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    अलीगढ़ में किसानों को झटका: रिंग रोड के लिए 37 गांवों में जमीन की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक, NOC लेना भी अब मुश्किल

    By Surjeet Singh Edited By: Prateek Gupta
    Updated: Wed, 22 Jul 2026 11:43 PM (GMT+05:30)

    अलीगढ़ रिंग रोड परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण से पहले 37 गांवों में जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी गई है। एनएचएआई की एनओसी अनिवार्य होने से किसान प ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर।

    सांकेतिक तस्वीर।

    जागरण संवाददाता, अलीगढ़। बहुप्रतीक्षित अलीगढ़ रिंग रोड परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही 37 गांवों के किसानों व भू-स्वामियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रशासन ने नौ जुलाई को कोल व गभाना तहसील को पत्र जारी कर इन गांवों में भूमि से जुड़े सभी महत्वपूर्ण कार्यों के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की अनापत्ति (एनओसी) अनिवार्य कर दी है।

    इसका असर यह हुआ है कि अब इन गांवों में जमीन की खरीद-फरोख्त, नामांतरण, भू-उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) व अन्य राजस्व संबंधी कार्य लगभग ठप हो गए हैं। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि अभी तक परियोजना से प्रभावित होने वाले गाटा नंबर भी तय नहीं हुए हैं, लेकिन पूरे गांव में प्रतिबंध लागू होने से सामान्य जमीन के बैनामे भी नहीं हो पा रहे हैं।

    पनैठी निवासी आनंद कुमार बताते हैं कि उन्होंने गांव में जमीन खरीदने की पूरी तैयारी कर ली थी। विक्रेता से सौदा तय होने के बाद जब वह बैनामा कराने तहसील पहुंचे तो पता चला कि रिंग रोड परियोजना के कारण गांव में रजिस्ट्री पर रोक लगा दी गई है। ऐसा सिर्फ उनके साथ नहीं हुआ। रोजाना दर्जनों लोग तहसील व एनएचएआई कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन किसी को एनओसी नहीं मिल रही।

    एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि अभी प्रभावित गाटों का अंतिम निर्धारण नहीं हुआ है, इसलिए स्थिति स्पष्ट होने में समय लगेगा। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में जिन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण हुआ, उनमें केवल अधिग्रहण में शामिल गाटा संख्या पर ही रोक लगाई जाती थी। इस बार पूरे गांव को प्रतिबंधित कर दिया गया है

    इससे उन लोगों के भी बैनामे नहीं हो पा रहे हैं, जिनकी जमीन रिंग रोड की जद में आने की संभावना नहीं है। किसानों का आरोप है कि इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं, स्टांप व पंजीयन शुल्क के रूप में सरकार के राजस्व पर भी असर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि केवल प्रभावित गाटा संख्या पर ही प्रतिबंध लगाया जाए। इससे अन्य जमीनों की खरीद-फरोख्त सामान्य रूप से हो सके।

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    नौ जुलाई से लगी थी रोक

    सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 24 जून को 33.38 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड रिंग रोड की राजपत्र अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद सात जुलाई को एनएचएआई के परियोजना निदेशक ने डीएम को पत्र भेजकर प्रस्तावित रिंग रोड क्षेत्र में अनियंत्रित खरीद-फरोख्त, भू-उपयोग परिवर्तन व अवैध निर्माण पर नियंत्रण रखने का अनुरोध किया था

    इसी के आधार पर विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलएओ) ने नौ जुलाई को कोल व गभाना तहसील के एसडीएम, तहसीलदार, उप निबंधकों व एआईजी (स्टांप) को निर्देश जारी कर दिए। आदेश में स्पष्ट किया गया कि रिंग रोड से प्रभावित होने की संभावना वाली भूमि से जुड़े मामलों में अंतिम निर्णय से पहले एनएचएआई, पीआईयू की एनओसी लेना अनिवार्य होगा।

    इन कार्यों पर लगी है रोक

    • भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू)
    • कालोनी विकास
    • बिक्री विलेख (बैनामा)
    • नामांतरण
    • गिफ्ट डीड
    • बंधक (मार्गेज)
    • विनिमय (एक्सचेंज)

    इन 37 गांवों में लागू है व्यवस्था

    रिंग रोड परियोजना में गभाना तहसील के 10 गांव लिए गए हैं। इनमें पला सल्लू, कौरह रुस्तमपुर, सांगोर, गिरधरपुर, खेरिया हैवत खां, कलुआ, दादूपुर कोटा, सुमेरपुर, समस्तपुर कोटा व अमरौली शामली हैं। इसी तरह कोल तहसील के 27 गांव परियोजना में शामिल हैं

    इनमें कस्तली वैश्य, पला मजरा कस्ती वैश्य, चंदौखा, छेरत सुढ़ियाल, साठा, खेरूपुरा, सपेरा भानपुर, किठारा, जटपुरा, बरौठ, मोरथल, मोहनपुर, नयाबांस नरेंद्रगढ़ी, आजमाबाद मछुआ, सिकंदरपुर मछुआ, खान आलमपुर, इमलानी, मई, महमूदपुर जमालपुर, चंगेरी, भोजपुर, अलहदादपुर, पनैठी, अदौन, जुलूपुर सिहोर, बरौठा व हरदुआगंज शामिल हैं। इन सभी गांवों में फिलहाल यह व्यवस्था लागू है।

    रिंग रोड के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रारंभिक चरण में है। अभी प्रभावित गाटा संख्या का अंतिम निर्धारण नहीं हुआ है। अंतरिम प्रक्रिया चल रही है और मुख्यालय से निर्देश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। नियमानुसार ही रोक लगाई गई है।

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    शेषनाथ यादव, परियोजना निदेशक एनएचएआई