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    कैसे मिलेगा सही डाटा! आगरा में 33 नहीं सिर्फ पांच सवालों से हो रही डिजिटल जनगणना

    Updated: Tue, 09 Jun 2026 08:52 AM (IST)

    आगरा में डिजिटल जनगणना के दौरान 15-18% प्रगणक 33 में से सिर्फ 4-5 सवाल पूछकर बाकी खुद भर रहे हैं, जिससे डेटा गलत हो रहा है। शिकायतों के बाद अब सभी प्र ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर।

    सांकेतिक तस्वीर।

    HighLights

    1. आगरा डिजिटल जनगणना में प्रगणकों की बड़ी लापरवाही।

    2. 33 सवालों के बजाय सिर्फ 4-5 सवाल पूछकर डेटा भरना।

    3. सही डेटा के लिए अब होगी कड़ी निगरानी और कार्रवाई।

    जागरण संवाददाता, आगरा। डिजिटल जनगणना का प्रयास अच्छा है। प्रत्येक मकान और सदस्य का डाटा फीड हो सकेगा और मकान की जियो टैगिंग हो सकेगी। इससे फरवरी 2027 में होने जा रही जातिगत जनगणना में मदद मिलेगी लेकिन जिले में 15 से 18 प्रतिशत प्रगणक ऐसे हैं जो जल्दबाजी में जनगणना कर रहे हैं।

    33 सवालों के बदले महज चार से पांच सवाल पूछते हैं। इसके बाद अपने आप ही बाकी के सवालों के जवाब भर देते हैं। लगातार शिकायतें मिलने के बाद अब सभी प्रगणकों को पूरे सवाल पूछने के लिए कहा गया है। इसकी निगरानी 1700 सुपरवाइजरों द्वारा की जाएगी। प्रत्येक जोनल अधिकारी द्वारा रैंडम जांच की जाएगी। अगर जांच में प्रगणक द्वारा पूरे सवाल नहीं पूछे गए हैं तो कार्रवाई हो सकती है।

    जनगणना मकान नंबर के दौरान नहीं पूछते हैं सवाल

    जिले में पहले चरण की जनगणना 22 मई से शुरू हुई है। पहली बार डिजिटल जनगणना हुई है। 11 हजार प्रगणकों को तीन-तीन दिन का प्रशिक्षण दिया गया फिर फील्ड में जनगणना कार्य करवाया गया। इसके अलावा सभी प्रगणकों की परीक्षा भी हुई थी। इसमें 95 प्रतिशत प्रगणक पास हुए।

    15 से 18 प्रतिशत प्रगणक जल्दबाजी में कर रहे कार्य

    नगणना में सबसे पहले मकान की जियो टैगिंग करनी है फिर जनगणना मकान नंबर अंकित करना है। मकान नंबरभी प्रगणक द्वारा अंकित किया जाएगा। इसके बाद 31 सवाल सीधे पूछे हैं लेकिन 15 से 18 प्रतिशत प्रगणक ऐसे हैं जिन्होंने पांच सवाल पूछे। इसकी वजह डाटा फीडिंग है। डाटा फीडिंग के दौरान मोबाइल पर इंटरनेट बंद करना होगा। इंटरनेट चालू होते ही डाटा सुपरवाइजर के पास ट्रांसफर हो जाएगा।

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    प्रशासन के पास अब तक तीन दर्जन से अधिक शिकायतें पहुंच चुकी हैं जिसमें पांच सवाल पूछे गए हैं। सेवानिवृत्त अधिकारी एसके गुप्ता ने बताया कि सभी सवाल सीधे मकान के सदस्यों से पूछने चाहिए। इससे सही आंकड़े सामने आ सकेंगे।

    सभी सवाल न पूछने से यह हैं नुकसान

    • जनगणना निदेशालय को सही आंकड़े नहीं मिल पाएंगे
    •  पीएनजी और एलपीजी कनेक्शन की अलग अलग संख्या नहीं पता चल सकेगी।
    •  इंटरनेट कनेक्शन, फाइबर की सही संख्या नहीं पता चलेगी
    •  जल स्रोत का सही आंकड़ा सामने नहीं आएगा
    •  लैपटॉप व कंप्यूटर, टेलीफोन/मोबाइल/स्मार्ट फोन की सही संख्या नहीं पता चलेगी
    •  कार/जीप/वैन, साइकिल/स्कूटर कितनी है, सही आंकड़े नहीं मिलेंगे

    यह हैं 33 सवाल 

    भवन नंबर और जनगणना मकान नंबर, फर्श की सामग्री, दीवार की सामग्री, छत की सामग्री, मकान का उपयोग, मकान की हालत, परिवार क्रमांक, परिवार के सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम, मुखिया का लिंग, मुखिया अनुसूचित जाति-जनजाति या अन्य से संंबंधित, मकान के स्वामित्व कीस्थिति, कमरों की संख्या, विवाहित दंपत्तियों की संख्या, पेयजल का स्रोत, प्रकाश का स्रोत, शौचालय, शौचालय का प्रकार, गंदे पानी की निकासी, स्नानगृह की उपलब्धता, रसोईघर और एलपीजी या फिर पीएनजी कनेक्शन, खाना पकाने के लिए प्रयुक्त ईंधन, रेडियो या ट्रांजिस्टर, टीवी, इंटरनेट सुविधा, लैपटॉप व कंप्यूटर, टेलीफोन/मोबाइल/स्मार्ट फोन, कार/जीप/वैन, साइकिल/स्कूटर या फिर मोटरसाइकिल, उपभोग किया जाने वाला मुख्य अनाज, मोबाइल नंबर।

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    प्रशिक्षक के दौरान सभी प्रगणकों को 33 सवालों के जवाब पूछने के लिए कहा गया था। प्रगणकों की जिम्मेदारी है कि वह जल्दबाजी में जनगणना नहीं करें। प्रत्येक सवाल का जवाब पूछे और सही डाटा फीड करें।

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    संदीप कुमार, जिला जनगणना अधिकारी