Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 22, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    कल्याण के गढ़ में जातियों के खांचे, क्या जीत की हैट्रिक लगा पाएंगे सतीश गौतम ?, या भारी पड़ेगा मायावती का दांव, पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट

    Updated: Mon, 22 Apr 2024 08:49 AM (IST)

    Lok Sabha Election अलीगढ़ में भाजपा ने ब्राह्मण प्रत्याशी सतीश कुमार गौतम को तीसरी बार टिकट दी है। बसपा ने भगवा छोड़कर हाथी पर सवार हुए ब्राह्मण हितेन ...और पढ़ें

    कल्याण सिंह के गढ़ से ग्राउंड रिपोर्ट।
    कल्याण सिंह के गढ़ से ग्राउंड रिपोर्ट।

    HighLights

    1. अलीगढ़ में कुल 19,84,366 मतदाता हैं
    2. अलीगढ़ में दो बार जीत चुके हैं सतीश गौतम

    आलोक मिश्र, अलीगढ़। ताले के लिए देश-दुनिया में विख्यात शहर यानी अलीगढ़। तालीम का शहर यानी अलीगढ़। लोकसभा चुनाव की सरगर्मियां बढ़ चुकी हैं तो अलीगढ़ में सवाल यही है कि आखिर कौन बनेगा सांसद? कल्याण के गढ़ में जनता किसे सौंपेगी संसद जाने के लिए ‘जीत की चाबी’। फैक्टर कई हैं, लेकिन सबसे अहम है जातीय गोलबंदी। भाजपा, सपा और बसपा के उम्मीदवारों के समक्ष बनते-बिगड़ते जातीय समीकरणों से पार पाने की बड़ी चुनौती है। अलीगढ़ के राजनीतिक परिदृश्य पर प्रमुख संवाददाता आलोक मिश्र की रिपोर्ट...

    अलीगढ़ में तीसरी बार मैदान में सतीश गौतम

    अलीगढ़ में भाजपा के ब्राह्मण प्रत्याशी सतीश कुमार गौतम जीत की हैट्रिक लगाने के लिए मैदान में उतरे हैं। बसपा ने भगवा खेमा छोड़कर हाथी पर सवार हुए ब्राह्मण हितेन्द्र कुमार उर्फ बंटी उपाध्याय पर दांव लगाया है। बसपा ने पहले यहां गुफरान नूर को टिकट दिया था, बाद में बंटी उपाध्याय को मैदान में उतारकर चाल बदली है।

    सपा-कांग्रेस गठबंधन ने इस बार पूर्व सांसद चौधरी बिजेन्द्र सिंह को मैदान में उतारा है। जाट बिरादरी के बिजेन्द्र सिंह 2004 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर जीते थे। अब चुनावी तपिश बढ़ रही है तो अलीगढ़ की अतरौली विधानसभा क्षेत्र का मढ़ौली गांव बिल्कुल शांत है। इन दिनों यहां बाबूजी (पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह) के पुश्तैनी आवास पर कोई हलचल नहीं है।

    बाबूजी के बाद परिवार के अधिकांश सदस्य अलीगढ़ में

    बाबूजी के बाद परिवार के अधिकतर सदस्य अलीगढ़ शहर में बने आवास में रहते हैं। गांव की पक्की सड़क में घुसते ही कुछ दूर आगे लोकेश कुमार अपने घर के बाहर गोद में बच्चे को लिए खड़े थे। चुनाव की चर्चा आते ही बिना हिचके कहते हैं कि ‘यह भाजपा का गढ़ है।’ सामने बने बरात घर की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि ‘इसे बाबूजी ने बनवाया था। गांव के हर व्यक्ति के लिए यह मुफ्त है। सभी अपने आयोजन यहां करते हैं।’

    खबरें और भी

    पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के घर के ठीक सामने रहने वाले उदय राम की उम्र अब 82 वर्ष हो चुकी है। छांव में कुर्सी पर बैठे उदय राम वोट के सवाल पर दो-टूक कहते हैं... ‘भाजपा।’ कुछ दूर आगे ग्राम चौमुहा में किराने की दुकान चलाने वाले गौतम कुमार भी चुनाव की चर्चा आते ही बिना समय गंवाए फूल खिलने की बात कहकर चुप हो जाते हैं। बगल में खड़े जुगेन्दर भी इसी पर मुहर लगाते हैं।

