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    यूपी में हर बेटी बनेगी रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण से सशक्त, स्कूलों में बनेंगे सेल्फ डिफेंस क्लब

    Updated: Sat, 18 Jul 2026 06:49 PM (IST)

    अलीगढ़ सहित यूपी के परिषदीय व कस्तूरबा विद्यालयों में छात्राओं को 48 दिन का 'रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण' मिलेगा। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. उच्च प्राथमिक, कंपोजिट विद्यालयों में 48 दिन का आत्मरक्षा प्रशिक्षण।

    2. प्रत्येक विद्यालय में 10 प्रशिक्षित छात्राओं के सेल्फ डिफेंस क्लब।

    3. छात्राओं को निडर, आत्मनिर्भर बनाने के साथ मिलेगी अपराधों की जानकारी।

    जागरण संवाददाता, अलीगढ़। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं को अब केवल किताबों का ज्ञान ही नहीं, बल्कि आत्मरक्षा के गुर भी सिखाए जाएंगे। उन्हें निडर और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी मिलेगी।

    समग्र शिक्षा के अंतर्गत अब उच्च प्राथमिक, कंपोजिट विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में भी ‘रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण अभियान' चलेगा, जिसके तहत बालिकाओं को 48 कार्यदिवस का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसके माध्यम से उन्हें आत्मविश्वासी और विपरीत परिस्थितियों का सामना करने के लिए मानसिक व शारीरिक रूप से तैयार किया जाएगा। 10 प्रशिक्षित छात्राओं को शामिल करते हुए प्रत्येक विद्यालय में सेल्फ डिफेंस क्लब बनेंगे।

    अभी तक रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण अभियान के तहत राजकीय एवं एडेड माध्यमिक विद्यालयों में छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण (जूडो-कराटे, ताइक्वांडो आदि) प्रदान किया जा रहा है। इसके लिए अस्थाई रूप से प्रशिक्षकों को नियुक्त किया जाता है। इससे माध्यमिक की छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिली है।

    अब सरकार ने प्रदेश के समस्त परिषदीय विद्यालयों (कक्षा छह से आठवीं तक) में यह व्यवस्था लागू कर दी है, इनमें 358 उच्च प्राथमिक, 375 कंपोजिट विद्यालय व 13 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय शामिल हैं। महानिदेशक स्कूल शिक्षा की ओर से इस अभियान को फरवरी 2027 तक पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

    दांव-पेंच के साथ ही अपराधों व हेल्पलाइन नंबरों की मिलेगी जानकारी

    प्रशिक्षण का संचालन विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशक, व्यायाम शिक्षक, शिक्षिकाएं तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के खेल शिक्षक करेंगे। प्रशिक्षण केवल दांव-पेंच तक सीमित नहीं रहेगा।

    छात्राओं को वार्मअप, ब्लाक तकनीक, बचाव के तरीके, माक ड्रिल, शरीर के संवेदनशील अंगों की पहचान, महिलाओं और बालिकाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों की जानकारी, आपातकालीन हेल्पलाइन के उपयोग, जेंडर सशक्तीकरण और आत्मरक्षा किट तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण विषय भी पढ़ाए जाएंगे। साथ ही यह भी बताया जाएगा कि आत्मरक्षा का प्रयोग केवल आवश्यकता और आपात स्थिति में ही किया जाना चाहिए।

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    आत्मरक्षा की संस्कृति होगी विकसित

    प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रत्येक विद्यालय में सेल्फ डिफेंस क्लब गठित होगा। इसमें 10 प्रशिक्षित छात्राओं को नेतृत्व सौंपा जाएगा, जो अन्य छात्राओं को नियमित अभ्यास कराएंगी। इससे विद्यालयों में आत्मरक्षा की संस्कृति विकसित होगी और प्रशिक्षण एक सतत प्रक्रिया बन सकेगा।

    अभियान को तकनीक से भी जोड़ा गया है। अभ्यास के लिए वीरांगना पोर्टल पर उपलब्ध वीडियो का उपयोग किया जाएगा। प्रशिक्षण की उपस्थिति, फोटो और वीडियो भी पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे, जिससे पूरे अभियान की ऑनलाइन निगरानी संभव होगी।

    बदलते सामाजिक परिवेश में यह प्रशिक्षण बालिकाओं को केवल सुरक्षित ही नहीं, बल्कि अधिक सशक्त और जागरूक नागरिक बनने की दिशा में भी सहायक साबित होगा। छात्राओं में साहस, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता, आत्मविश्वास और संकट की घड़ी में संयम के साथ स्वयं की सुरक्षा करने का भाव विकसित करेगी।

    -आलोक सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।