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    अलीगढ़ को स्मार्ट सिटी बनाने में 970 करोड़ खर्च, धंस रहीं हैं नई बनी सड़कें; अब करेगी समिति जांच

    By Surjeet Singh Edited By: Prateek Gupta
    Updated: Thu, 06 Aug 2026 09:26 PM (IST)

    अलीगढ़ में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत हुए 970 करोड़ रुपये के विकास कार्य अब जांच के दायरे में हैं। कोल विधायक की शिकायत पर शासन ने गुणवत्ता, समयबद्धता औ ...और पढ़ें

    अलीगढ़ स्मार्ट सिटी में सड़क पर हुआ होल।

    अलीगढ़ स्मार्ट सिटी में सड़क पर हुआ होल।

    HighLights

    1. कोल विधायक की शिकायत पर शासन ने रिपोर्ट मांगी।

    2. गुणवत्ता, समयबद्धता और धन के दुरुपयोग पर सवाल।

    जागरण संवाददाता, अलीगढ़। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शहर में कराए गए करीब 970 करोड़ रुपये के विकास कार्य अब जांच के दायरे में आ गए हैं। कोल विधायक अनिल पाराशर की शिकायत पर शासन ने पूरे प्रकरण पर रिपोर्ट तलब की है।

    स्मार्ट सिटी मिशन के राज्य मिशन निदेशक प्रवीण कुमार लक्षकार ने मंडलायुक्त संगीता सिंह से सभी कार्यों की गुणवत्ता, समयबद्धता व सरकारी धन के उपयोग की जांच कराकर स्पष्ट आख्या भेजने के निर्देश दिए हैं। इससे स्मार्ट सिटी के तहत कराए गए निर्माण कार्यों पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

    राज्य मिशन निदेशक की ओर से मंडलायुक्त को भेजे गए पत्र में कहा है कि नगर विकास विभाग के उप सचिव के माध्यम से कोल विधायक की शिकायत प्राप्त हुई है। आरोप लगाया है कि अलीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड के गठन के बाद कराए गए कई विकास कार्यों की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है। गुणवत्ता व समयबद्धता का भी ध्यान नहीं रखा गया है। ऐसे में पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराकर बिंदुवार रिपोर्ट मिशन निदेशालय को भेजी जाए।

    37 विकास कार्य शुरू किए गए थे

    अलीगढ़ का चयन वर्ष 2017 में स्मार्ट सिटी मिशन के लिए हुआ था। इसके बाद शहर में सड़क, ड्रेनेज, स्मार्ट रोड, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, पार्क, चौराहों के सुंदरीकरण, मल्टीलेवल पार्किंग, स्मार्ट क्लास, एलईडी स्ट्रीट लाइट व अन्य परियोजनाओं समेत 37 विकास कार्यों पर करीब 970 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

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    अधिकतर काम वर्षों पहले पूरे हो चुके हैं, लेकिन कुछ काम अब भी निर्माणाधीन हैं। इनमें मल्टीलेवल पार्किंग, स्पोर्ट्स कांप्लेक्स समेत कई के अभी लोकार्पण होने बाकी हैं।

    पहले भी उठते रहे सवाल

    स्मार्ट सिटी परियोजना के कई कार्य पहले भी विवादों में रहे हैं। समय-समय पर जनप्रतिनिधियों व स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। आरोप लगाए गए कि कई स्थानों पर अच्छी स्थिति में मौजूद सड़कें व निर्माण तोड़कर दोबारा बनाए गए। इसमें सरकारी धन की अनावश्यक बर्बादी हुई। कुछ परियोजनाओं के अधूरे रहने और निर्धारित समय से काफी देर बाद पूरा होने को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।

    रिपोर्ट के बाद आगे होगी कार्रवाई

    अब शासन ने पूरे मामले में तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। अगर शिकायतें सही मिलीं तो संबंधित कार्यों व जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सकती है। शहर के सबसे बड़े विकास मिशन की जांच शुरू होने से नगर निगम व स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़े अधिकारियों में भी हलचल बढ़ गई है।