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देहरादून में होगी तेंदुए की 10 खालों की जांच, तस्करों से रिमांड पर पूछताछ करेगी आगरा पुलिस

By Sumit Kumar Dwivedi Edited By: Prateek Gupta
Published: Wed, 29 Jul 2026 12:30 PM (IST)

आगरा में 10 तेंदुओं की खाल के साथ पकड़े गए चार तस्करों को पांच दिन की रिमांड मिली है। खालों ...और पढ़ें

आगरा में पिछले दिनों तेंदुओं की खाल के साथ पकड़े गए तस्कर।

आगरा में पिछले दिनों तेंदुओं की खाल के साथ पकड़े गए तस्कर।

जागरण संवाददाता, आगरा। 10 तेंदुओं की खाल के साथ गिरफ्तार चार तस्करों को मंगलवार सुबह से पांच दिन की रिमांड मिल गई है। वन विभाग के साथ केंद्र सरकार की वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) और मध्य प्रदेश स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (एमपीएसटीपीएफ) के अधिकारी आरोपितों से पूछताछ करेंगे।

खालों को फारेंसिक जांच के लिए देहरादून स्थित वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (डब्ल्यूआइआइ) भेजा जाएगा, जहां यह पता लगाया जाएगा कि खालें कितनी पुरानी हैं, तेंदुए को किस तरीके से मारा गया, उनकी उम्र क्या थी और अन्य तथ्य स्पष्ट हो सकेंगे।

सैंया के आगरा-ग्वालियर हाईवे पर स्थित राजपूताना होटल में संयुक्त टीम ने छापा मारकर गुरुवार को चार तस्करों को 10 तेंदुओं की खाल के साथ गिरफ्तार किया था। आरोपित फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। शुक्रवार को रिमांड के लिए प्रार्थन पत्र दिया गया था। लेकिन दस्तावेजी औपचारिकताओं के कारण सोमवार को रिमांड नहीं मिल सकी। मंगलवार को रिमांड स्वीकृत होने के बाद जांच तेज होगी।

वन विभाग के मथुरा एसडीओ मनीष शर्मा को मामले का जांच अधिकारी बनाया गया है। उनके नेतृत्व में टीम आरोपितों से पूछताछ करेगी। आरोपितों को मध्य प्रदेश के शिवपुरी के जंगलों में भी ले जाया जा सकता है, जहां सिंडिकेट के अन्य सदस्यों और अन्य पहलुओं की जांच की जाएगी। डीएफओ राजेश कुमार ने कहा, मोबाइल से अन्य जांच के लिए फारेंसिक लैब भेजे जाएंगे।

सीडीआर निकल आए हैं और यूपीआइ समेत विभिन्न माध्यमों से हुए वित्तीय लेन-देन की जांच के लिए फारेंसिक लैब को दिया जाएगा। रिमांड के दौरान वन विभाग के साथ केंद्र सरकार की वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (डब्ल्यूूसीसीबी) और मध्य प्रदेश स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (एमपीएसटीपीएफ) के अधिकारी भी पूछताछ करेंगे।

हो सकते ये सवाल

रिमांड के दौरान कई सवाल पूछे जा सकते हैं। जिसमें तेंदुए कहां मारे गए, शिकार का तरीका क्या था, खाल के अलावा हड्डी, नाखून, दांत और मूंछें कहां गईं? गिरोह में और कौन-कौन शामिल हैं, पिछले एक-दो साल में कितना कारोबार हुआ? पैसे का लेन-देन यूपीआइ, नकद या हवाला के जरिए कैसे होता था? क्या बाघ-भालू जैसे अन्य वन्य जीवों को भी मार सौदा होता था?

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