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    निगेटिव एनर्जी को दूर रखता है घर के मेन गेट पर बना स्वास्तिक, क्या है इसका वास्तु कनेक्शन?

    Updated: Mon, 08 Jun 2026 03:31 PM (IST)

    घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाने की परंपरा क्यों है? जानिए स्वस्तिक का धार्मिक महत्व, वास्तु लाभ और बनाने के सही नियम। ...और पढ़ें

    क्या आपके घर भी है स्वास्तिक बनाने की परंपरा? (AI-Generated Image)

    क्या आपके घर भी है स्वास्तिक बनाने की परंपरा? (AI-Generated Image)

    HighLights

    1. स्वास्तिक को भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है

    2. मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है

    3. माता लक्ष्मी की कृपा और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति में स्वास्तिक को बेहद शुभ और मंगलकारी प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि पूजा-पाठ, यज्ञ, गृह प्रवेश, विवाह और अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत स्वस्तिक बनाकर की जाती है। कई लोग अपने घर के मुख्य द्वार पर भी स्वास्तिक बनाते हैं। धार्मिक और वास्तु शास्त्र में इसे विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि स्वास्तिक केवल एक चिन्ह नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और शुभता का प्रतीक है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्वास्तिक भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है। गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है, इसलिए घर के प्रवेश द्वार पर स्वास्तिक बनाने से नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं और जीवन में आने वाली बाधाएं कम होती हैं। यही वजह है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश और स्वास्तिक के पूजन से की जाती है।

    वास्तु शास्त्र के नियम

    वास्तु शास्त्र के अनुसार, मुख्य द्वार घर में ऊर्जा के प्रवेश का प्रमुख स्थान होता है। माना जाता है कि अगर मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाया जाए तो सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का प्रवाह बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा घर के भीतर प्रवेश नहीं कर पाती। इससे परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम, शांति और सौहार्द बना रहता है।

    Swastik

    (AI-Generated Image)

    कई मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। उनकी कृपा से घर में धन-धान्य, सुख-संपन्नता और खुशहाली बनी रहती है। अगर घर में वास्तु दोष हो तो हल्दी या कुमकुम से बना अगर उस दोष के प्रभाव को कम करने में सहायक माना जाता है।

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    कैसे बनाएं स्वास्तिक?

    हालांकि, स्वास्तिक बनाते समय कुछ नियमों का पालन करना भी जरूरी बताया गया है। इसे रोली, सिंदूर, हल्दी या कुमकुम से बनाना शुभ माना जाता है। स्वास्तिक की चारों भुजाएं घड़ी की दिशा में मुड़ी हुई होनी चाहिए। मुख्य द्वार के दोनों ओर स्वास्तिक बनाने की परंपरा भी प्रचलित है। इसके चारों कोनों के बीच बिंदु लगाने को शुभ माना जाता है, जो समृद्धि और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है।

    भूलकर भी न करें ये काम

    ध्यान रखने वाली बात यह है कि स्वास्तिक को कभी भी गंदे स्थान, बाथरूम या जमीन पर नहीं बनाना चाहिए। साथ ही, इसे साफ-सुथरे और संतुलित आकार में बनाना शुभ माना जाता है। धार्मिक आस्था और वास्तु मान्यताओं के अनुसार मुख्य द्वार पर बना स्वास्तिक घर में शुभता, सकारात्मकता और मंगलमय वातावरण बनाए रखने का प्रतीक माना जाता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।