    ये भी पढ़ेंः PM Modi Aligarh Rally: प्रधानमंत्री की सभा के लिए तगड़ी सुरक्षा, अलीगढ़ में 11 बजे से भारी वाहनों की नो एंट्री, ये है रूट डायवर्जन

    हालांकि, एक सच यह भी है कि भगवा गढ़ में अपना खास दखल रखने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ‘बाबूजी’ के सांसद पुत्र राजवीर सिंह ‘राजू भैया’ और सतीश गौतम के बीच की तल्खी भी किसी से छिपी नहीं है। इसे लेकर चर्चाएं भी खूब हैं। यहां खेमेबंदी की गांठें भी गिनाई जाती हैं।

    पांचों विधानसभा में भाजपा विधायक

    यूं तो वर्तमान में अलीगढ़ की सभी पांच विधानसभा सीटों पर भाजपा काबिज है पर, लोकसभा के रण में प्रमुख दल से मुस्लिम प्रत्याशी के मैदान में न होने से लड़ाई और पेंचीदा हो गई है।

    यहां कुल 19,84,366 मतदाताओं में सर्वाधिक मुस्लिम वोट लगभग साढ़े तीन लाख है, जबकि लगभग तीन लाख ब्राह्मण, सवा दो लाख जाट, दो लाख जाटव व दो लाख ठाकुर के अलावा वैश्य, लोधी राजपूत, बघेल व यादव बिरादरी का वोट चुनावी समीकरण बदलने की हैसियत रखता है। तीनों प्रत्याशियों के बीच वोटों के बंटवारे में मुस्लिम मतों की हिस्सेदारी यहां सबसे अहम मानी जा रही है।

    ये भी पढ़ेंः Uttarakhand Weather: अब बदलेगा पहाड़ों का मौसम, इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ हल्की बौछार की संभावना

    ऊपर कोट की रौनक हर दिन अलग रहती है

    गांव से दूर अलीगढ़ शहर की सबसे पुरानी बाजार में शुमार ऊपर कोट की रौनक हर दिन अलग रहती है। मोहम्मद अली रोड पर स्थित इस बाजार की ढाल चढ़ते ही भीड़भाड़ भी बढ़ने लगती है। यहां बैग की दुकान करने वाले शख्स चुनावी चर्चा शुरू होते ही कहते हैं कि ‘सपा-कांग्रेस का जोर है। नाम पूछने पर हिचकते हैं। कहते हैं कि नाम ताबीज है, बस यही मान लीजिए।’

    आगे जामा मस्जिद के पीछे बाबू भाई की लेडीज शूट की दुकान है। चुनाव की जिक्र आते ही वह कहते हैं कि ‘मुस्लिम वोट बंटेगा। ज्यादा उम्मीद सपा से अधिक बसपा में जाने की है।’

    अलीगढ़ के माहौल की चर्चा होने पर बड़ी बेबाकी से कहते हैं... ‘जब से भाजपा सरकार आई है, बलवे-दंगे नहीं हुए। कुछ सियासी लोग उसकी वजह रहते थे। आम लोग ऐसा कभी नहीं चाहते। कानून-व्यवस्था सुधरी है।’

    रेलवे स्टेशन रोड पर तांगा स्टैंड के पास खिलौने की दुकान करने वाले जफर आलम चुनाव की बात आने पर खामोशी ओढ़ लेते हैं। वैसे वर्तमान परिदृश्य को राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जाटव व मुस्लिम एकजुट हुआ तो हाथी भारी पड़ सकता है और जाट व मुस्लिम समीकरण बना तो साइकिल आगे निकल सकती है। हालांकि इस बार रालोद और भाजपा साथ हैं। इसके चलते जाट वोट का बड़ा रुझान भाजपा की ओर देखने को मिल सकता है।

    जातीय गुणा-गणित की ऐसी संभावनाओं के बीच सबके अपने-अपने कयास और दावे हैं। भाजपा खेमे को विश्वास है कि सोमवार को नुमाइश मैदान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रैली के बाद माहौल पूरी तरह बदल जाएगा। रूठों को मनाकर भाजपा अपनी गाड़ी फिर पटरी पर लाने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही।