चलते ई-रिक्शा को बीच सड़क पर बंद करने वाले 3 Apps पर सरकार का एक्शन, एप स्टोर्स से हटाने का दिया आदेश
भारत सरकार ने एक बड़ा एक्शन लेते हुए उन 3 स्मार्टफोन एप्लिकेशन्स को ब्लॉक करने का आदेश दिया है, जिनका इस्तेमाल सड़क पर चलते e-rickshaws को रिमोटली बंद ...और पढ़ें

सरकार ने BAT-BMS समेत इन 3 एप्स पर लगाया बैन। Photo- ChatGPT.

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टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। सरकार ने उन तीन स्मार्टफोन एप्लिकेशन्स को हटाने का आदेश दिया है, जिनका कथित तौर पर बैटरी से चलने वाले व्हीकल्स को रिमोटली डिसेबल करने के लिए गलत इस्तेमाल किया जा रहा था। ये जानकारी सरकारी सूत्रों और न्यूज एजेंसी PTI के हवाले से मिली है।
इन एप्स को ऐप स्टोर्स से हटाने का आदेश तब आया, जब ऐसी रिपोर्ट सामने आईं कि ब्लूटूथ के जरिए ई-रिक्शा के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) से कनेक्ट करके उन्हें रिमोटली बंद किया जा रहा था।
शुक्रवार को आयोजित एक CII साइबर सिक्योरिटी समिट के इतर बात करते हुए, IT सेक्रेटरी S Krishnan ने कन्फर्म किया कि इन एप्स के सरकार के संज्ञान में आने के बाद कार्रवाई की गई है। PTI के मुताबिक, कृष्णन ने कहा, 'ये सही है... कुछ एप्स कल हमारे संज्ञान में आए थे और उन दोनों को एप स्टोर्स से हटा दिया गया है।' सरकारी सूत्रों ने बाद में बताया कि तीन एप्स- BAT-BMS, Lossigy और Epoch-i-ion के लिए रिमूवल ऑर्डर्स जारी किए गए थे।
हालांकि, हमने देखा कि अभी ये सभी एप्स गूगल प्ले स्टोर्स पर उपलब्ध हैं।
सरकार ने एप स्टोर्स से कहा है कि वे एप्स की जांच-परख और कड़ाई से करें
कृष्णन ने इस बात पर भी जोर दिया कि एप स्टोर्स को अपने प्लेटफॉर्म पर एप्लिकेशन्स को परमिशन देने से पहले उचित जांच-पड़ताल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे को उनके साथ उठाएगी ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि संभावित रूप से नुकसानदेह एप्स उपलब्ध न हों।
पूरे ई-रिक्शा 'Tirrii' समाज में BAT-BMS ऐप की वजह से दहशत का माहौल बना हुआ है।
— Nilesh (@Drx_Nilesh7) July 1, 2026
BAT-BMS ऐप के जरिए आप अपने आस पास के ई- रिक्शा को ब्लूटूथ के साथ कनेक्ट कर उसे कंट्रोल कर सकते हैं।
अपने फोन से ही ई रिक्सा को बंद कर सकते है pic.twitter.com/dKHbfcWg8H
Chinese app BAT-BMS sparks panic by remotely shutting off e-rickshaws & scooters via Bluetooth on their batteries.💀 pic.twitter.com/oeyG2haBqN
— Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) July 1, 2026
ये मुद्दा बड़े लेवल पर तब चर्चा में आया जब सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें दावा किया गया कि कुछ ई-रिक्शा को ब्लूटूथ-इनेबल्ड बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़े स्मार्टफोन एप्स के जरिए रिमोटली बंद किया जा रहा था। इन वीडियोज ने इंटरनेट से जुड़े व्हीकल मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़े साइबर सिक्योरिटी के खतरों पर चिंता बढ़ा दी।
दिल्ली सरकार ने अपने ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट से कहा है कि वे 'BAT-BMS' एप की असली सच्चाई का पता लगाएं। साथ ही, इस बात की भी जांच करें कि क्या ये एप सच में ब्लूटूथ के रिए ई-रिक्शा को दूर से ही बंद कर सकता है।
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ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर पंकज सिंह ने कहा कि शिकायतें विभाग के संज्ञान में आने के बाद अधिकारियों को मामले की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं, हालांकि कोई औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी।
ये एप्स कथित तौर पर कैसे काम करते हैं?
सरकारी अधिकारियों की शुरुआती जांच से पता चलता है कि ये एप्लिकेशन्स यूजर्स को एक लिमिटेड रेंज के भीतर ब्लूटूथ-इनेबल्ड लिथियम बैटरी से वायरलेस तरीके से कनेक्ट करने की इजाजत देते हैं। हालांकि ऐसे एप्लिकेशन्स को वोल्टेज, टेम्परेचर और करंट जैसे बैटरी पैरामीटर्स की निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि बैटरी से चलने वाले वाहनों को बंद करने के लिए इनका गलत इस्तेमाल किया गया है।
अधिकारियों ने ये भी पॉइंट आउट किया कि भारत में कई बजट ई-रिक्शा चाइनीज मैन्युफैक्चर्ड बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें सिक्योरिटी फीचर्स बेहद सीमित होते हैं। इन सिस्टम्स में अक्सर पासवर्ड प्रोटेक्शन या ऑथेंटिकेशन नहीं होता है, जिससे आस-पास के यूजर्स के लिए ब्लूटूथ के जरिए कनेक्ट करना और बैटरी के पावर आउटपुट को बंद करना संभव हो जाता है।
BAT-BMS को चीन के शेनझेन प्रांत की कंपनी 'Shenzhen Grenergy Technology' द्वारा एक बैटरी मैनेजमेंट टूल के रूप में डेवलप किया गया था, जो यूजर्स को बैटरी हेल्थ की निगरानी करने और कंपैटिबल लिथियम बैटरियों को रिमोटली मैनेज करने की सुविधा देता है। हालांकि, भारत में कुछ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में लगे अनसिक्योर्ड बैटरी सिस्टम से कनेक्ट करके इसके रिमोट-कंट्रोल फंक्शनलिटी का गलत फायदा उठाया गया है।
कई वायरल वीडियो में देखा गया कि यूजर्स इन एप्लिकेशन्स के जरिए बैटरी के डिस्चार्ज फंक्शन को बंद कर देते थे, जिससे ई-रिक्शा बीच सड़क पर ही खड़े रह जाते थे। कुछ ड्राइवरों ने कथित तौर पर दावा किया कि इस तरह टारगेट किए जाने के बाद उन्हें अपने व्हीकल्स को दोबारा शुरू करने के लिए अनजान लोगों को पैसे देने पड़े।