अब मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा और परिवार को भी नहीं उतरेगा... अलीगढ़ के पूर्व विधायक जफर आलम ने राजनीति से लिया सन्यास
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक जफर आलम ने स्वास्थ्य कारणों और बढ़ती उम्र का हवाला देते हुए 2027 का विधानसभा चुनाव न लड़ने का फैसला किय ...और पढ़ें

जफर आलम, पूर्व विधायक

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, अलीगढ़। शहर की राजनीति में तीन दशक से अधिक समय तक सक्रिय भूमिका निभाने वाले समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, लिक-लॉक कंपनी के चेयरमैन व पूर्व विधायक जफर आलम ने आखिरकार चुनावी राजनीति से खुद को अलग करने का एलान कर दिया है। पिछले कई महीनों से उनके आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर चल रही अटकलों पर मंगलवार को उन्होंने विराम लगा दिया।
दैनिक जागरण से विशेष बातचीत में उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। इतना ही नहीं उनके परिवार का भी कोई सदस्य चुनावी मैदान में नहीं उतरेगा।
बोले कि नहीं लड़ूंगा चुनाव, परिवार का सदस्य भी नहीं उतरेगा मैदान में
जफर आलम ने अपने इस निर्णय के पीछे स्वास्थ्य संबंधी कारणों को प्रमुख वजह बताया। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे हैं और उनकी उम्र भी 80 वर्ष से अधिक हो चुकी है। ऐसे में चुनाव जैसी चुनौतीपूर्ण व मेहनत वाली प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल होना, अब उनके लिए संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके दोनों पुत्र अपने-अपने व्यवसाय में व्यस्त हैं और राजनीति में आने की कोई तैयारी नहीं है।

शहर सीट पर बढ़ी दावेदारों की हलचल
पूर्व विधायक ने साफ किया कि समाजवादी पार्टी जिस भी प्रत्याशी को शहर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाएगी, वह उसके समर्थन में पूरी ताकत से काम करेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी व कार्यकर्ताओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पहले की तरह बनी रहेगी। जफर आलम के इस एलान के साथ ही शहर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में नए समीकरण बनने शुरू हो गए हैं।
लंबे समय से सपा की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे जफर आलम के मैदान से हटने के बाद अब पार्टी के भीतर नए दावेदारों के लिए अवसर खुल गए हैं।
समर्थकों ने फैसले पर जताई भावुक प्रतिक्रिया
राजनीतिक गलियारों में इसे 2027 के चुनाव से पहले का बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पूर्व विधायक के चुनावी राजनीति से हटने के बाद शहर विधानसभा सीट पर सपा में टिकट की दौड़ और तेज होगी। आने वाले दिनों में यह सीट पार्टी के भीतर सबसे अधिक चर्चित सीटों में शामिल रह सकती है।
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टास से हारे, फिर विधायक बनकर लौटे
- जफर आलम का राजनीतिक सफर संघर्ष व उतार-चढ़ाव से भरा रहा है।
- वर्ष 1989 में उन्होंने नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव लड़कर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया था।
- उस चुनाव में ओपी अग्रवाल के साथ कड़ा मुकाबला हुआ और सदस्यों के वोट के बाद टास के जरिए उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
- इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 2009 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली।
- वर्ष 2012 में शहर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर वह विधायक बने और विधानसभा पहुंचे।
- इसके बाद 2014 का लोकसभा चुनाव और 2017 व 2022 के विधानसभा चुनाव भी लड़े, लेकिन जीत दोहरा नहीं सके।
- इसके बावजूद वह लगातार सपा की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे।
समर्थकों ने मनाने की कोशिश की
पूर्व विधायक के चुनावी राजनीति से दूरी बनाने की खबर सामने आने के बाद मंगलवार को बड़ी संख्या में समर्थक उनके आवास पहुंच गए। पार्षद मुशर्रफ महजर के नेतृत्व में पहुंचे समर्थकों ने उनसे निर्णय पर पुनर्विचार करने व परिवार के किसी सदस्य को चुनाव लड़ाने का आग्रह किया। समर्थकों का कहना था कि जफर आलम ने अपने विधायक कार्यकाल में शहर में कई विकास कार्य कराए और आज भी उनका जनाधार मजबूत है। हालांकि पूर्व विधायक ने साफ कर दिया कि उनका फैसला अंतिम है।