बिना किसी हाई-टेक टूल के बड़ी कंपनियों में सेंध लगा रहे हैकर्स! जानिए क्या है 'वॉयस फिशिंग' का नया खतरा
Google ने अमेरिकी फाइनेंशियल और इन्वेस्टमेंट कंपनियों पर हो रहे 'वॉयस फिशिंग' अटैक्स को लेकर चेतावनी जारी की है। हैकर्स IT सपोर्ट या को-वर्कर्स बनकर ए ...और पढ़ें

अमेरिकी फाइनेंशियल कंपनियों को निशाना बना रहे हैं हैकर्स।
टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। वैसे आजकल AI-पावर्ड साइबर अटैक्स कॉमन होते जा रहे हैं। इसके बावजूद, हैकर्स आसान ट्रिक्स का इस्तेमाल करके कंपनियों में सेंध लगाने में कामयाब हो रहे हैं। Google ने चेतावनी दी है कि कई हैकिंग ग्रुप्स वॉयस फिशिंग (जिसे विशिंग भी कहा जाता है) के जरिए अमेरिका की बड़ी फाइनेंशियल और इन्वेस्टमेंट फर्मों को निशाना बना रहे हैं। एडवांस हैकिंग तरीकों का इस्तेमाल करने के बजाय, अटैकर्स कर्मचारियों के पर्सनल फोन पर कॉल करते हैं और को-वर्कर्स या IT सपोर्ट स्टाफ होने का नाटक करते हैं। फिर वे विक्टिम्स को फेक वेबसाइट्स पर अपनी लॉगिन डिटेल्स और मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन कोड एंटर करने के लिए राजी कर लेते हैं। एक बार एक्सेस हासिल करने के बाद, हैकर्स कंपनी का संवेदनशील डेटा चुरा लेते हैं और पैसों की डिमांड करते हैं। अगर विक्टिम पेमेंट करने से इंकार करते हैं तो चुराई गई जानकारी सार्वजनिक करने की धमकी देते हैं।
Reuters के मुताबिक, टारगेट की गई कंपनियों में Apollo Global Management, Bain Capital, Blackstone, Bridgewater Associates, CME Group, KKR, Moody’s और TPG जैसी मेजर प्राइवेट इक्विटी फर्म्स शामिल हैं। हालांकि, Google ने अपनी रिपोर्ट में ऑफिशियल तौर पर विक्टिम्स के नाम नहीं बताए हैं।
Google ने हैकिंग ग्रुप्स की पहचान Falcon, Helix, Pink और Redact के तौर पर की है। Google रिसर्चर्स का मानना है कि ये ग्रुप्स UNC6671 के तौर पर ट्रैक किए जाने वाले एक बड़े ऑपरेशन से जुड़े हो सकते हैं। लेकिन, अभी भी ये क्लियर नहीं है कि वे आपस में जुड़े हैं, अलग-अलग काम करते हैं या एक ही फिशिंग टूल्स शेयर करते हैं।
टेक दिग्गज ने रिपोर्ट में लिखा, 'हमारा मानना है कि ये शायद हैकर्स के एक ग्रुप का काम है जो एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं और कई अलग-अलग एक्सटॉर्शन वाले ब्रांड चला रहे हैं। ऐसा वे शायद अपने काम को अलग-अलग हिस्सों में बांटने, डेटा चोरी के असली आंकड़ों को छिपाने और नेगोशिएशन में होने वाले नुकसान से खुद को बचाने के लिए कर रहे हैं।'
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इनमें से कुछ हैकिंग ग्रुप्स ऐसी वेबसाइट्स भी चलाते हैं जहां वे अपने अटैक्स की डिटेल्स पोस्ट करते हैं। वे चुराए गए कंपनी डेटा को लीक करने की धमकी देकर विक्टिम्स पर फिरौती देने का दबाव बनाने के लिए इन साइट्स का इस्तेमाल करते हैं।
Google ने कहा कि इन्हीं हैकर्स ने मैन्युफैक्चरिंग, रियल एस्टेट, हेल्थकेयर, इंश्योरेंस, टेक्नोलॉजी, ट्रांसपोर्टेशन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की कंपनियों को भी टारगेट किया है।
हाल के समय में, अटैकर्स का ध्यान लीगल और फाइनेंशियल ऑर्गनाइजेशन्स पर रहा है। Google के रिसर्चर्स ने लिखा, 'मर्जर, एक्विजिशन, कैपिटल डिप्लॉयमेंट और मुकदमों में शामिल ऑर्गनाइजेशन्स पर ध्यान देना फिरौती की डिमांड्स का दबाव बढ़ाने के लिए हाई-वैल्यू कॉर्पोरेट और कॉन्फिडेंशियल डेटा को टारगेट करने की स्ट्रेटेजी हो सकती है।'
Google ने ये भी पाया कि हैकिंग ग्रुप्स में से एक से जुड़े क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट में इस साल के शुरुआती कुछ महीनों के दौरान बिटकॉइन में लगभग $10 मिलियन (लगभग 83 करोड़ रुपये) मिले। कंपनी ने कहा, 'शुरुआती फिरौती की डिमांड आमतौर पर $1 मिलियन से लेकर $3 मिलियन से ऊपर तक होती है।'