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    सिर्फ स्टोरेज नहीं भर रहा, आपकी सुरक्षा भी खतरे में डाल रहा है फोन का डिजिटल कचरा

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 03:33 PM (GMT+05:30)

    वर्षों से फोन में जमा हो रहे अनावश्यक फोटो, वीडियो, स्क्रीनशाट्स, एप्स डिवाइस को स्लो ही नहीं करते, बल्कि डाटा सुरक्षा के लिए भी खतरनाक हैं। ...और पढ़ें

    सिर्फ स्टोरेज नहीं भर रहा, आपकी सुरक्षा भी खतरे में डाल रहा है फोन का डिजिटल कचरा

    सिर्फ स्टोरेज नहीं भर रहा, आपकी सुरक्षा भी खतरे में डाल रहा है फोन का डिजिटल कचरा


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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। आप फोन चेक कीजिए कि कितने फोटो जमा हो चुके हैं। संभव है कि यह संख्या हजार-दो हजार या फिर 10 हजार भी हो सकती है। इसी तरह स्क्रीनशॉट्स, वाट्सएप से डाउनलोड हुए फोटो और वीडियो की तादाद भी हजारों में ही होगी। आज हर किसी के पाकेट में पावरफुल कैमरा है, जब चाहे वह फोटो और वीडियो बना सकता है। इससे फोन में बेइंतिहा 'कलेक्शन' और 'मेमोरीज' स्टोर हो रही हैं, जिनकी जरूरत ही नहीं है।

    नया फोन लेने के कुछ ही महीने या साल बाद अक्सर नोटिफिकेशन दिखने लगता है- आपका स्टोरेज फुल हो गया है। खास बात है कि आप इसे लंबे समय तक नजरअंदाज भी नहीं कर सकते, आपको स्टोरेज खरीदना होगा या फिर फाइल्स किसी अन्य स्टोरेज डिवाइस में शिफ्ट करनी होंगी। अनरीड मेल, डुप्लीकेट डाक्यूमेंट, 2023 में फारवर्ड कोई वाट्सएप मैसेज, तीन साल पहले गर्मी की छुट्टियों में ली गई सैकड़ों सेल्फी और फोटो की कितनी जरूरत है?

    इस सवाल का जवाब आपको हर दो-तीन महीने में खुद से पूछते रहना चाहिए। यह ऐसी समस्या है, जिसका सामना हर किसी को एक दिन करना ही है। जैसे घर की सफाई करते हैं, उसी तरह ओवरलोड होती डिजिटल लाइफ को संतुलित रखने की जरूरत है।

    कितनी बड़ी है डिजिटल होर्डिंग की समस्या

    यह एक आदत है, जो आपको बार-बार डिजिटल फाइलों को सेव और इकट्ठा करते रहने के लिए प्रेरित करती है। पुराने ईमेल्स, टेक्स्ट मैसेज, फोटो, वीडियो से लेकर रैंडम इंटरनेट बुकमार्क्स को सेव करते हैं, तो आप भी इसी आदत के शिकार हैं। कुछ लोग स्क्रीनशॉट्स, इंटरनेट मीडिया पोस्ट, मीम्स, म्यूजिक, पाडकास्ट भी सेव करते हैं।

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    सस्ते स्टोरेज सोल्यूशन और क्लाउड सर्विसेज ने लोगों को स्पेस की बाधाओं से थोड़ी राहत भी दी है। भले ही इसका कोई स्पष्ट नुकसान नहीं दिखता हो, पर डिजिटल होर्डिंग के खतरे भी हैं, जैसे इससे डिवाइस की परफार्मेंस स्लो होती ही है, साथ ही महत्वपूर्ण डेटा और डाक्यूमेंट को खोजना कठिन हो जाता है। सबसे बड़ा खतरा तो साइबर सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

    टेक्नोलाजी नहीं साइकोलाजी है जिम्मेदार

    लोग यादों को सहेजने के लिए फाइलों को सेव करते हैं। कुछ लोगों का मानना होता है कि भविष्य में डाक्यूमेंट, रिसीप्ट या प्रेजेंटेशन की जरूरत हो सकती है, वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो सालों से जमा डेटा को हटाने की जहमत नहीं उठाना चाहते। पहले जहां यात्रा के दौरान लोग चुनिंदा फोटो लेते थे, वहीं अब बेशुमार फोटो खींचते हैं, जिनमें से ज्यादातर अनावश्यक होती हैं।

