आगरा: हवा के झोंके ने बुझा दिया इकलौता चिराग, सरसों की कुटाई के दौरान थ्रेसर की चपेट में आए मासूम की कटकर मौत
फतेहपुर सीकरी के नगला मानसिंह गांव में सरसों की कुटाई के दौरान एक दर्दनाक हादसा हुआ। हवा के झोंके से तिरपाल थ्रेसर की फैन बेल्ट में फंसी, जिससे ढाई वर ...और पढ़ें

फाइल फोटो।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सूत्र, फतेहपुर सीकरी (आगरा)। सरसों की कुटाई के समय गांव नगला मानसिंह में दर्दनाक हादसा हुआ। हवा के झोके से खेत पर बिछी तिरपाल थ्रेसर की फैन बेल्ट में फंस गई। तिरपाल के साथ ही उसके ऊपर खड़ा ढाई वर्षीय मासूम थ्रेसर की चपेट में आ गया।
पलक झपकते ही दादा के सामने उनके लाड़ले पौत्र की मृत्यु हो गई। बालक का क्षत विक्षत शव देकर दादा बेसुध हो गए। हादसे से घर के साथ ही गांव में मातम छा गया।
हवा के झोके से फैन बेल्ट में फंसी तिरपाल के साथ खिंचा चला आया
ग्राम पंचायत औलैंडा के माजरा नगला मानसिंह निवासी रूपेंद्र जाटव ने खेत बटाई पर लेकर सरसों की फसल की थी। गुरुवार को सरसों की कुटाई हो रही थी। शाम को वह अपने ढाई वर्षीय पौत्र मानव को लेकर खेत पर पहुंचे। थ्रेसर के पास सरसों के दानों को एकत्रित करने के लिए बिछी तिरपाल पर मानव सो रहा था।
लाड़ला होने के कारण दादा ले गए थे खेत पर, घर में छाया मातम
शाम करीब 7:30 बजे नींद खुलने पर मानव उठकर खड़ा हो गया। इसी बीच हवा के झोके से तिरपाल उड़कर थ्रेसर की फैन बेल्ट में फंस गई। तिरपाल के साथ ही वहां खड़ा मानव में खिंचकर थ्रेसर में चला गया। इससे वहां अफरा-तफरी मच गई। जब तक थ्रेसर को बंद किया गया, मानव की मृत्यु हो चुकी थी। बालक का सिर, एक हाथ और पैर शरीर से अलग हो गया था। क्षत विक्षत हालत में शव देखकर दादा रूपेंद्र जाटव बेसुध हो गए।

बच्चे के शव का किया अंतिम संस्कार
जानकारी होते ही मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। स्वजन में विलाप करते हुए वहां पहुंच गए। हादसे से घर के साथ ही गांव में मातम छा गया। स्वजन ने बिना पोस्टमार्टम कराए ही बच्चे के शव का अंतिम संस्कार कर दिया। इंस्पेक्टर फतेहपुर सीकरी आनंद वीर ने बताया कि हादसे में बालक की मृत्यु हुई है। स्वजन ने किसी भी तरह की कार्रवाई से इन्कार कर दिया था।
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अंतिम समय में कलेजे के टुकड़े को नहीं देख सका पिता
रूपेंद्र जाटव के तीन बेटे हैं। सबसे बड़े बेटे गोपाल पर बच्चा नहीं है। दूसरे नंबर के आकाश का इकलौता बेटा मानव था। तीसरे पुत्र बबलू की शादी नहीं हुई है। मानव सभी का लाड़ला था। उसकी मृत्यु ने मां सोनम, दादी लक्ष्मी देवी के अलावा दादा, ताऊ, चाचा सहित अन्य स्वजन बेसुध हो गए।
महाराष्ट्र में प्राइवेट नौकरी करते थे मानव के पिता
ग्रामीणों ने किसी तरह उन्हें ढांढस बंधाया। मानव के पिता आकाश महाराष्ट्र में प्राइवेट नौकरी करते थे। हादसे के वक्त वह महाराष्ट्र में थे। बच्चे का शव क्षत विक्षत होने के कारण स्वजन ने रात में ही अंतिम संस्कार कर दिया था। पिता आकाश शुक्रवार को घर पहुंचा। पिता कलेजे के टुकड़े का चेहरा अंतिम बार देख नहीं सका।