आगरा खेरागढ़ विधायक का रिपोर्ट कार्ड: पानी की समस्या का नहीं निकला हल, जर्जर सड़कों पर सफर
आगरा के खेरागढ़ विधायक भगवान सिंह कुशवाह के कार्यकाल के साढ़े चार साल पूरे हो गए हैं, लेकिन क्षेत्र में खारे पानी और जर्जर सड़कों जैसी मूलभूत समस्याएं ...और पढ़ें

आगरा खेरागढ़ विधायक भगवान सिंह कुशवाहा।
HighLights
खारे पानी और जर्जर सड़कों की समस्या क्षेत्र में बरकरार।
विधायक ने बाईपास, पुल और पेयजल सुधार का दावा किया।
यशपाल चौहान, आगरा। राजस्थान की सीमा को छूने वाले विधान सभा क्षेत्र खेरागढ़ की जनता ने अपने भाजपा विधायक के रूप में वर्ष 2022 में तीसरी बार भगवान सिंह कुशवाहा को चुना। उन्होंने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के रामनाथ सिकरवार को 36497 मतों से पराजित किया था। इससे पहले भगवान सिंह कुशवाह दो बार बसपा से भी विधायक रह चुके हैं।
अब उनके वर्तमान कार्यकाल के चार वर्ष पांच माह पूरे हो चुके हैं। मगर, क्षेत्र में विकास बस कुछ क्षेत्रों में दिखता है। खारे पानी की समस्या वाले क्षेत्रों में आज भी लोग पेयजल को तरस रहे हैं। वहीं कई क्षेत्रों में टूटी सड़के विकास की खराब तस्वीर दिखा रही हैं। कुछ क्षेत्र तो ऐसे हैं जहां लोग अपने जनप्रतिनिधि पर क्षेत्र विशेष में कार्य कराने का आरोप भी लगाने से पीछे नहीं हट रहे।
आगरा ग्रामीण और फतेहाबाद विधान सभा क्षेत्र से लगी इस खेरागढ़ विधान सभा क्षेत्र में मैदानी भाग भी है और पहाड़ी क्षेत्र भी है। वैसे तो पूरे क्षेत्र में ही शुद्ध पानी की समस्या है। मगर, कुछ क्षेत्र तो ऐसे हैं जहां पानी की समस्या बड़ा रूप ले चुकी है। पानी की कमी को देखते हुए यहां अधिकांश किसान सरसों की फसल ही मुख्य रूप से करते हैं।
खेरागढ़ और जगनेर में सरसों की मंडी होने के बावजूद सरसों आधारित प्रसंस्करण उद्योग स्थापित नहीं हो सका है। यदि तेल मिल अथवा अन्य कृषि आधारित उद्योग विकसित किए जाएं तो स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। तांतपुर की पत्थर मंडी इस विधानसभा की आर्थिक पहचान हुआ करती थी, जहां हजारों लोगों को रोजगार मिलता था।
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समय के साथ यह कारोबार लगभग समाप्त हो गया और आज अधिकांश परिवारों की आय खेती तक सीमित होकर रह गई है। वहीं डुंगरवाला- नरीपुरा, सालेनगर- बरबर, दूधाधारी, गढ़ी अतिबल सहित कई गांवों के रोड जर्जर हालत में हैं। डूंगरवाला मार्ग पर भोपुर गांव में ताे सड़क की हालत ऐसी हो गई हो गई कि वहां से निकलना तक मुश्किल हो रहा है।
पीपलखेड़ा मार्ग पर उटंगन नदी पर पुल न होने से कुल्हाड़ा, निमेना और मिर्चपुरा के ग्रामीणों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। दनकसा में भी पुल निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीण धरना दे चुके हैं, लेकिन समाधान अब तक नहीं निकल सका है। सैंया क्षेत्र में कृषि उपज मंडी की मांग भी वर्षों से लंबित है।
चार वर्ष से अधिक का समय बीतने के बाद क्षेत्र में कुछ विकास कार्य जरूर हुए हैं, लेकिन रोजगार, शिक्षा, पेयजल, सड़क और आधारभूत ढांचे जैसी मूलभूत समस्याएं अब भी समाधान की प्रतीक्षा कर रही हैं।
ये बोले विधायक
हमने अपने विधान सभा क्षेत्र के हर कोने में विकास कार्य कराए हैं। जगनेर रोड पर कागारौल में जाम की समस्या रहती थी। अब कागारौल में बाइपास के लिए धनराशि स्वीकृत हो गई है। जल्द कार्य शुरू हो जाएगा। गंगाजल आने में देरी हो रही थी। पेयजल की समस्या को देखते हुए हमने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से टीटीएसपी सही कराने को आग्रह किया था।
अब 150 टीटीएसपी सही कराने को 5.5 कराेड़ रुपये मिल चुके हैं। सैंया के टोड़ूपुरा में पार्वती नदी पर पुल स्वीकृत हो गया है। दनकसा और कुल्हाड़ा पर भी नए पुल बनेंगे। सैंया के सिकंदरपुर और खेरागढ़ के अएला गांव में कस्तूरबा गांधी विद्यालय बनेंगे।
सैंया और कागाौल में बस स्टैंड बन गए हैं। खेरागढ़ में अब तक भूमि नहीं मिल पा रही थी। जिला पंचायत की भूमि अब मिल गई है। यहां भी रोडवेज बस स्टैंड बनेगा। क्षेत्र में सड़कें बनी हैं, जो बची हैं उन्हें भी ठीक करा रहे हैं।
भगवान सिंह कुशवाह, विधायक
नहीं दिखता अपेक्षित विकास
चार वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी विधानसभा क्षेत्र में अपेक्षित विकास नहीं दिखाई दे रहा है। जगनेर बस स्टैंड आज भी जर्जर हालत में पड़ा है, जबकि कई गांवों में विधायक निधि से बनाए गए यात्री प्रतीक्षालय भी टूट-फूट का का शिकार हो चुके हैं। नगला केसरी का प्रतीक्षालय इसका उदाहरण है। विद्यालयों के भवन जर्जर हैं। खाद और बीज किसानों को नहीं मिल पा रहा है।
सड़कों का हाल बुरा है। स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। क्षेत्रीय जनता में असंतोष देखने को मिल रहा है। विधायक ने समग्र विकास के बजाय कहीं और ध्यान दिया है।
रामनाथ सिकरवार (2022 विधानसभा चुनाव में निकटतम प्रतिद्वंद्वी)
ये है गणित
- कुल मतदाता- 3.40 लाख
- पुरुष मतदाता-1.84 लाख
- महिला मतदाता-1.56 लाख
- पोलिंग बूथ- 360