चंदा चोरी पर सचिन पायलट ने उठाए सवाल, प्रभु श्रीराम के नाम पर 20 साल राजनीति की, अब क्यों साधे बैठे चुप्पी
सचिन पायलट ने आगरा में भाजपा और आरएसएस पर राम मंदिर चंदा चोरी को लेकर तीखे वार किए। उन्होंने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र जांच की ...और पढ़ें

आगरा में मीडिया से बात करते सचिन पायलट।
जागरण संवाददाता, आगरा। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने शनिवार को भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तीखे वार किए और प्रश्न भी उठाए। होटल पीएल पैलेस में पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के नाम पर 20 साल तक राजनीति की। उन्हीं के नाम पर सत्ता में आए। आज उन्हीं आराध्य प्रभु श्रीराम के मंदिर में चंदा चोरी हो गया।
इस गंभीर विषय पर चुप्पी क्यों है। प्राण प्रतिष्ठा से लेकर हर छोटे बड़े आयोजनों का श्रेय लेने वाले प्रधानमंत्री चुप्पी क्यों नहीं तोड़ रहे हैं। हजारों करोड़ों राम भक्तों की आस्था के साथ खिड़वाड करने वालों को क्यों बचाया जा रहा है। क्यों उनके नाम पर रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई है। ट्रस्ट के छोटे कर्मचारियों को जेल भेज दिया, तो असल जिम्मेदारों को क्यों बचाया जा रहा है।
भाजपा और आरएसएस ने मंदिरों को अपने लिए पैसे निकालने का एटीएम बना लिया है। उन्होंने सवाल खड़े करते हुए कहा कि ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री की देखरेख में हुआ तो घोटाले की जवाब देही कौन लेगा? अगर कुछ गलत नहीं हुआ, तो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच से डर किस बात का है? प्रभु श्रीराम करोड़ों भारतीयों की आस्था, संस्कृति और नैतिक चेतना के प्रतीक हैं। श्रद्धा से दान दिया।
उसी के बल पर सत्ता हासिल की, तो इस घोटाले की कौन जिम्मेदारी लेगा। घोटाला ही नहीं है। यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और भावनाओं के साथ किया गया घोर विश्वासघात है। यह जग जाहिर है कि ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे और शीर्ष नियुक्तियों में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की सक्रिय भूमिका रही है। फर्जी रसीदों, नकद चढ़ावे, लेखा-जोखा और कथित हेराफेरी के अनेक आरोप सामने आए हैं।
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छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की जवाबदेही अभी तक तय नहीं हुई है। प्रधानमंत्री को इस पर देश के सामने जवाब देना चाहिए।
जांच कमेटी बनाकर टाल दिया जाता है मुद्दा
उन्होंने कहा कि पेपर लीक का मामला हो या फिर सीबीएसई 12 वीं के परिणाम में गड़बड़ी आदि वर्ष 2024 से लेकर अब तक न जाने कितने मामले आए, जिनका जवाब सरकार को देना चाहिए, लेकिन जवाब दिए जाने और जिम्मेदारी लेने के बजाय जांच कमेटी गठित कर मामले को टाल दिया जाता है। जिससे विषय और मुद्दा ठंडा पड़ जाए।