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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 25, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Patalkot Express Fire: 'आग का गाेला हमारी ओर आ रहा था और हम फंसे हुए थे', यात्री ने बयां क‍िया पातालकोट एक्‍सप्रेस हादसे का खौफनाक मंजर

    By Ali AbbasEdited By: Vinay Saxena
    Updated: Wed, 25 Oct 2023 09:46 PM (GMT+05:30)

    शरद ने बताया कि वह 19 अक्टूबर को परिवार के साथ वृंदावन दर्शन के लिए आए थे। बुधवार को वह कैंट स्टेशन से पातालकोट के जनरल कोच में सवार हुए थे। गेट से लग ...और पढ़ें

    पातालकोट एक्‍सप्रेस में आग और धुंए के बीच दर्जनाें यात्रियों ने मौत को करीब से देखा।
    पातालकोट एक्‍सप्रेस में आग और धुंए के बीच दर्जनाें यात्रियों ने मौत को करीब से देखा।

    जागरण संवाददाता, आगरा। Patalkot Express Train Fire:  पातालकोट एक्‍सप्रेस की सामान्य बोगी में आग और धुंए के बीच दर्जनाें यात्रियों ने मौत को करीब से देखा। इसमें दाता नगर कालोनी वर्धमान नगर के रहने वाले होजरी व्यापारी शरद जैन उनकी पत्नी सविता जैन, 11 वर्षीय बेटा हार्दिक और छह वर्ष की बेटी आर्वी जैन भी हैं।

    शरद ने बताया कि वह 19 अक्टूबर को परिवार के साथ वृंदावन दर्शन के लिए आए थे। बुधवार को वह कैंट स्टेशन से पातालकोट के जनरल कोच में सवार हुए थे। गेट से लगे डिब्बे में खिड़की के साइड वाली सीट पर बैठे थे। बराबर वाली सीट पर पत्नी सविता जैन, बेटा हार्दिक और बेटी आर्वी बैठी हुई थीं। बेटी खिड़की की ओर बैठने की जिद करने लगी तो उसे अपनी जगह रप बैठाकर वह किनारे आकर बैठ गए थे।

    अचानक हुआ जोरदार धमाका 

    ट्रेन के कैंट स्टेशन से निकलने के बाद रफ्तार पकड़ रही थी। करीब 20 मिनट बाद अचानक जोरदार धमाका हुआ। अगले ही पल पूरी बोगी में धुंआ भर गया। शरद बताते हैं, उनके समेत बोगी में बैठे सभी लोगों का दम घुटने लगा। खांसी आने लगी। धुंआ इतना गहरा था कि बराबर में बैठा व्यक्ति भी नहीं दिखाई दे रहा था। इस बीच उनकी नजर बोगी की गैलरी में पड़ी तो वह सहम गए। आग का एक गोला उनकी ओर तेजी से आ रहा था। बोगी में भगदड़ मच गई थी।

    लोग एक दूसरे पर गिरते-पड़ते हुए भाग रहे थे। आग के रूप में मौत को अपनी ओर आता देख उन्होंने बेटे-बेटी और पत्नी को तेज आवाज लगाई। बच्चों ने उनकी आवाज पर अपने हाथ आगे बढ़ाए उन्होंने बच्चों के हाथ कसकर पकड़ लिया। पत्नी को आगे कर बच्चों का हाथ पकडकर दरवाजे की और दौड़ लगा दी। 

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    कोच में मौजूद हर यात्री दरवाजे की ओर दौड़ लगा रहा था। धक्का-मुक्की के बीच उन्होंने बच्चों का हाथ नहीं छोड़ा। बच्चों का हाथ छूटने पर भगदड़ में दबने का डर था। पत्नी सविता ने बताया कि मौत को साक्षात सामने देख वह भी दहशत में आ गई थीं। उन्हें दोनों बच्चों की चिंता सता रही थी। ईश्वर से प्रार्थना कर रही थीं कि किसी तरह ट्रेन रुक जाए और वह परिवार समेत नीचे उतर जाएं।

    ट्रेन के धीमी होते ही उसके रुकने की प्रतीक्षा किए बिना दंपती ने दोनों बच्चों के साथ कोच से छलांग लगा दी। उनके पीछे अन्य यात्री भी कूद गए थे। इस दौरान सविता के बायां हाथ हल्का सा झुलस गया।

    आंखों में घूम गया द बर्निंग ट्रेन फिल्म का दृश्य

    शरद जैन ने बताया कोच में लगी आग की घटना ने उन्हें द बर्निंग ट्रेन की याद दिला दी। उन्होंने द बर्निंग ट्रेन फिल्म देखी थी। पातालकोट एक्सप्रेस में भी आग लगने पर फिल्म जैसा ही भगदड़ और चीख-पुकार का दृश्य था। पातालकोट एक्सप्रेस में धमाके के साथ धुंआ भी था।

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    ईश्वर ने बचाई जान

    शरद जैन और सविता का कहना था कि मौत के इतने करीब आकर भी वह सकुशल हैं, यह ईश्वर का चमत्कार है। वह वृंदावन में ठाकुर जी के दर्शन करके घर आ रहे थे। ठाकुर जी की कृपा से उनकी जान बची। माता-पिता से लिपटे रहे हार्दिक और आर्वी कोच में आग में फंसे हार्दिक और आर्वी दहशतजदा थे। उन्हें सामान्य होने में आधा घंटा लगा। बेटी आर्वी मां सविता से लिपटी हुई थी। हार्दिक पिता हाथ पकड़े रहा।