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जेठ महीने की दोपहरी में सूर्यदेव दिखाएंगे अपनी ताकत, आने वाला है नौतपा, न दिन और ना रात में मिलेगा चैन

By Krishna Chandra Dargarh Edited By: Prateek Gupta
Published: Sat, 02 May 2026 07:24 PM (IST)

अलीगढ़ में ज्येष्ठ मास के दौरान 25 मई से नौतपा शुरू होगा, जिससे भीषण गर्मी पड़ने की संभावना है और ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर का प्रयोग किया गया है।

सांकेतिक तस्वीर का प्रयोग किया गया है।

जागरण संवाददाता, अलीगढ़। अप्रैल में गर्मी मई जैसे तेवर दिखा चुकी है। शनिवार से ज्येष्ठ  मास (जेठ महीना) शुरू हो चुका है। इसमें सूर्यदेव और ताकतवर हो जाते हैं। इस बार अधिक मास होने के कारण यह महीना 59 दिन का पड़ेगा।

एक महीना अधिक होने के कारण इस बार आठ बड़े मंगलवार पड़ रहे हैं। 25 मई से नौतपा शुरू हो रहा है। ज्योतिषाचार्य हृदय रंजन शर्मा के अनुसार हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में जिस दिन आद्रा नक्षत्र शुरू होता है।

उस नक्षत्र से अगले 10 नक्षत्र तक नौतपा माना गया है। माना जाता है कि यही 10 नक्षत्र मानसून में पानी प्रदान करते हैं। 25 मई को सूर्यदेव तीन बजकर 38 मिनट पर रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। 15 दिनों तक इसी नक्षत्र में रहेंगे।

रोहिणी नक्षत्र में सूर्यदेव के प्रवेश से ही नौतपा प्रारंभ हो जाएंगे। इसी नक्षत्र में आठ जून को दोपहर 1:33 तक रहेंगे। नौतपा से आशय सूर्य का नौ दिनों तक अपने सर्वोच्च ताप में होना है यानी इस दौरान गर्मी चरम पर होती है।

ज्योतिष गणना के अनुसार सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 15 दिनों के लिए आता है तो उन पंद्रह दिनों के पहले नौ दिन सर्वाधिक गर्मी वाले होते हैं। इन्हीं नौ दिनों को नौतपा कहा जाता है।

ज्योतिष के सूर्य सिद्धांत व भागवत में नौतपा का वर्णन आता है। कहते हैं जब से ज्योतिष की रचना हुई, तभी से ही नौतपा भी चला आ रहा है।

खेती पर पड़ने वाला असर

नौतपा में अलग-अलग दिन पड़ने वाले ऊर्जा प्रधान नक्षत्रों के प्रभाव से भयंकर गर्मी पड़ने की संभावना है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नौतपा के नौ दिनों तक तेज गर्मी पड़ती है तो मानसून में अच्छी बरसात होती है। खेतीबाड़ी भी अच्छी होती हैं।

नौतपा के दौरान बरसात हो तो मानसून कमजोर रहता है और खेती के लिए नुकसानदायक होता है। खगोल विज्ञान के अनुसार इस दौरान धरती पर सूर्य की किरणें लंबवत पड़ती हैं। जिस कारण तापमान अधिक बढ़ जाता है। नौतपा के सभी दिन तपें तो अच्छी बरसात का संकेत होता है।

बचने के उपाय

इन दिनों व्रत उपवास और पूजा पाठ कर जलदान करना लाभकारी रहेगा। पशुओं के लिए चारा, पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करनी चाहिए। मजदूरों, राहगीरों को शर्बत और छाछ पिलानी चाहिए।

भगवान के भोग बदले, एसी में विश्राम

गर्मी के कारण मंदिरों में भगवान के विग्रहों का खानपान बदल चुका है। विग्रहों पर चंदन का लेप किया जाता है। पोशाक भी हल्के रंग की हो गई है। भगवान के भोग में शीतल पेय पदार्थ दिए जा रहे हैं।

इसमें गन्ने का जूस, बेल का शर्बत, फलों का जूस, सत्तू शामिल है। दोपहर और रात के भोजन में दाल, चावल और रोटी दी जा रही हैं। दिन और रात में विश्राम के लिए एसी चलाए जा रहे हैं।

ज्येष्ठ मास में आठ बड़े मंगलवार

अधिक मास होने के कारण ज्येष्ठ मास दो मई से 29 जून तक रहेगा। 19 वर्ष बाद दुर्लभ संयोग में आठ बड़े मंगलवार पड़ेंगे।

पहला मंगलवार पांच मई, दूसरा 12 मई, तीसरा 19 मई, चौथा 26 मई, पांचवा दो जून, छठवां नौ जून, सातवां 16 जून और आठवां 23 जून को पड़ेगा। इस महीने में वट सावित्री व्रत, गंगा दशहरा, निर्जला एकादशी, शनि जयंती त्योहार भी हैं।

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