्नति लेकर आता है।
उत्तर-पश्चिम दिशा
उत्तर-पश्चिम दिशा में वास्तु गरुड़ स्थापित करने से नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा, साहस, आत्मबल और शुभ अवसरों में वृद्धि होने के अवसर बढ़ जाते है।
घर के केंद्र में
घर का केंद्र ब्रह्मस्थान कहलाता है और इसे ऊर्जा का मुख्य स्थान माना जाता है। यहां श्री यंत्र स्थापित करने से सकारात्मक ऊर्जा, आर्थिक समृद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक सोच को बढ़ावा िमलने का माहौल बनता है।
अत: वास्तु शास्त्र के अनुसार उचित दिशा में शुभ प्रतीकों की स्थापना घर के वातावरण को अच्छा और सकारात्मक बनाकर रखती है।
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