अलीगढ़ पब्लिक स्कूल धांधली: पूर्व कुलपति को अमेरिका में बताया, जीवित सदस्य को मृत घोषित किया
अलीगढ़ पब्लिक स्कूल में 4.8 करोड़ रुपये के वित्तीय गड़बड़ी का मामला उलझता जा रहा है, जिसमें एएमयू की जांच में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ ...और पढ़ें

अलीगढ़ पब्लिक स्कूल।
जागरण संवाददाता, अलीगढ़। अलीगढ़ पब्लिक स्कूल का विवाद सुलझने की बजाय और उलझता जा रहा है। एएमयू की जांच में कुछ ऐसे दस्तावेज सामने आए हैं जिनके आधार पर दावा किया जा रहा है कि बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया है।
एक पत्र के आधार पर एएमयू ने दावा किया है कि पूर्व ओएसडी ने पूर्व में बनाई समिति के अध्यक्ष व पूर्व कुलपति जमीर उद्दीन शाह को अमेरिका में रहना बताया, एक सदस्य को मृत घोषित कर दिया।
वहीं, पूर्व ओएसडी ने उक्त पत्रों से पल्ला झाड़ते हुए अपने साइन न होने की बात कही है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के संरक्षण में संचालित अलीगढ़ पब्लिक स्कूल के खाते से पिछले दिनों 4.8 करोड़ रुपये की राशि एपीएस शिक्षा समिति के खाते में ट्रांसफर करने का मामला सामने आया था।
इसके बाद रकम होल्ड कर दी गई है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मामले की जांच के लिए समिति का गठन किया था। जांच में यह भी पाया गया है कि पूर्व ओएसडी प्रो. जाकिया सिद्दिकी द्वारा अलीगढ़ पब्लिक स्कूल शिक्षा समिति के पदाधिकारियों को बदलने को आवेदन किया गया है।
जिसका नोटिफिकेशन आगरा के एक लोकल अखबार में प्रकाशित कराया है। उस आवेदन में बताया गया कि पूर्व कुलपति जमीरउद्दीन शाह अमेरिका में रहने लगे हैं। ब्लासम स्कूल के संचालक मिदादुल्लाह शेरवानी को मृत बताया है, जबकि वह जीवित हैं।
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सदस्य शाहबुद्दीन को अस्वस्थ बताया गया है। प्रो. नफीस को पांच फरवरी 2026 को मृत लिखा, जबकि उनका निधन 12 फरवरी 2026 हुआ था।
पूर्व ओएसडी का कहना है कि जिन दस्तावेजों में गड़बड़ी बताई जा रही है, उन पर उनके साइन ही नहीं है। एमएयू जिन भी सवाल के जवाब चाहता है, लिखकर दे, लिखित में ही देंगे।
पूर्व कुलपति ने सभी सवालों के जवाब में कहा, न
एमएयू रजिस्ट्रार की ओर से पूर्व कुलपति से आठ सवाल पूछते हुए पत्र लिखा था। पूछा गया कि, क्या आपको एपीएसएसएस के गठन की जानकारी थी? क्या आपने कुलपति के रूप में एपीएसएसएस के गठन और पंजीकरण के लिए अपनी स्वीकृति दी?
क्या एपीएसएसएस के गठन के संबंध में किसी ने आपसे परामर्श किया/संपर्क किया। क्या आपने कभी एपीएसएसएस की किसी बैठक में भाग लिया है? क्या आपने एपीएसएस के स्मृति पत्र व नियमावली पर हस्ताक्षर किए हैं?
क्या आपने एएमयू के कुलपति के रूप में एपीएसएसएस का बैंक खाता खोलने की स्वीकृति दी थी? क्या आपको एपीएसएसएस के अध्यक्ष के रूप में आपकी नियुक्ति के बारे में सूचित करने वाला पत्र प्राप्त हुआ?
क्या आपने एपीएसएसएस की किसी बैठक की अध्यक्षता की?। इन सभी आठ सवालों को उन्होंने दो शब्दों में जवाब मेल कर ना में जवाब दिया है।
एपीएस प्रकरण की जांच कर रही कमेटी ने जांच रिपोर्ट यूनिवर्सिटी प्रशासन को सौंप दी है। जांच में पता चला है कि बड़े स्तर पर गड़बड़ झाला हुआ है। कई बार बुलाने के बाद भी पूर्व ओएसडी को अपना पक्ष रखने नहीं आई हैं।
फरवरी में किए गए आवेदन में नए अध्यक्ष व सदस्यों का नाम दिया गया है, जो कि पूर्ण रूप से फर्जी पाया गया है। नया अध्यक्ष पूर्व खेल शिक्षिका अजीजा रिजवी को दर्शाया गया है।
एएमयू रजिस्ट्रार द्वारा पूछे जाने पर उन्होंने लिखित रूप से बताया कि वह किसी समिति से नहीं जुड़ी है। न ही कभी किसी समिति की बैठक में भाग लिया है।
प्रो. नवेद खान, एएमयू प्राक्टर