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    सावधान! Meta ने जारी की चेतावनी; नकली WhatsApp के जरिए हो रही है जासूसी

    Updated: Thu, 02 Apr 2026 03:33 PM (GMT+05:30)

    मार्क जकरबर्ग की अगुवाई वाली कंपनी Meta ने एक स्टेटमेंट जारी कर एक फेक WhatsApp एप के बारे में अलर्ट जारी किया है। इस फेक एप का इस्तेमाल यूजर्स की जास ...और पढ़ें

    Meta ने फेक WhatsApp एप के बारे में चेतावनी दी है।

    Meta ने फेक WhatsApp एप के बारे में चेतावनी दी है। 

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    टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। Meta ने हाल ही में इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp के लिए नए स्कैम और फ्रॉड प्रोटेक्शन टूल्स पेश किए हैं। इनमें एक नया डिवाइस लिंकेज वॉर्निंग सिस्टम भी शामिल है, जिसे यूजर्स को तब अलर्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है, जब कोई संदिग्ध व्यक्ति रिमोटली किसी विक्टिम के अकाउंट पर कब्जा करने की कोशिश करता है। हालांकि, हैकर्स ने भी यूजर्स को निशाना बनाने के लिए नए-नए तरीके अपनाना शुरू कर दिया है, खासकर स्पाइवेयर के बढ़ते इस्तेमाल के साथ। बुधवार को, मार्क जकरबर्ग के नेतृत्व वाली इस टेक कंपनी ने एक बयान जारी कर यूजर्स को एक नकली WhatsApp एप के बारे में चेतावनी दी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस एप का इस्तेमाल खासतौर पर इटली में यूजर्स की जासूसी करने के लिए किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस स्पाइवेयर ने लगभग 200 Android और iPhone यूजर्स को निशाना बनाया है।

    फेक WhatsApp से रिस्क

    अमेरिका बेस्ड इस टेक कंपनी ने इटली की एजेंसी नाजियोनेल स्टैम्पा एसोसिएटा (ANSA) को दिए एक बयान में एक फेक WhatsApp एप के बारे में चेतावनी दी। इस एप का इस्तेमाल लगभग 200 Android और iPhone यूजर्स की जासूसी करने के लिए किया जा रहा था, खासकर इटली में। Meta ने कथित तौर पर कहा कि कंपनी ने प्रभावित अकाउंट्स को डिस्कनेक्ट कर दिया है और विक्टिम्स को प्राइवेसी और सुरक्षा से जुड़े जोखिमों के बारे में चेतावनी दी है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, ये फेक WhatsApp एप Asigint ने बनाया था, जो इटली के कैंटू बेस्ड Sio Spa Group का हिस्सा है। टेक कंपनी का मानना है कि Asigint के हैकर्स ने 'सीमित संख्या में यूजर्स' को धोखा देने के लिए सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया। उन्होंने WhatsApp के आधिकारिक वर्जन होने का दिखावा करके यूजर्स से ये स्पाइवेयर डाउनलोड करवाया। ये हैकर्स रिमोटली यूजर्स के अकाउंट्स और डिवाइस को एक्सेस करने की कोशिश कर रहे हो सकते हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि कंपनी Sio Spa के कंट्रोल वाली इस फर्म को 'किसी भी मैलिसियस एक्टिविटी को रोकने' के लिए एक फॉर्मल वॉर्निंग भेजने की योजना बना रही है।

    La Repubblica की रिपोर्ट के मुताबितक, Meta का दावा है कि ये स्पाइवेयर WhatsApp के अंदर मौजूद किसी भी आंतरिक कमजोरी का फायदा नहीं उठाता है। इसलिए, आधिकारिक WhatsApp एप इस्तेमाल करने के लिए सुरक्षित है। बताया जा रहा है कि कंपनी EU में यूजर्स से रिक्वेस्ट कर रही है कि वे इस इंस्टेंट मैसेजिंग एप को केवल ट्रस्टेड प्लेटफॉर्म से ही डाउनलोड करें। कंपनी ने कथित तौर पर कहा कि उसे 'WhatsApp के आधिकारिक एप्स, इंफ्रास्ट्रक्चर या एन्क्रिप्शन में किसी भी तरह की ब्रीच का सामना नहीं करना पड़ रहा है।

    खबरें और भी

    डिवाइस तक एक्सेस बनाने के अलावा, इस स्पाइवेयर ने संभवतः यूजर की दूसरों के साथ की गई चैट्स तक का पूरा एक्सेस दे दिया था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ये फेक वर्शन, आधिकारिक WhatsApp एप के उलट, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन की सुविधा नहीं देता है। एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन की सुविधा होने पर केवल उन्हीं डिवाइस पर दो यूजर्स के बीच की बातचीत पढ़ी जा सकती है, जिनके पास एन्क्रिप्शन कीज (keys) मौजूद होती हैं। इसी तरह, इससे प्राइवेसी को भी एक बड़ा खतरा पैदा होता है, क्योंकि ये हैकर्स को किसी डिवाइस पर मौजूद निजी डेटा और क्रेडेंशियल्स को एक्सेस करने अनुमति दे सकता है।

    2024 में, Apple ने Digital Markets Act (DMA) का पालन करते हुए, EU के 27 देशों में यूजर्स को एप्स और थर्ड-पार्टी मार्केटप्लेस को साइडलोड करने की अनुमति दी थी। Android डिवाइस पर एप्स साइडलोड करने का ऑप्शन दुनिया भर के यूजर्स के लिए पहले से ही उपलब्ध था। हालांकि, EU ने अपने DMA के जरिए ये कहा कि Google और Apple, Android और iOS डिवाइस पर क्रमशः केवल Play Store और App Store उपलब्ध कराकर एकाधिकार जमाए हुए हैं।

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