    इसी तरह कुछ अच्छा लगा स्क्रीनशाट ले लिये, बाद में देखने के लिए वीडियो डाउनलोड कर लिये, कुछ ईमेल इसलिए ओपन नहीं करते कि बाद में उसे इत्मीनान से पढ़ेंगे, जो कभी होता ही नहीं। तकनीक ने जानकारियों को सुरक्षित रखना आसान तो बना दिया है, पर उसे व्यवस्थित रखना मुश्किल कर दिया है।

    डिवाइस पर क्या होता है प्रभाव

    स्टोरेज भरने के साथ स्मार्टफोन और लैपटॉप स्लो हो जाते हैं, एप को ओपन होने में समय लगने लगता है, साफ्टवेयर अपडेट अक्सर फेल हो जाते हैं, क्योंकि पर्याप्त स्पेस नहीं है और फोन के बार फ्रीज होने या बंद होने की समस्या तो स्वाभाविक ही है। जिन एप्स का आप महीनों तक प्रयोग नहीं करते, वे केवल स्टोरेज को ही नहीं भरते, बल्कि बैकग्राउंड में उनके आपरेट होने से बैटरी लाइफ भी खत्म हो रही होती है।

    बड़ी फोटो लाइब्रेरी, डुप्लीकेट फाइल्स बैकअप को धीमा करते हैं और नई डिवाइस में डेटा ट्रांसफर को मुश्किल कर देते हैं। कुछ लोग नया फोन या लैपटॉप ले लेते हैं, लेकिन यह आदत एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस तक बनी रहती है।

    किस तरह से होती डिजिटल होर्डिंग

    • फोटो : सेल्फी, स्क्रीनशॉट्स , छुट्टियों की फोटो, धुंधली या बेकार फोटो का स्टोरेज।
    • फाइल : डाक्यूमेंट्स, स्प्रेडशीट्स, प्रजेंटेशंस और दूसरी डिजिटल फाइलों के गैर जरूरी वर्जन।
    • ईमेल : न्यूजलेटर, पुराने ईमेल्स या पर्सनल ईमेल से भरा इनबाक्स ।
    • अनावश्यक एप्स : पुराने या बिना इस्तेमाल वाले एप्स।
    • म्यूजिक और वीडियो : कुछ लोग एल्बम, प्लेलिस्ट या सीरीज स्टोर करके रखते हैं, भले ही वे उस कंटेंट को रेगुलर न देखते या सुनते हों।
    • बुकमार्क: बहुत सारे वेबसाइट लिंक्स और रिसोर्स सेव करने की आदत। ब्राउजर टैब और बुकमार्क से भर जाता है।
    • इंटरनेट मीडिया कंटेंट : कुछ लोग पोस्ट, आर्टिकल, वीडियो या मीम सेव करते हैं, ताकि बाद में देख सके।

    प्रोडक्टिविटी पर इसका असर

    सैकड़ों डाउनलोड की गई पीडीएफ फाइलों में जरूरी इंश्योरेंस डाक्यूमेंट या प्रजेंटेशन खोजने के दौरान काफी समय खराब हो जाता है, क्योंकि अव्यवस्थित फोल्डर्स और भरे हुए इनबाक्स छोटे से काम को भी मुश्किल बना देते हैं। बिना पढ़े हुए हजारों नोटिफिकेशन अधूरे काम का एहसास कराते हैं। भले ही उन फाइलों को आप कभी न खोलें, लेकिन उनके होने से ही मानसिक थकान महसूस होने लगती है। साफ-सुथरा डेस्कटाप और स्मार्टफोन स्क्रीन आपको एकाग्र रखने में मदद करते हैं और इससे आपका समय भी बचता है।

    प्राइवेसी का जोखिम

    हर सेव की गई फाइल में जानकारी होती है। पुराने टैक्स रिटर्न, स्कैन किए गए पहचान पत्र, पासपोर्ट, मेडिकल रिकार्ड, बैंक स्टेटमेंट, सैलरी स्लिप, यात्रा का विवरण, टेक्स्ट फाइलों में सेव किए गए पासवर्ड और सालों की निजी बातचीत अक्सर डिवाइस और क्लाउड अकाउंट में कहीं खो जाती हैं या भुला दी जाती हैं।

