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धामी के नेतृत्व में भाजपा जीत सकती है 54 सीटें, सर्वे में कांग्रेस को तगड़ा झटका

Published: Tue, 15 Sep 2026 07:44 AM (IST)Updated: Tue, 15 Sep 2026 08:24 AM (IST)

एक मीडिया सर्वे के अनुसार, उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा को 2027 के विधानसभा चुनाव ...और पढ़ें

पुष्कर सिंह धामी।

पुष्कर सिंह धामी।

HighLights

  1. सर्वे में भाजपा को 54, कांग्रेस को 14 सीटें मिलने का अनुमान

  2. मुख्यमंत्री धामी को सभी आयु और सामाजिक वर्गों का समर्थन

  3. महिला आरक्षण, देवभूमि पहचान जैसे मुद्दों पर जनता का साथ

राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से करीब एक साल पहले सामने आए एक मीडिया चैनल के सर्वे ने सियासी माहौल गरमा दिया है। सर्वे के अनुसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा को प्रदेश में 70 में 54 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है, जबकि कांग्रेस महज 14 सीटों पर सिमटती दिख रही है। यह सर्वे चुनावी नतीजों में तब्दील होता है तो भाजपा 2022 के प्रदर्शन से भी आगे निकलकर सत्ता में वापसी करेगी।
सर्वे भाजपा के लिए इसलिए भी अहम हैं क्योंकि इसमें मुख्यमंत्री धामी को अलग-अलग आयु व सामाजिक वर्गों में समर्थन मिलने का दावा किया गया है।

सामाजिक समीकरणों के लिहाज से वैश्य वर्ग में धामी को 57.3 प्रतिशत, ओबीसी में 50.6, पंजाबी-सिख में 49.7, ब्राह्मण में 46.3, राजपूत में 46.1 और अनुसूचित जाति वर्ग में 45.3 प्रतिशत समर्थन मिलने की बात कही गई है। यानी भाजपा जिस सामाजिक विस्तार की रणनीति के साथ 2027 की तैयारी में जुटी है, यह सर्वे उसके पक्ष में संकेत देता है।

2027 से पहले भाजपा के पक्ष में मजबूत रुझान

उम्र के लिहाज से भी धामी की स्वीकार्यता 18 से 25 वर्ष के युवाओं में 37.8 प्रतिशत से बढ़कर 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 51.8 प्रतिशत तक पहुंचती बताई गई है। 26-35 आयु वर्ग में 43, 36-50 में 46.8 और 51-60 में 50.3 प्रतिशत समर्थन का दावा है। 

महिला और पहचान का कार्ड मजबूत

महिला आरक्षण के मुद्दे पर सर्वे में 88 प्रतिशत लोगों के मुख्यमंत्री के फैसले के पूर्ण समर्थन का दावा किया गया है। वहीं देवभूमि की पहचान और मूल स्वरूप बचाने के प्रयासों के साथ 70 प्रतिशत जनता के होने की बात कही गई है। भाजपा के लिए यह आंकड़े खास मायने रखते हैं, क्योंकि पार्टी 2027 की चुनावी रणनीति में महिला, युवा, लाभार्थी और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दे रही है। सर्वे में समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून, महिला सशक्तीकरण, विकास और सुशासन जैसे फैसलों को भी धामी सरकार की स्वीकार्यता से जोड़कर देखा गया है।

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कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती, इस अनुमान को पलटना

हालांकि चुनाव अभी दूर है और सीटों का यह अनुमान मौजूदा जनमत पर आधारित है, लेकिन भाजपा के लिए यह सर्वे चुनावी अभियान को धार देने वाला हथियार बन सकता है। कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती इस अनुमान को पलटना और सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी माहौल तैयार करना होगी।

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