जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए काटने पड़ रहे चक्कर, आगरा में 80 प्रतिशत निजी अस्पताल नहीं दे रहे; कसेगा शिकंजा
आगरा में निजी अस्पताल जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने में लापरवाही बरत रहे हैं, जिससे लोगों को नगर निगम के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। सीएमओ ने 80% ...और पढ़ें

आगरा नगर निगम।
जागरण संवाददाता, आगरा। सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रसव और मरीज की मृत्यु होने के बाद प्रमाण पत्र के लिए लोग भटक रहे हैं। अस्पतालों से जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं दिए जा रहे हैं, नगर निगम में आवेदन करने पर चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
निजी अस्पतालों के लिए नागरिक पंजीकरण प्रणाली (सीआरएस) से जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की अनिवार्यता है, 80 प्रतिशत अस्पताल प्रमाण पत्र जारी नहीं कर रहे हैं। इन अस्पतालों पर शिकंजा कसेगा, प्रमाण पत्र न देने पर जुर्माना वसूला जाएगा।
जिले में 505 निजी अस्पताल पंजीकृत हैं। इन अस्पतालों को सीआरएस से जोड़ा गया है। अस्पताल में प्रसव होने और मरीज की मृत्यु होने पर सीआरएस में ब्योरा दर्ज करना अनिवार्य है, ब्योरा दर्ज करते ही जन्म और मृत्यु का प्रमाण पत्र जारी हो जाता है। इसके बाद नगर निगम से प्रमाण पत्र जारी नहीं कराना पड़ता है।
मगर, निजी अस्पतालों में सीआरएस पर ब्योरा दर्ज नहीं किया जा रहा है। निजी अस्पताल में प्रसव और मृत्यु होने के बाद लोगों को नगर निगम में आवेदन करना पड़ रहा है। दस्तावेज जमा करने के साथ ही टीम जांच के लिए उनके घर और अस्पताल जाती है इसके बाद प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। इसमें समय भी ज्यादा लगता है।
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सीएमओ डा. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पतालों के लिए सीआरएस से जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की अनिवार्यता है इसके बाद भी 80 प्रतिशत अस्पतालों से प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जा रहे हैं। इन अस्पतालों पर 100 रुपये जुर्माना लगाया जाएगा। इसके बाद भी प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जाते हैं तो कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल के बाहर पीले बोर्ड पर देख लें सुविधाएं और डाक्टर नाम ब्योरा
अस्पतालों पर पीले रंग का बोर्ड लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसमें पंजीकरण संख्या, डाक्टर का नाम, डिग्री, पता के साथ ही ओपीडी, आइपीडी, सर्जरी, आइसीयू, इमरजेंसी सहित अन्य सुविधाएं दर्ज करनी है। पैरामेडिकल स्टाफ का ब्योरा, बेड की संख्या और प्रमुख चार्ज भी दर्ज करने हैं।