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    घर के मंदिर से जुड़ी ये गलतियां पहुंचा सकती हैं भारी नुकसान, जानिए वास्तु के अनुसार सही जगह

    Updated: Sat, 02 May 2026 03:51 PM (IST)

    घर के मंदिर में की गई छोटी सी गलती भी सुख-शांति में बाधा बन सकती है। आइए यहां वास्तु के अनुसार, मंदिर की सही दिशा और उससे जुड़े नियम जानते हैं। ...और पढ़ें

    Vastu Tips: घर में इस दिशा में भूलकर भी न रखें मंदिर। Ai Generated Image

    Vastu Tips: घर में इस दिशा में भूलकर भी न रखें मंदिर। Ai Generated Image

    HighLights

    1. मंदिर उत्तर-पूर्व दिशा में होनी चाहिए

    2. रसोई, बेडरूम या सीढ़ियों के नीचे मंदिर नहीं होना चाहिए


    3. मंदिर में बासी फूल नहीं रखने चाहिए

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र में घर का मंदिर सबसे अधिक ऊर्जावान स्थान माना जाता है। यह वह जगह है, जहां से पूरे घर में सकारात्मकता का संचार होता है। हालांकि, कई बार हम अनजाने में मंदिर को गलत दिशा में रख देते हैं या पूजा से जुड़े कुछ नियमों की अनदेखी कर देते हैं।

    वास्तु के अनुसार, मंदिर का गलत स्थान घर की सुख-शांति पर बाधा डाल सकती है और आर्थिक तंगी का कारण बन सकता है। आइए जानते हैं मंदिर से जुड़ी उन बड़ी गलतियों के बारे में जिनसे सभी को हर हाल में बचना चाहिए।

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    मंदिर से जुड़ी 5 बड़ी गलतियां

    • सीढ़ियों के नीचे या शौचालय के पास मंदिर - अक्सर जगह की कमी के कारण लोग सीढ़ियों के नीचे छोटा सा मंदिर बना लेते हैं। वास्तु के अनुसार यह बहुत बड़ा दोष है। सीढ़ियों के नीचे मंदिर होने से घर के सदस्यों पर कर्ज बढ़ता है। इसी तरह, शौचालय के ऊपर, नीचे या उसके ठीक सामने मंदिर कभी नहीं होना चाहिए।
    • बेडरूम में मंदिर रखना - पति-पत्नी के बेडरूम में मंदिर होना वास्तु दोष माना जाता है। इससे वैवाहिक जीवन में तनाव की समस्या हो सकती है। अगर मजबूरी में मंदिर बेडरूम में रखना पड़े, तो रात में उस पर पर्दा जरूर डालें।
    • खंडित और बड़ी मूर्तियां - घर के मंदिर में कभी भी खंडित मूर्ति या फटी हुई तस्वीर नहीं रखनी चाहिए। साथ ही, घर में अंगूठे से बड़े आकार की शिवलिंग या बहुत विशाल मूर्तियां रखने से बचना चाहिए।
    • पूर्वजों की तस्वीरें - कई लोग अपने पितरों या पूर्वजों की तस्वीरें मंदिर में ही रख देते हैं। वास्तु के अनुसार, देवी-देवताओं और पितरों का स्थान अलग होना चाहिए। मंदिर में पूर्वजों की तस्वीर रखने से घर में क्लेश बढ़ सकता है।
    • रसोई घर में मंदिर - वैसे तो कई घरों में रसोई में मंदिर होता है, लेकिन इसे वास्तु में मध्यम माना गया है। सिंक के पास या चूल्हे के ठीक ऊपर मंदिर होने से घर में नकारात्मकता आती है और सेहत से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

    वास्तु के अनुसार मंदिर की सही दिशा

    घर में मंदिर के लिए ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को सबसे शुभ माना गया है। इस दिशा को देवताओं का स्थान कहा जाता है। अगर इस दिशा में जगह न हो, तो आप पूर्व या उत्तर दिशा में भी मंदिर स्थापित कर सकते हैं। ध्यान रहे कि पूजा करते समय आपका मुख पूर्व की ओर होना चाहिए, क्योंकि यह दिशा ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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