विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

वास्तु शास्त्र दर्पण: भूलकर भी इन 4 जगहों पर न लगाएं शीशा, छिन सकती है घर की सुख-शांति

Updated: Wed, 26 Aug 2026 04:20 PM (GMT+05:30)

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में दर्पण का गलत स्थान पर होना नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकता है। बिस्तर ...और पढ़ें

घर में किन जगहों पर दर्पण लगाने से बचना चाहिए? (Picture Credits- AI Image)

घर में किन जगहों पर दर्पण लगाने से बचना चाहिए? (Picture Credits- AI Image)

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र के मुताबिक, घर की दीवारों पर लगा दर्पण (Mirror) केवल सजावट की वस्तु ही नहीं बल्कि ऊर्जा के प्रवाह को भी प्रभावित करने का काम करते हैं। ये घर में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की ऊर्जाओं को अपनी ओर आकर्षित कर सकता है।

अधिकतर घरों में सुंदरता बढ़ाने के लिए शीशे का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि गलत स्थान पर दर्पण लगाने से नकारात्मक ऊर्जा भी आकर्षित हो सकती है। आइए वास्तु शास्त्र के नजरिए से समझते हैं दर्पण से जुड़ी गलतियां और उससे बचने के उपाय।

बिस्तर के ठीक सामने दर्पण लगाना

बहुत से लोगों को अपने बेडरूम के ठीक सामने शीशा लगाने की आदत होती है। लेकिन वास्तु शास्त्र में इसे गलत माना गया है।

माना जाता है कि बिस्तर के ठीक सामने किसी भी तरह का दर्पण होना दंपत्तियों के बीच लड़ाई झगड़े और रिश्ते में खटास का कारण बनता है। इससे व्यक्ति की नींद की गुणवत्ता भी नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है।

मुख्य द्वार के सामने

कभी भी मुख्य द्वार की ओर दर्पण नहीं लगाना चाहिए। वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वारा को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। मुख्य दरवाजे के ठीक सामने दर्पण लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

कहा जाता है कि, मुख्य द्वार को प्रतिबिंबित करने वाला शीशा ऊर्जा को वापस बाहर धकेल देता है। इसके साथ ही समय के साथ कई तरह की आर्थिक समस्याएं भी पैदा होने लगती है।

vastu shastra tips for mirror placement at home places to avoid for positive energy

घर में दरार या टूटे हुए शीशे का इस्तेमाल

घर के बड़े बुजुर्ग हमें अक्सर टूटे या दरार वाले दर्पणों में खुद का चेहरा देखने से मना करते थे। वास्तु शास्त्र भी इसी सिद्धांत को मानता है। माना जाता है कि टूटे दर्पण को घर में रखने से बुरी ऊर्जा स्थिर हो जाती है।

अगर आप इस तरह के शीशे का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आज ही इन्हें बाहर निकाल फेंके। इसके अलावा टूटे हुए या दरार पड़े शीशे में देखने से भ्रम, तनाव पैदा करने और मानहानि का कारण बनता है।

दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में शीशा लगाना

वास्तु शास्त्र के मुताबिक, घर में शीशा लगाने के लिए सबसे सही जगह उत्तर या पूर्व दिशा की दीवारें हैं। दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में शीशा लगाने से ऊर्जा का संतुलन बिगड़ जाता है, ऐसा इसलिए क्योंकि ये दिशाएं शक्ति और रिश्तों से जुड़ी है।

वास्तु शास्त्र के मुताबिक, यह समझना बेहद जरूरी है कि दर्पण जिस चीज को प्रतिबिंबित करता है, उसे दोगुना कर देता है। इसलिए अगर वे अव्यवस्था, खाली स्थान, खुले शौचलय या कूड़ेदान के पास रखा गया है, तो इससे अव्यवस्थित और भ्रमित ऊर्जा ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है। कई बाथरूमों में ऐसे शीशे होते हैं जो सीधे टॉयलेट सीट को प्रतिबिंबित करते हैं और वास्तु शास्त्र में इन्हें अशुभ माना जाता है।

सही जगह पर शीशा लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुंदरता और विकास होता है। यह स्थान घर को रोशन करने का काम करते हैं। लेकिन गलत स्थान पर दर्पण मानसिक शांति, रिश्तों और घर की सुख-समृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव दिखा सकता है।

यह भी पढ़ें- क्या आपके घर में भी है विंड चाइम? सुख-समृद्धि के लिए जान लें ये जरूरी वास्तु नियम

यह भी पढ़ें- रात के समय क्यों नहीं धोने चाहिए कपड़े? वास्तु शास्त्र से जानें इसके पीछे का कारण

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।