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    खाल के लिए तेंदुओं की हत्या, नायलोन की रस्सी में फंसाकर शिकार, डंडों से पीट-पीटकर मार डालते हैं तस्कर

    By Sumit Kumar Dwivedi Edited By: Prateek Gupta
    Updated: Mon, 03 Aug 2026 01:14 PM (IST)

    तेंदुए की खाल के साथ आगरा में पकड़े गए तस्करों ने रिमांड पर शिकार के क्रूर तरीके बताए। वे तेंदुओं को नायलोन के जाल में फंसाकर लाठी-डंडों से पीटकर मार ...और पढ़ें

    आगरा के सैंया थाना क्षेत्र में तस्करों से बरामद तेंदुओं की खालें।

    आगरा के सैंया थाना क्षेत्र में तस्करों से बरामद तेंदुओं की खालें।

    जागरण संवाददाता, आगरा। 10 तेंदुए की खाल के साथ चार तस्करों को 23 जुलाई की रात सैंया के आगरा-ग्वालियर हाईवे पर स्थित राजपूताना होटल से गिरफ्तार किया गया था। इन तस्करों की पांच दिनों की रिमांड के दौरान कई नए तथ्य सामने आए हैं। वन्यजीव तस्करों के गिरोह ने तेंदुओं को मारने के लिए अत्यंत क्रूर तरीके अपनाए थे। वे तेंदुओं के नियमित रास्तों पर नायलोन की रस्सी का जाल बिछाते थे।

    जैसे ही तेंदुआ उस रास्ते से गुजरता, वह रस्सी में फंस जाता। भूखा-प्यासा वन्यजीव एक से दो दिन तक जाल में छटपटाता रहता। जब वह कमजोर पड़ जाता, तस्कर लाठी-डंडों से उसके सिर पर वार करके उसकी हत्या कर देते। इसके बाद शव को जमीन में गाड़ दिया जाता और खाल, नाखून व दांत निकालकर विभिन्न राज्यों में सप्लाई कर दिए जाते थे। यह जानकारी तस्करों ने रिमांड के दौरान जांच अधिकारियों को दी

    वन विभाग के साथ मध्य प्रदेश स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (एमपीएसटीपीएफ) और केंद्र सरकार की वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) के अधिकारियों ने चारों आरोपितों को बुधवार को रिमांड पर लिया था। रविवार के अंतिम दिन तक टीम ने पूरे सिंडिकेट को तोड़ दिया गया। चार आरोपित आगरा से गिरफ्तार किए गए, जबकि पांच अन्य को कूनो नेशनल पार्क के निकट शिवपुरी से पकड़ा गया।

    दो अन्य आरोपितों की तलाश जारी है। तेंदुओं की हत्या के मामले में एक कंकाल मुरैना से और शिवपुर से पांच कंकाल बरामद हुए हैं, जबकि चार तेंदुओं के कंकाल अभी तक नहीं मिल सके हैं। जांच में यह भी सामने आया कि ये तस्कर खाल, नाखून और दांत निकालकर हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान समेत अन्य राज्यों में सप्लाई करने जाते थे

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    डीएफओ राजेश कुमार ने बताया कि आरोपितों के बयान को न्यायालय में पेश किया जाएगा। खालों को फारेंसिक जांच के लिए देहरादून स्थित वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (डब्ल्यूआइआइ) भेजा गया है, जहां खालों की उम्र समेत अन्य तथ्य सामने आएंगे।