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आगरा में जीएसटी चोरी का बड़ा पर्दाफाश: GST सहायक आयुक्त समेत 3 अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का केस

Updated: Wed, 12 Aug 2026 07:25 AM (IST)

आगरा में रेलवे पार्सल बोगी से माल भेजने में 42 लाख रुपये की जीएसटी चोरी का बड़ा खुलासा हुआ है। विजिलेंस जांच में पुष्टि होने पर सहायक आयुक्त समेत तीन जीएसटी अधिकारियों और एक ट्रांसपोर्टर पर भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज किया गया है।

सांकेतिक तस्वीर।

सांकेतिक तस्वीर।

HighLights

  1. रेलवे पार्सल से 42 लाख की जीएसटी चोरी

  2. तीन जीएसटी अधिकारी, एक ट्रांसपोर्टर पर मुकदमा

  3. विजिलेंस जांच में भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ

जागरण संवाददाता, आगरा। रेलवे की पार्सल बोगी में फर्जी प्रपत्रों से माल दूसरे राज्यों में माल भेजकर जीएसटी चोरी के बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ है। पार्सल से भेजने वाले ट्रांसपोर्टर और अधिकारियों द्वारा मिलीभगत करके 42 लाख रुपये के माल को दो लाख का दर्शाने की शिकायत शासन में हुई थी।

विजिलेंस जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर तत्कालीन सहायक आयुक्त वाणिज्यकर संदीप कुमार सिंह, वाणिज्य कर अधिकारी देवेश पांडेय एवं सतीश चंद्र और ट्रांसपोर्टर के विरुद्ध भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज किया गया है।

42 लाख रुपये का माल दो लाख का दर्शाकर पार्सल से भेजने की शासन में हुई थी शिकायत

शासन में वर्ष 2023 में रेलवे की पार्सल बोगी में माल भेजने में जीएसटी चोरी की शिकायत हुई थी। शासन द्वारा विजिलेंस को खुली जांच के आदेश दिए गए। विजिलेंस जांच में सामने आया कि फोर्ट रेलवे स्टेशन पर अवध एक्सप्रेस की बोगी में 29 सितंबर और सात अक्टूबर 2022 को पार्सल बोगी में माल लोड किया गया। शिकायतकर्ता रवि गांधी ने सचल दल पंचम के प्रभारी सहायक आयुक्त संदीप कुमार सिंह और वाणिज्य कर अधिकारी देवेश पांडेय को बताया कि माल बांद्रा टर्मिनल रेलवे स्टेशन भेजा जा रहा है। माल ट्रांसपोर्टर असलम कुरैशी द्वारा भेजा जा रहा है।

ट्रांसपोर्टर और जीएसटी अधिकारियो की मिलीभगत से चल रहा था खेल

जिस पर सचल दल के पंचम के अधिकारी सहायक आयुक्त संदीप कुमार सिंह, वाणिज्य कर अधिकारी देवेश पांडेय और सतीश चंद्र आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन पहुंचे। उन्होंने शिकायतकर्ता को बताया कि बोगी खाली है। जबकि रेलवे विभाग के अभिलेखों में बोगी को 29 सितंबर 2022 की सुबह सवा नौ से रात 11:40 बजे बजे तक माल लोड किया गया था। कई बार शिकायत के बावजूद सचल पंचम दल ने कोई कार्रवाई नही की।

विजिलेंस जांच में पर्दाफाश

विजिलेंस की जांच पता चला कि ट्रासपोर्टर असलम कुरैशी ने पार्सल बोगी से भेजे माल की मूल्य दो लाख रुपये दर्शाया था। जबकि जीएसटी विभाग की जांच में माल का मूल्य 42 लाख रुपये का होना पाया गया। विजिलेंस जांच में सामने आया कि सचल दल पंचम के अधिकारियों ने ट्रांसपोर्टर को लाभ पहुचांने के लिए चेकिंग नहीं की

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स्कैनिंग मशीन से होता था खेल

ट्रांसपोर्टर द्वारा सारा खेल स्टेशन पर लगी स्कैनिंग मशीन से किया जाता था। उसने डेढ़ वर्ष पहले रेलवे से अनुमति लेकर पार्सल होने वाले माल की स्कैनिंग करने को मशीन लगवाई थी। प्रत्येक स्कैनिंग के दस रुपये रेलवे को देता था। जिससे रेलवे को हर महीने तीन लाख रुपये की आय होती थी। ट्रांसपोर्टर पार्सल किए जाने वाले माल को स्कैनिंग नहीं करता था। स्कैनिंग के फर्जी तरीके से माल स्कैनिंग दिखाकर रेलवे के राजस्व की चोरी करता था। रेलवे की गोपनीय जांच में इसका पर्दाफाश होने पर उसकी जमानत राशि जब्त कर ली गयी थी।

खुली जांच की रिपोर्ट शासन को भेजी गयी थी। शासन से अनुमति के बाद तीन जीएसटी अधिकारियों और ट्रांसपोर्टर पर मुकदमा दर्ज किया गया है। विवेचना की जा रही है, जो भी नाम प्रकाश में आएंगे उन्हें भी आरोपित बनाया जाएगा।

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आलोक शर्मा, एसपी विजिलेंस