चंबल में उतरी CEC टीम, अवैध रेत उत्खनन से छलनी हुए घाट; 30 KM तक निरीक्षण
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद सीईसी टीम ने चंबल अभ्यारण्य में अवैध रेत उत्खनन का निरीक्षण किया। टीम को कई स्थानों पर अवैध खनन के गड्ढे और रेत का अवैध ...और पढ़ें

चंबल नदी किनारे निरीक्षण करती टीम। जागरण

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जेएनएन, आगरा। चंबल में रेत के अवैध उत्खनन पर सुप्रीम कोर्ट के स्वत: संज्ञान लेते हुए मप्र, राजस्थान और उप्र सरकार को फटकार लगाने के बाद शुक्रवार को सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) की टीम चंबल अभ्यारण्य क्षेत्र में पहुंच गई।
टीम ने मोटरबोट से 30 किलोमीटर दायरे में चंबल के घाट देखे। टीम को मध्य प्रदेश में कई स्थान पर अवैध रेत उत्खनन के गड्ढों से छलनी हुए घाट दिखाई दिए। वहीं कुछ स्थान पर रेत का अवैध भंडारण भी टीम को मिला।
अवैध रेत उत्खनन पर रोक लगाने के लिए तीनों राज्यों के अधिकारियों के साथ बैठक की। वन विभाग के अधिकारियों ने चंबल नदी किनारे नई पोस्ट, चौकियां, वनकर्मी व एसएएफ जवानों की तैनाती की मांग सीईसी के सामने रखी गई।
अवैध रेत उत्खनन की हकीकत जानने राजस्थान, एमपी और यूपी के चंबल के घाट देखे
सीईसी के सदस्य चंद्रप्रकाश गोयल शुक्रवार सुबह 10 बजे सबसे पहले धौलपुर पहुंचे। धौलपुर में भी चंबल नदी घड़ियाल अभ्यारण्य से सटे कुछ क्षेत्रों में रेत का अवैध उत्खनन होता है। धौलपुर में अफसरों की बैठक लेने के बाद दोपहर 12 बजे राजघाट पर पहुंचे। मोटरबोट से राजघाट से ऊपर की ओर बरवासिन, देवपुर, राजस्थान के मोरोली, डांग बसई के घाट देखे। राजस्थान के नीचे की ओर पिपरई की ओर घाटों का निरीक्षण किया।
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वन विभाग के अधिकारियों ने चंबल नदी किनारे 16 नई पोस्ट
सुप्रीम कोर्ट ने राजघाट के पुल की पिलरों की नींव तक हो रहे अवैध उत्खनन पर गहरी नाराजगी जताई, इसलिए सीईसी सदस्य ने पुल के आसपास अवैध उत्खनन का जायजा लिया। इस दौरान अवैध गड्ढों से छलनी हुए घाट देखकर व्यापक स्तर पर हो रहे अवैध उत्खनन की हकीकत सामने आ गई। कुछ जगहों पर रेत का अवैध भंडारण भी टीम को मिला। चंबल में 20 किलोमीटर घाटों को मोटरबोट से देखा। राजस्थान और मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा घाटों पर बनाए गए चेक पोस्ट, चंबल के अंदर से रेत ले जाने के बनाए गए अवैध रास्तों को भी देखा।
तीन वन चौकियां खोलने की मांग रखी
बैठक में मप्र वन विभाग के अफसरों ने अमले की कमी बताते हुए कहा, कि चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य का सबसे बड़ा हिस्सा मुरैना में है और रेत के घाटों की संख्या भी मुरैना में अधिक है।
इन पर निगरानी और प्रभावी कार्रवाई के लिए चंबल नदी किनारे 16 नई पोस्ट, तीन वन चौकियां खोली जानी चाहिए, इनके लिए 240 वनकर्मी व एसएएफ जवानों की मांग भी वन अफसरों ने सीईसी के समक्ष रखी। साथ ही अवैध उत्खनन व परिवहन के लिए संवेदनशील इलाकों में तैनात वनकर्मियों को हथियार दिए जाने की जरूरत बताई।
मप्र वन विभाग के पीसीसीएफ शुभरंजन सेन, मुरैना कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़, एसपी समीर सौरभ, धौलपुर कलेक्टर श्रीनिधि बीटी. धौलपुर एसपी विकास सागवान, मुरैना डीएफओ हरीश बघेल, धौलपुर डीएफओ आशीष व्यास और उप्र के आगरा के डीएफओ आदर्श कुमार शामिल रहे।
मोटरबोट से 10 किलोमीटर के दायरे में चंबल के घाटों को देखा
शाम छह बजे टीम जैतपुर के नदगमा में तीन किलोमीटर अंदर चंबल सेंचुरी अभ्यारण्य पहुंचे। मोटरबोट से 10 किलोमीटर के दायरे में चंबल के घाटों को देखा। यहां शांत वातावरण को जलीय जन्तुओं के लिए अनुकूल बताते हुए घड़ियाल, मगरमच्छ और डाल्फिन की जानकारी ली। टीम ने क्षेत्र में पूर्व में हुए अवैध उत्खनन के बारे में भी जानकारी ली, एसडीओ कृष्णा चंद्रशेखर राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी प्रोजेक्ट इटावा, कुलदीप साहब पंकज, रेंजर बाह,एसीपी हरे कृष्णा शर्मा आदि मौजूद रहे।