क्या आपका बच्चा चिड़चिड़ाता या चीखता है, इंपल्स कंट्रोल डिसआर्डर के लक्षण, मनोचिकित्सक की मानें सलाह
ऑनलाइन गेमिंग के बढ़ते प्रभाव से आगरा में बच्चों का बचपन प्रभावित हो रहा है, जिससे वे चिड़चिड़ेपन और इंपल्स कंट्रोल डिसऑर्डर (ICD) जैसी समस्याओं से जू ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर का प्रयोग किया गया है।
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आगरा में हर चौथा बच्चा इंपल्स कंट्रोल डिसऑर्डर से पीड़ित
सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग विनियमन बिल 2025 किया पारित
जागरण संवाददाता, आगरा। ऑनलाइन गेमिंग का बढ़ता प्रभाव अब बच्चों के बचपन पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। बच्चे मोबाइल फोन पर घंटों-घंटों गेम खेलकर रुपये हार रहे हैं। इससे उनकी न सिर्फ पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि व्यवहार और दिनचर्या भी बदल रहे हैं।
मनोविज्ञानियों के अनुसार, सोते हुए बड़बड़ाना, रुपये देकर ऑनलाइन गेम खेलना, कभी जोर से चिल्लाना, टाइम टेबल फाॅलो न करना, चिड़चिड़ापन, किसी से भी बात न करना, घंटों मोबाइल से चिपके रहना, खाना न खाना, बात न मानना ये सब इंपल्स कंट्रोल डिसआर्डर के लक्षण हैं।
जिससे शहर का हर चौथा बच्चा पीड़ित है। अभिभावकों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनती जा रही है, क्योंकि इससे उनका बचपन बिगड़ रहा है।
काग्निटिव बिहेवियर थेरेपी है काफी मददगार
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक डा. दिनेश राठौर के अनुसार, ऐसे मामले के लिए रोजाना लगभग काउंसिलिंग के लिए तीन से चार काॅल आ रही हैं। ऑनलाइन गेम का प्रभाव बच्चों में बहुत तेजी से बढ़ रहा है।
कम रुपयों से अधिक रुपये कमाने की इच्छा बच्चों को प्रभावित कर रही है। ऑनलाइन गेम जैसे आइपीएल में 50 रुपये या उससे अधिक रुपयों में टीम बनाकर करोड़ों रुपये जीतने का लालच दिया जाता हैं। जिसमें वह आसानी से फंस जाते हैं।
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ऐसे ही तरह के कई एप प्ले स्टोर पर मौजूद हैं। साथ ही किसी गेम में कार या गन को अपग्रेड करने को पैसे दे देते हैं। इसमें फंसने पर बच्चे छोटी-छोटी बातों पर आक्रामक हो जाते हैं और मारपीट करने लगते हैं। बच्चों में सहनशक्ति कम हो रही है।
ऐसे मामलों व स्क्रीन टाइम को कम करने के लिए अभिभावकों को सख्ती दिखानी पड़ेगी। कई युवा तो ऐसे हैं, जो बाइक रेसिंग का गेम खेलते हैं और रियल टाइम बाइक चलाने पर वही हरकत करने लगते हैं जैसे तेज बाइक चलाना और ओवरटेकिंग कराना आदि।
इसमें काउंसलिंग और थेरेपी, खासकर काग्निटिव बिहेवियर थेरेपी काफी मददगार मानी जाती है।
बच्चों से हर समस्या पर बातचीत करें अभिभावक
मंडलीय मनोवैज्ञानिक केंद्र आगरा के मंडलीय मनोविज्ञानी डा. जितेंद्र सिंह यादव ने बताया कि इंपल्स कंट्रोल डिसआर्डर से बचने के लिए अभिभावक और स्कूलों को पहल करनी होगी। बच्चा फोन में क्या चला रहा है इस पर अभिभावकों को पूरी निगरानी रखनी चाहिए।
बच्चा ऑनलाइन गेम में रुपये न हारे इसके लिए सरकार अच्छी तरह से पहल करनी चाहिए। माता-पिता पूर्ण रूप से बच्चे की दिनचर्या को बदलें। साथ में आउटडोर व इंडोर गेम खेलें। योगा करने के लिए प्रेरित करें।
बच्चों से हर समस्या पर बातचीत करें और बताएं की शार्ट कट से भविष्य नहीं बनता है। बच्चों को 16 साल की उम्र से पहले मोबाइल फोन खरीद कर ने दें। पूरे दिन अभिभावक सीमित समय में ही मोबाइल चलाएं, जिससे बच्चे प्रेरित होंगे।
अगर बच्चा इंपल्स कंट्रोल डिसआर्डर से पीड़ित तो काउंसिलिंग अवश्य कराएं और बच्चों के मनपंसद खाना बनाएं।
ऑनलाइन गेम से बचाने को सरकार ने पास किया बिल
बच्चों को ऑनलाइन गेम में रुपये हारने और लत से बचाने के लिए सरकार ने 'ऑनलाइन गेमिंग का प्रमोशन और रेगुलेशन बिल, 2025' पास किया है। जो एक मई 2026 से लागू होगा।
इसके तहत पैसे वाले गेम्स को विनियमित, गेम में उम्र की पुष्टि अनिवार्य, पैरेंटल कंट्रोल टूल्स और गेमिंग विज्ञापनों में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के चित्रण पर रोक जैसे उपाय किए गए हैं।