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    महंगी पीतल, बाजार में मंदा होने से कान्हा के मिल रहे है कम आर्डर, अलीगढ़ की इकाइयों के सामने आया संकट

    By Manoj Kumar Edited By: Prateek Gupta
    Updated: Tue, 26 May 2026 03:02 PM (GMT+05:30)

    अलीगढ़ में पीतल की मूर्तियों का कारोबार संकट में है, क्योंकि जन्माष्टमी के लिए कान्हा और लड्डू गोपाल की मूर्तियों के ऑर्डर कम मिल रहे हैं। पीतल की बढ़ ...और पढ़ें

    अलीगढ़ में एक फैक्ट्री में बनतीं पीतल की मूर्तियां।

    अलीगढ़ में एक फैक्ट्री में बनतीं पीतल की मूर्तियां।

    जागरण संवाददाता, अलीगढ़। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर अलीगढ़ निर्मित पीतल के कान्हा, लड्डू गोपाल, कदम के पेड़ पर झूलते राधारानी व योगी राज भगवा श्रीकृष्ण की पीतल की मूर्तियों की बाजार में मांग रहती है। आसमान छूती पीतल की कीमत व रिकार्ड स्तर पर पहुंचे कापर के भाव ने मूर्ति निर्माण की लागत बढ़ा दी है।

    वहीं मथुरा सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर विदेशी श्रद्धालु भी कम पहुंच रहे हैं। व्यापारियों को आर्डर कम मिल रहे है। पहले इस सीजन में 100 करोड़ रुपये के आर्डर मिलते थे, अब आधे भी नहीं रहे हैं। बाजार की अस्थिरता से पीतल मूर्ति निर्माता व ट्रेडर्स तनाव में हैं।

    महंगी पीतल व अन्य राॅ मेटेरियल ने इस धातु की मूर्तियों को सामान्य वर्ग की पहुंच से बाहर कर दिया है। अमेरिका, इंग्लैंड सहित अन्य कई विकसित देशों में रहने वाले अप्रवासी भारती कान्हा का जन्मोत्सव धूम-धाम से मनाते हैं। इस बार ईरान-इजरायल युद्ध का इस कारोबार पर बुरा असर दिख रहा है।

    अलीगढ़ निर्मित पीतल की मूर्तियों की देश-दुनिया के बाजारों में होती है। धार्मिक तीर्थ स्थलों के बाजारों में इन उत्पादों की मांग रहती है। उत्तराखंड की चार धाम यात्रा के मंदिर हो, या जम्मू-कश्मीर के कटरा के माता वैष्णो देवी का मंदिर। मथुरा-वृंदावन में तो श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की 15 दिनों तक धूम रहती है।

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    अंग्रेजों के अलावा दुनियाभर से कान्हा के जन्मोउत्सव में शामिल होने के लिए श्रद्धालु आते हैं। पीतल के दामों में भारी वृद्धि होने से मूर्ति की लागत बढ़ गई है।

    पिछले वर्ष इन दिनों पीतल की सिल्ली 560 रुपये प्रतिकिलो थे, अब यह 815 रुपये (18 प्रतिशत जीएसटी अलग से देय) बाजार में मिल रही है। इस हिसाब से पीतल की सादा मूर्ति थोक बाजार में 1300 से 1400 रुपये प्रतिकिलो मिल रही है।

    100 करोड़ रुपये का सीजन का था कारोबार

    पीतल मूर्ति के शहर में छोटी-बड़ी मिलाकर 500 कारखाने हैं। अधिकांश काम जाब वर्क पर होता है। मूर्ति की ढलाई के बाद, बेल्डिंग, पालिश व अन्य प्रक्रिया होती है। कान्हा, लड्डू गोपाल, कदम के पेड़ पर झूलते राधारानी व योगी राज भगवान श्रीकृष्ण व भगवान की अन्य छवि की श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर रहती है।

    145 बड़े कारोबारी, जाॅब वर्क व ट्रेडर्स का इस सीजन में 100 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। इस बार इस पर महंगाई से संकट है। राॅ मेटेरियल के एक वर्ष में 20 से 40 प्रतिशत तक दाम बढ़ गए हैं।


    पीतल के कान्हा, लड्डू गोपाल, राधारानी व भगवान श्रीकृष्ण की अलग-अलग छवि की मूर्तियां देश-दुनिया के श्रद्धालु पूजते हैं। इस बार 40 प्रतिशत भी आर्डर नहीं मिले।
    - हनुमंत राम गांधी, अध्यक्ष, अलीगढ़ पीतल मूर्ति निर्माता एसोसिएशन

    पीतल मूर्ति का कारोबार अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। पीतल के भाव आसमान पर हैं। अन्य खर्च भी बढ़े हैं। आमजन की पहुंच से पीतल मूर्ति खरीदना पहुंच से दूर हो रही है।
    - कपिल वाष्र्णेय, पीतल मूर्ति निर्माता