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    ये है सच्ची दोस्ती... स्कूल फीस के नहीं थे रुपये; आगरा में थर्ड क्लास के बच्चों ने अपनी पॉकेट मनी से जुटाकर कर दी जमा

    By Sandeep Kumar Edited By: Prateek Gupta
    Updated: Fri, 31 Jul 2026 10:33 PM (IST)

    आगरा में तीसरी कक्षा के छात्रों ने अपने सहपाठी की स्कूल फीस जमा करने के लिए अपनी पॉकेट मनी इकट्ठी की, ताकि वह परीक्षा से वंचित न हो। स्कूल प्रबंधन ने ...और पढ़ें

    AI जेनरेटेड सांकेतिक तस्वीर का प्रयोग किया गया है।

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    डॉ. संदीप शर्मा, आगरा। आज के दौर में लोग सच्ची दोस्ती की तलाश में हैं। वर्तमान समय में सहयोग, समर्पण और समरसता का शायद ही कोई इससे उम्दा उदाहरण मिलेगा। पब्लिक स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ने वाला एक छात्र अपनी फीस जमा न कर सका तो सहपाठियों को दर्द हो गया। उन्हें लगा कि साथी परीक्षा से वंचित हो जाएगा। फिर क्या था उन्होंने अपनी जेब खर्च की रकम इकट्ठी कर ली और स्कूल में जमा करा दी।

    जब स्कूल प्रबंधन को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने फीस वापस करने के साथ ही स्कूल की प्रार्थना सभा में बच्चों की सराहना की। अब ये मददगार बच्चे पूरे स्कूल में नजीर बन गए हैं। कालिंदी विहार स्थित न्यू सेंट स्टीफेंस पब्लिक स्कूल के प्रबंधन ने अभिभावकों को चेतावनी संदेश भेजा था कि जिन विद्यार्थियों की फीस जमा नहीं होगी, वह परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे। सूचना बच्चों तक भी पहुंची

    तीसरी कक्षा में पढ़ रहे छात्र की फीस जमा नहीं थी। गुरुवार को उसने साथियों से चर्चा की कि वह पेपर नहीं दे सकेगा। उसने बताया कि फीस में 700 रुपये कम हैं। सहपाठियों ने जेब खर्च को घर से मिले रुपये इकट्ठे कर लिए। किसी ने 20 रुपये दिए, किसी ने 50 रुपये, तो किसी ने बचाकर रखे सिक्के आगे बढ़ा दिए। सभी के मन में एक ही भावना थी कि साथी की परीक्षा नहीं छूटनी चाहिए।

    कुछ ही देर में बच्चों ने मिलकर 700 रुपये एकत्र कर लिए और फीस जमा करा दी। इसकी जानकारी स्कूल मैनेजर एससी वर्मा को मिली ताे वे स्कूल पहुंच गए। बच्चों से पूरी बात जानी तो उनकी सोच और संवेदनशीलता से प्रभावित हुए। उन्होंने सभी बच्चों के प्रयास को सराहा और जिन बच्चों ने फीस के लिए रुपये जुटाए थे, उन्हें उनकी राशि वापस कराई

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    उन्होंने शिक्षकों और कर्मचारियों को निर्देश दिए कि फीस या किसी अन्य कारण से किसी भी विद्यार्थी की पढ़ाई व परीक्षा बाधित नहीं होनी चाहिए। शुक्रवार को स्कूल की प्रार्थना सभा में भी कक्षा तीन के बच्चों की सराहना की गई।

     

    बचपन में विकसित होती है सामाजिक जिम्मेदारी

    समाजशास्त्री प्रो. मो. अरशद का कहना है कि बच्चों का यह व्यवहार उनके सामाजिक विकास का सकारात्मक संकेत है। बच्चे अपने आसपास के वातावरण से सीखते हैं।

    मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र के डा. जितेंद्र यादव बताते हैं कि बचपन में दूसरों की परेशानी समझना और मदद को आगे आना भावनात्मक विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। छोटी उम्र में बच्चे किसी साथी की समस्या को अपनी समझकर समाधान खोजने की प्रयास करें, तो यह उनकी भावनात्मक परिपक्वता को दर्शाता है।