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    सरयू नदी का जलस्तर बढ़ा, अंबेडकरनगर में बाढ़ आपदा से निपटने का प्रशिक्षण

    Updated: Tue, 28 Jul 2026 04:31 PM (GMT+05:30)

    अंबेडकरनगर में सरयू नदी का जलस्तर 7 सेंटीमीटर बढ़ा है, हालांकि अभी बाढ़ का कोई खतरा नहीं है। संभावित बाढ़ आपदा से निपटने के लिए सिविल डिफेंस वालंटियर् ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. सरयू नदी का जलस्तर 7 सेंटीमीटर बढ़ा।

    2. बाढ़ का खतरा अभी 44 सेंटीमीटर नीचे।

    3. आपदा मित्रों को राहत-बचाव का प्रशिक्षण।

    जागरण संवाददाता, अंबेडकरनगर। सरयू नदी के जलस्तर में फिर से बढ़ोतरी होने लगी है। गत रविवार को अपराह्न तीन बजे से सोमवार इसी समय तक जलस्तर में सात सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। जलस्तर अभी खतरे के निशान 92.73 मीटर से 44 सेंटीमीटर नीचे है। अभी बाढ़ खतरा नहीं है। हालांकि, नदी के उत्तरी ओर बस्ती जिले में कटान तेज हुई है।

    आलापुर तहसील में उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में संभावित बाढ़ आपदा से निपटने में सिविल डिफेंस वालंटियर्स एवं आपदा मित्रों का संयुक्त प्रशिक्षण एवं समन्वय बैठक हुई। पुलिस व चिकित्सकों सहित संबंधित विभागों के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।

    उपजिलाधिकारी ने कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं में त्वरित, समन्वित एवं मानवीय दृष्टिकोण के साथ कार्य करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी स्वयंसेवकों से अपील की कि वे आपदा की स्थिति में प्रशासन के साथ पूर्ण समन्वय बनाए रखते हुए राहत एवं बचाव कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएं तथा आमजन को समय पर सहायता उपलब्ध कराएं।

    बाढ़ पूर्व तैयारी, बाढ़ के समय अपनाई जाने वाली सावधानियां, राहत एवं बचाव कार्यों की कार्यप्रणाली, उपलब्ध बचाव उपकरणों के सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग व आपदा के समय स्वयं सेवकों के कर्तव्यों व दायित्वों की विस्तार से जानकारी दी गई।

    स्वयंसेवकों को बताया गया कि जलभराव अथवा तेज बहाव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से प्रवेश न करें, विद्युत तारों एवं बिजली के खंभों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें, अफवाहों पर ध्यान न दें तथा केवल प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। प्रशिक्षण में लाइफ जैकेट, लाइफ बाय, रस्सी, स्ट्रेचर, टार्च, प्राथमिक उपचार किट सहित अन्य आवश्यक राहत एवं बचाव उपकरणों का परिचय कराया गया। स्वयंसेवकों को आपदा के समय उनका व्यवहार धैर्यपूर्ण, संवेदनशील एवं सेवा-भाव से परिपूर्ण रहने को कहा गया।

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    इस दौरान हृदय गति एवं श्वांस रुकने की स्थिति में जीवन रक्षक प्राथमिक उपचार, चेस्ट कंप्रेशन की सही तकनीक तथा आपातकालीन परिस्थितियों में सीपीआर के प्रभावी उपयोग का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया, ताकि आवश्यकता पड़ने पर बाढ़ प्रभावित व्यक्तियों की तत्काल सहायता कर सकें।