राजस्थान का आगरा में जयपुर रियासत की संपत्तियों पर दावा, 1952 के विलय समझौते का हवाला; 20 साल बाद फिर खंगाले जाएंगे पन्ने
Agra News: राजस्थान सरकार ने जयपुर रियासत की आगरा सहित प्रयागराज, वाराणसी और मथुरा में स्थित संपत्तियों का रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया है।

Agra News: आगरा जिलाधिकारी कार्यालय।
HighLights
राजस्थान सरकार ने जयपुर रियासत की आगरा स्थित संपत्तियों का रिकॉर्ड मांगा।
आगरा में 100 बीघा जमीन, दो कोठियों पर राजस्थान का दावा।
1952 के विलय समझौते के तहत संपत्तियों के स्वामित्व की जांच शुरू।
जागरण संवाददाता, आगरा। Agra News: राजस्थान सरकार को 20 साल के बाद एक बार फिर से जयपुर रियासत की भूमि और संपत्तियों की याद आ गई है। यह संपत्तियां आगरा, मथुरा, प्रयागराज, वाराणसी में हैं। मुख्य सचिव राजस्थान वी. श्रीनिवास ने शासन से मांगी है। प्रत्येक जिले में भूमि और संपत्तियों की वर्तमान स्थिति क्या है।
संपत्तियों पर कब्जा या फिर अतिक्रमण कितना है। कितनी भूमि खाली पड़ी है और कितनी संपत्तियों का क्रय-विक्रय हो चुका है। इसका ब्योरा मांगा है। जिसे देखते हुए आगरा में संयुक्त टीम गठित की जा रही है जिसमें जिला प्रशासन, नगर निगम और एडीए के अधिकारी होंगे। टीम आगरा में 100 बीघा भूमि की जांच के अलावा दो कोठियों मन:कामेश्वर मंदिर और सड़क की पट्टी की जांच कर रिपोर्ट देगी।
2006 में राजस्थान सरकार ने कराया था सर्वे
राजस्थान सरकार ने वर्ष 2006 में आगरा सहित प्रदेश के चार जिलों में जयपुर रियायत की भूमि और संपत्तियों का सर्वे कराया था। इससे पूर्व वर्ष 1952 में रियासत जयपुर के राजस्थान राज्य में विलय के समय समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत उप्र के जिन चार जिलों मेें रियासत की संपत्तियां हैं। उन संपत्तियों के अधिकार राजस्थान राज्य में निहित हैं। सर्वे के बाद संपत्तियों की जानकारी तत्कालीन मुख्य सचिव को भेज दी गई थी।
भूमि और संपत्तियों से संबंधित जानकारी मांगी
अब राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने भूमि और संपत्तियों से संबंधित जानकारी मांगी है। डीएम ने नगर निगम, एडीए और एसडीएम सदर से इसकी रिपोर्ट मांगी है। एडीएम प्रशासन एबी सिंह ने बताया कि अभिलेखागारों में 100 से 150 साल पुराने नक्शे और दस्तावेज हैं। संयुक्त टीम गठित होते ही अभिलेखागारों में दस्तावेजों की जांच और मौके का सत्यापन करेंगी।
यह है भूमि और संपत्तियों की स्थिति
वर्ष 1945 में आगरा सहित अन्य शहरों में इंप्रूवमेंट ट्रस्ट बने थे। इन ट्रस्ट का विलय नगर महापालिका परिषदों में कर दिया गया था। जयपुर रियासत की भूमि जयपुर हाउस में 100 बीघा के आसपास है। नगर महापालिका परिषद (वर्तमान में नगर निगम) ने वर्ष 1965 में जयपुर हाउस में 350 प्लाटों का आवंटन किया है। इसमें 110 प्लाट सहकारी समितियों के माध्यम से दिए गए थे। इन्हीं प्लाट में एडीए कार्यालय, माधव भवन, जीएसटी कार्यालय सहित अन्य बने हुए हैं। जयपुर हाउस और प्रतापनगर को जोड़नी वाली रोड भी इसी का हिस्सा है। साथ ही मन:कामेश्वर मंदिर भी शामिल है।
बताया गया है कि जयपुर हाउस की कुछ संपत्तियों में वर्तमान में सरकारी कार्यालय भी संचालित हो रहे हैं। इनमें पुराने भवनों में सरकारी कार्यालयों के संचालन का उल्लेख रिकॉर्ड में है। राजस्थान सरकार ने इन संपत्तियों की स्थिति और उनसे संबंधित अभिलेखों की जानकारी मांगी है।
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अन्य शहरों में भी संपत्ति
प्रयागराज, 35.25 एकड़ भूमि जिसमें 1263 मकान और दुकानें कटरा सवाई मानसिंह में, वाराणसी, 44 संपत्तियां जिसमें 44 मकान मानमंदिर मुहल्ले में, मथुरा, एक संपत्ति का कुछ भाग जिसमें छह कोठरियां जसवंतगंज धर्मशाला में
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