नेटवर्क न होने पर भी तुरंत समझेगा आपकी भाषा! जानिए कैसे काम करता है Google का ये ऑफलाइन AI टूल
Google ने Antigravity के साथ मिलकर AI Gemma Translator नाम का एक नया पॉकेट-साइज डिवाइस बनाया है। ये ऑन-डिवाइस AI (Edge AI) पर काम करता है, जिससे बिना ...और पढ़ें

Google का AI Gemma Translator।
टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। अमेरीकी टेक दिग्गज Google ने Antigravity के साथ मिलकर एक नया AI Gemma Translator डिवाइस बनाया है। इसे आसानी से जेब में रखा जा सकता है। ये आपकी आवाज सुनेगा और तुरंत इसे आपकी मनपसंद भाषा में ट्रांसलेट करके सुना देगा। इसका मतलब है कि बातचीत का डेटा क्लाउड पर भेजे बिना ही काम हो जाएगा, यानी ये बिना इंटरनेट के काम करेगा। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
क्या है AI Gemma Translator?
ये Google द्वारा बनाया गया एक ऑफलाइन AI ट्रांसलेटर है। इसमें Gemma 4 E2B नाम के ओपन मॉडल का इस्तेमाल किया गया है। इसे Raspberry Pi 5, एक माइक्रोफोन और स्पीकर के साथ 3D-प्रिंटेड बॉडी के अंदर फिट किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि वॉयस इनपुट से लेकर ट्रांसलेशन तक का पूरा प्रोसेस लोकल डिवाइस पर ही होता है।

ये बिना इंटरनेट के ट्रांसलेट कैसे करता है?
आम AI ट्रांसलेटर्स अक्सर क्लाउड सर्वर पर मॉडल चलाते हैं। यूजर की आवाज इंटरनेट के जरिए सर्वर पर जाती है, वहां प्रोसेस होती है और फिर रिस्पॉन्स वापस आता है। लेकिन Gemma Translator इस मॉडल को सीधे डिवाइस पर ही रन करता है। इसे ऑन-डिवाइस AI या 'Edge AI' कहा जाता है, इसलिए इंटरनेट न होने पर भी AI कंप्यूटेशन लोकल लेवल पर पॉसिबल हो जाता है।
इससे आम लोगों को क्या फायदा होगा?
ट्रैवलर्स के लिए ये दूर-दराज के इलाकों या खराब नेटवर्क वाले क्षेत्रों में काफी काम आ सकता है। अस्पताल, कंपनियां या दूसरे संस्थान अपने सेंसिटिव डेटा को क्लाउड पर भेजे बिना ही बातचीत को लोकली प्रोसेस कर सकते हैं। लोकल प्रोसेसिंग के लिए नेटवर्क की जरूरत ही नहीं पड़ेगी, जिसका मतलब है कि ये बिना इंटरनेट या क्लाउड सर्वर के आसानी से काम करेगा।