    ऐसे में अगर स्मार्टफोन चोरी हो जाए या अकाउंट हैक हो जाए, तो ये भूली-बिसरी फाइलें साइबर अपराधियों के लिए खजाना बन सकती हैं। कई लोग डेटा को डिलीट किए बिना ही पुराने फोन बेच देते हैं या रिसाइकल कर देते हैं, इससे भी खतरा बना रहता है।

    क्लाउड स्टोरेज एक और जटिलता पैदा करता है। शेयर्ड फोल्डर, पुराने परमिशन और इनएक्टिव आनलाइन अकाउंट अनजाने में निजी जानकारी को उजागर कर सकते हैं।

    स्मार्ट आदतें अपनाएं

    • हर महीने डिजिटल सफाई करने का प्रयास करना चाहिए। डुप्लिकेट फोटो डिलीट करना, डाउनलोड साफ करना, इस्तेमाल न होने वाले एप्स को अनइंस्टाल करना और फोल्डर्स में व्यवस्थित करना एक अच्छी आदत है।
    • जरूरी फाइलों का बैकअप सुरक्षित रूप से लिया जाना चाहिए। संवेदनशील डाक्यूमेंट को मजबूत पासवर्ड या एन्क्रिप्शन से सुरक्षित रखना चाहिए। क्लाउड-शेयरिंग सेटिंग्स को भी जांचते रहना चाहिए।
    • ईमेल इनबाक्स पर भी ध्यान देना जरूरी है। प्रमोशनल न्यूजलेटर से अनसब्सक्राइब करना और स्पैम डिलीट करने से जरूरी मैसेज को ढूंढना आसान हो जाता है।
    • कुछ भी सेव करने से पहले खुद से सवाल करें कि क्या मुझे इसकी दोबारा जरूरत पड़ेगी? अगर 'नहीं' है, तो उसे डिलीट कर देना ही बेहतर है।

    डेटा सुरक्षा के लिए जरूरी है डिवाइस हाइजीन

    प्रियंका अग्रवाल, को-फाउंडर एवं सीओओ, एपस्क्वैड्ज

    डिजिटल क्लटर (बेकार का डिजिटल डेटा जमा होना) की समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है। जब डिवाइस धीमे होने लगते हैं, एप्स को लोड होने में अधिक समय लगता है, और फोन 'लो स्टोरेज' की चेतावनी देने लगता है, तो तब लोग इसका समाधान खोजते हैं। हम डिजिटल स्टोरेज के साथ घर के दराज की तरह व्यवहार करते हैं, जिसमें जगह होने के कारण सब कुछ डाल दिया जाता है।

    बेकार की चीजें जैसे डुप्लिकेट फाइलें, वर्षों से बिना देखे डाउनलोड की गई फाइलें और फालतू एप कैशे चुपचाप प्रोसेसिंग रिसोर्स का इस्तेमाल करते हैं, इससे परफार्मेंस में गिरावट आती है। 'पुराने और धीमे' फोन की शिकायत करते हुए लोग नया फोन ले लेते हैं, जबकि असली समस्या वर्षों से जमा डिजिटल डेटा था, जिसे साफ करने के बारे में नहीं सोचा। परफार्मेंस से भी अधिक चिंता की बात प्राइवेसी है।

    लोगों को डिवाइस या क्लाउड अकाउंट में क्या जमा है, यही नहीं पता होता। निजी जानकारी वाले पुराने डाक्यूमेंट, बैकग्राउंड में चल रही भूले-बिसरे एप, लोकेशन डेटा और ऐसी तस्वीरें जिनमें मेटाडेटा के जरिये यह जानकारी होती है कि वे ठीक कहां और कब ली गई थीं- सब जमा होते रहते हैं। अगर यह किसी अनजान व्यक्ति के हाथ में जाता है, तो बड़ा नुकसान हो सकता है।

    डिवाइस हाइजीन को पर्सनल डेटा सिक्योरिटी का सबसे बुनियादी रूप माना जाना चाहिए और इसके लिए बस थोड़ी सा ध्यान देने की जरूरत होती है, इसका कोई खर्च नहीं आता।

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