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स्मार्टफोन, Smart TV और लैपटॉप होंगे महंगे: 7% से 10% तक बढ़ सकती हैं कीमतें, आखिर क्या है वजह?

Published: Tue, 10 Feb 2026 12:12 PM (IST)

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग से मेमोरी चिप्स की मांग में भारी वृद्धि हुई है, जिससे स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी ...और पढ़ें

स्मार्टफोन, Smart TV और लैपटॉप होंगे महंगे: 7% से 10% तक बढ़ सकती है कीमतें, आखिर क्या है वजह?

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टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। इन दिनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के तेजी से बढ़ते यूज का असर अब आम लोगों की जेब पर जल्द ही भारी पड़ सकता है। जी हां, इंडस्ट्री रिपोर्ट्स से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि डेटा सेंटर और सर्वर में मेमोरी चिप की बढ़ती डिमांड के कारण कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए चिप की सप्लाई काफी कम हो रही है। इसी का सीधा असर आने वाले वक्त में स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी और लैपटॉप जैसी डिवाइसेज की कीमतों पर देखने को मिल सकता है।

हालिया रिपोर्ट्स में ऐसा कहा जा रहा है कि अगर सप्लाई में सुधार नहीं हुआ तो इस साल इन इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की कीमतों में 7% से 10% तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। मेमोरी चिप्स की बढ़ती कॉस्ट कंपनियों के लिए प्रोडक्शन और भी महंगा बना रही है, जिसका बोझ अब ग्राहकों पर पड़ सकता है। चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं...

AI की बढ़ती डिमांड से बढ़ रहा दबाव?

स्मार्टफोन से लेकर कई डिवाइस में AI टेक्नोलॉजी के तेजी से विस्तार के चलते डेटा सेंटर और सर्वर के लिए हाई-बैंडविड्थ मेमोरी और सर्वर-ग्रेड DRAM की डिमांड तेजी से बढ़ रही है। चिप बनाने वाली कंपनियां अब ज्यादा प्रॉफिट वाले इन प्रोडक्ट्स पर फोकस कर रही हैं, जिससे कंज्यूमर-ग्रेड मेमोरी चिप्स का प्रोडक्शन काफी गिरा है।

इसी कारण से स्मार्टफोन, टीवी और लैपटॉप में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप्स की उपलब्धता भी कम हो रही है और उनकी कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है।

मेमोरी चिप्स के प्राइस बढ़े

इंटरनेशनल मार्केट में पिछले कुछ वक्त में मेमोरी चिप्स की कीमतें काफी ज्यादा बढ़ गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ मामलों में इनकी कीमतों में 300% से 400% तक की बढ़ोतरी देखने को मिली है। अब इसी का असर सीधे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट पर पड़ रहा है, जिससे कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स महंगे करने पड़ रहे हैं।

टीवी का बदल सकता है ट्रेंड?

टीवी की कीमतें बढ़ने की वजह से एक्सपर्ट्स का मानना है कि लोग 65 इंच जैसे बड़े स्क्रीन वाले मॉडल छोड़कर 55 इंच या उससे छोटे साइज के टीवी खरीदना शुरू कर सकते हैं। इसका मतलब है कि बड़े स्क्रीन का ट्रेंड धीरे-धीरे बदल सकता है।

पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट पर असर

बड़े टेक ब्रांड्स मेमोरी चिप का सबसे ज्यादा यूज करते हैं, जिससे सप्लायर्स पर ज्यादा दबाव बनता है। इससे छोटे ब्रांड्स के लिए चिप्स की उपलब्धता और भी मुश्किल हो जाती है, जिसका असर पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट पर देखने को मिल सकता है।

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