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    कोठी पर लगा ताला, अलीगढ़ में पैतृक संपत्ति के हिस्से के लिए परिवार का प्रदर्शन

    Updated: Mon, 16 Mar 2026 01:28 PM (GMT+05:30)

    रविंद्र और नीलम सचदेवा का आरोप है कि 2012 में पैतृक मकान बिकने के बाद उन्हें 40 लाख रुपये का वादा किया गया था, जो पूरा नहीं हुआ। आर्थिक संकट और बेटे क ...और पढ़ें

    बाहर रखा सामान।

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    संक्षेप में पढ़ें

    जागरण संवाददाता, अलीगढ़। रत्नेशपुरम कॉलोनी में पारिवारिक संपत्ति में हिस्सेदारी को लेकर एक परिवार अपनी ही कोठी के सामने सड़क पर बैठने को मजबूर हो गया। रविंद्र सचदेवा, उनकी पत्नी नीलम सचदेवा, पुत्र दीपक, दीपल और बेटी दीपिका सचदेवा अपने घरेलू सामान के साथ कोठी के बाहर डटे हुए हैं और काफी परेशान नजर आ रहे हैं।

    हिस्से की मांग को लेकर सड़क पर बैठा परिवार

    नीलम सचदेवा के अनुसार रत्नेशपुरम स्थित यह कोठी उनके ससुराल की पारिवारिक संपत्ति है, जिसमें उनके पति समेत चार भाई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पैतृक संपत्ति बिकने के बाद उन्हें हिस्सा देने का वादा किया गया था, लेकिन अब तक वह पूरा नहीं किया गया।

    2012 में बिक गया था पैतृक मकान

    नीलन ने बताया कि मामू-भांजा स्थित पैतृक मकान वर्ष 2012 में बिक गया था। उस समय तीन देवरों ने उन्हें 40 लाख रुपये देने का आश्वासन दिया था। मकान बिकने के बाद परिवार विक्रम कॉलोनी में किराये के मकान में रहने लगा। इस दौरान उनके पति अपने भाइयों के साथ एक्सपोर्ट के कारोबार में जुड़े रहे।

    छोटे बेटे की नौकरी लगने पर दिल्ली में रहने लगा परिवार

    इसी बीच बेटे दीपल की तबीयत खराब हो गई, जिसके चलते उसे दिल्ली के एक मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराना पड़ा। बाद में छोटे बेटे की नौकरी लगने पर पूरा परिवार दिल्ली में रहने लगा। नीलम का आरोप है कि उस समय भी देवरों ने दिल्ली में मकान खरीदने का भरोसा दिया था और कुछ समय तक मासिक खर्च भी देते रहे।

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    आर्थिक संकट घिर गया और इलाज बंद

    लेकिन वर्ष 2022 के बाद देवरों ने आर्थिक मदद बंद कर दी। इसी दौरान बेटे की नौकरी भी चली गई, जिससे परिवार आर्थिक संकट में घिर गया और बेटे का इलाज भी बंद कराना पड़ा। परेशान होकर परिवार शुक्रवार शाम रत्नेशपुरम स्थित पारिवारिक कोठी पर पहुंचा, लेकिन वहां ताला लगा मिला। बताया जा रहा है कि एक देवर कोठी पर ताला लगाकर मुरादाबाद चला गया है।

    पड़ोसी कर रहे मदद

    वहीं कॉलोनी के लोगों और सोसाइटी के पदाधिकारियों ने मानवता दिखाते हुए परिवार के खाने-पीने की व्यवस्था की है। सोसाइटी के लोगों ने परिवार की मदद के लिए आगे आए हैं।

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