वास्तु शास्त्र के अनुसार चुनें डोरमैट का रंग, मुख्य द्वार की दिशा बदल सकती है आपकी आर्थिक स्थिति
क्या आप जानते हैं कि गलत रंग की डोरमैट घर में कंगाली ला सकती है? वास्तु शास्त्र के अनुसार जानें अपनी दिशा के लिए सही पायदान का रंग और बढ़ाएं घर की सुख- ...और पढ़ें
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किस दिशा में रखें कैसा डोरमैट? (Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को केवल घर का प्रवेश मार्ग नहीं, बल्कि ऊर्जा और भाग्य का द्वार माना गया है। अक्सर हम दरवाजों की दिशा और रंग पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन वहां रखी 'डोरमैट' (पायदान) को भूल जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, डोरमैट घर में प्रवेश करने वाली नकारात्मक ऊर्जा को बाहर ही रोकने का काम करती है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, मुख्य द्वार की दिशा के अनुसार सही रंग की डोरमैट चुनना सुख-समृद्धि के लिए अनिवार्य है।
दिशाओं के अनुसार डोरमैट का चुनाव
वास्तु के 'पंचतत्त्व' (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) के सिद्धांत के अनुसार हर दिशा का एक विशेष रंग और तत्व होता है। पायदान का चयन इसी संतुलन के आधार पर होना चाहिए:
दक्षिण दिशा (South): यह दिशा अग्नि तत्व का प्रतीक है। शास्त्रों के अनुसार यहां हरे रंग की डोरमैट रखना श्रेष्ठ है। हरा रंग 'काष्ठ' (लकड़ी) तत्व को दर्शाता है जो अग्नि को संतुलित कर सकारात्मकता बढ़ाता है। यहां लाल रंग से बचना चाहिए, क्योंकि यह अग्नि को अनियंत्रित कर कलह और खर्च बढ़ा सकता है।
उत्तर दिशा (North): यह जल तत्व और धन के देवता कुबेर की दिशा है। यहां नीले या ग्रे (स्लेटी) रंग की डोरमैट का उपयोग करना चाहिए। ये रंग धन के प्रवाह को सुचारू बनाते हैं। इस दिशा में काले रंग के पायदान से परहेज करें, क्योंकि यह उन्नति के मार्ग में अवरोध पैदा कर सकता है।

(Image Source: AI-Generated)
पूर्व और उत्तर-पूर्व (East/North-East): यह दिशा विकास और सूर्य की ऊर्जा से जुड़ी है। यहाँ हरे या हल्के नीले रंग की डोरमैट रखना सुखद परिणाम देता है। यह घर के सदस्यों के स्वास्थ्य और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि करता है।
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पश्चिम दिशा (West): यह दिशा धातु (Metal) तत्व की मानी जाती है। यहां सफेद, सुनहरा (Golden) या चांदी (Silver) जैसे रंगों की डोरमैट बहुत शुभ होती है। यह जीवन में अनुशासन और स्थिरता लाती है। यहां लाल या गहरे रंगों का उपयोग धातु और अग्नि के टकराव के कारण वर्जित माना गया है।
क्या कहते हैं शास्त्र?
विश्वकर्मा प्रकाश: इस ग्रंथ में गृह प्रवेश और द्वार की शुद्धता के नियमों का विस्तार से वर्णन है, जिसमें 'देहरी' (चौखट) और उसके आसपास की वस्तुओं के प्रभाव को समझाया गया है।
मयमलम (Mayamatam): यह दक्षिण भारतीय वास्तु शास्त्र का प्रमुख ग्रंथ है, जो दिशाओं और पंचतत्त्वों के आपसी तालमेल पर जोर देता है।
डोरमैट केवल धूल साफ करने के लिए नहीं है, बल्कि यह घर की ऊर्जा का 'शुद्धिकरण केंद्र' है। शास्त्रों के अनुसार, फटा हुआ या अत्यधिक गंदा पायदान कभी न रखें, क्योंकि यह राहु के नकारात्मक प्रभाव को आमंत्रित करता है।
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