आगरा DPS स्कूल मारपीट केस: दारोगा समेत तीन पुलिसकर्मी निलंबित, किशोर न्याय अधिनियम का उल्लंघन पड़ा भारी
आगरा में एक नाबालिग आरोपी के मामले में किशोर न्याय अधिनियम का पालन न करने पर सिकंदरा थाने के एक दारोगा समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया ह ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

समय कम है?
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जासं, आगरा: नाबालिग आरोपित के मामले में किशोर न्याय अधिनियम का पालन नहीं करने पर सिकंदरा थाने के दारोगा समेत तीन पुलिसकर्मियों पर मंगलवार को कार्रवाई की गई। आरोपित की उम्र 16 वर्ष से कम होने पर नियमानुसार उसका जीडी में तस्करा डालकर किशेार न्याय बोर्ड के सामने पेश करना था।
बोर्ड द्वारा दिए जाने वाले दिशा-निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई करनी थी। पुलिस ने घायल छात्र के पिता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज करने के बाद आरोपित छात्र को मंगलवार किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया।
नाबालिग आरोपित पर जीडी में तस्करा डाल किशोर न्याय बोर्ड के सामने करना था पेश
मामला संज्ञान में आने पर डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने दारोगा मानपाल सिंह, मुख्य आरक्षी कमल चंदेल और आरक्षी सन्नी धामा को निलंबित कर दिया। इंस्पेक्टर सिकंदरा के विरुद्ध विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही किशोर के खिलाफ दर्ज मुकदमा भी शाम को खत्म कर दिया।
डीपीएस में दसवीं के छात्र को पंच मार तोड़े थे दांत
शास्त्रीपुरम स्थित डीपीएस परिसर के प्रथम तल पर दसवीं कक्षा के दो छात्रों में विवाद हो गया था। एक छात्र ने नुकीला पंच से हमला बोल दिया था। जिसमें छात्र विश्वराज के चार दांत टूट गए थे। उसके जबड़े में भी गंभीर चोट लगी थी। घायल छात्रा के पिता पीयूष मल्होत्रा यूट्यूुबर हैं। पुत्र को चोट लगने की सूचना पर स्कूल पहुंचे पिता ने इंटरनेट मीडिया पर इसे लेकर पोस्ट डाली थी। जिसके बाद मामला चर्चा में आया था।
घायल छात्र के पिता ने इंटरनेट मीडिया पर अपना वीडियो प्रसारित किया। जिसमेंआरोपित छात्र और स्कूल प्रबंधन पर कार्रवाई पर्दा डालने का आरोप लगाया था।
भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2) और 117(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया
पिता की तहरीर पर सिकंदरा थाने में मंगलवार को छात्र के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2) और 117(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया। छात्र को हिरासत में लेने के बाद उसे किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया गया। जबकि किशोर न्याय अधिनियम 2015 के अनुसार आरोपित की छात्र 16 वर्ष से कम होने के चलते उसके विरुद्ध मुकदमा दर्ज नहीं किया जाना था। जीडी में तस्करा दर्ज करके उसे किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया जाना था। मामला अधिकारियों के संज्ञान पर उन्होंने इसे गंभीरता से लिया।
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इंस्पेक्टर सिकंदरा के विरुद्ध विभागीय जांच
डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि किशोर न्याय अधिनियम का पालन नहीं करने पर दारोगा मानपाल सिंह, कमल चंदेल और आरक्षी सन्नी धामा को निलंबित कर दिया। वहीं, इंस्पेक्टर सिकंदरा प्रदीप कुमार त्रिपाठी के विरुद्ध विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं। पुलिस द्वारा आरोपित छात्र को लेकर किशोर न्याय बोर्ड द्वारा बुधवार को दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। साथ ही किशोर के खिलाफ दर्ज मुकदमा भी मंगलवार शाम को ही खत्म कर दिया गया है।
धारा 115(2): जानबूझकर किसी को शारीरिक रूप से चोट पहुंचाना, एक वर्ष तक की सजा या 10 हजार रुपये तक जुर्माना।
धारा 117(2): यदि कोई व्यक्ति किसी को जानबूझकर चोट पहुंचाता है तो यह अपराध माना जाएगा, इसमें अधिकतम साव वर्ष तक की सजा है।
ये है नियम
- आरोपित की आयु सात वर्ष या उससे कम है जो उसके विरुद्ध न ताे कोई मुकदमा दर्ज किया जाएगा और ना ही जीडी में तस्करा दर्ज किया जाएगा।
- आरोपित की आयु 16 वर्ष से कम है, लेकिन उसने किसी व्यस्क के साथ मिलकर अपराध किया है तो उसके विरुद्ध मुकदमा दर्ज हो सकता है।
- आरोपित की आयु 16 वर्ष से कम है, उसने अपराध अकेले किया है तो मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा, जीडी में तस्करा डालकर उसे किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया जाएगा। बोर्ड उसके विषय में निर्णय लेगा।
स्कूल प्रबंधन ने भी जारी किया था पत्र
छात्र के साथ हुई घटना को लेकर स्कूल प्रबंधन की ओर से पत्र जारी किया गया है। जिसमें प्रबंधन ने दोनों छात्रों के बीच विवाद होने की जानकारी दी है। प्रबंधन ने सीसीटीवी कैमरों की जांच में घायल छात्र द्वारा सहपाठी पर टिप्पणी के बाद मारपीट होना बताया है। एक छात्र के चेहरे और दूसरे के हाथ में चोट आने का हवाला देते हुए स्कूल के चिकित्सक से दाेनों का तत्कल उपचार कराने की बात कही है। इंटरनेट मीडिया पर पत्र की कापी रविवार को प्रसारित होने पर यूजर्स उस पर तरह-तरह की टिप्पणी कर रहे हैं।