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अंबेडकरनगर के भिऊरा गांव में तीन साल बाद चकबंदी, मतदान से हुआ विवाद का निपटारा

Published: Wed, 05 Aug 2026 04:52 PM (IST)

अंबेडकरनगर के भिऊरा गांव में तीन साल से चल रहे चकबंदी विवाद का मतदान से निपटारा हो गया। एडीएम रंजीत ...और पढ़ें

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HighLights

  1. भिऊरा गांव में तीन साल पुराना चकबंदी विवाद मतदान से सुलझा।

  2. कुल 111 में से 94 किसानों ने चकबंदी के पक्ष में मतदान किया।

  3. एडीएम रंजीत सिंह की देखरेख में विवाद का सफल निपटारा हुआ।

जागरण संवाददाता, अंबेडकरनगर। अकबरपुर तहसील के भिऊरा गांव में तीन वर्ष से चकबंदी प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद का मंगलवार को एडीएम रंजीत सिंह ने वोटिंग के जरिए पटाक्षेप कर दिया।

मतगणना के बाद चकबंदी प्रक्रिया के समर्थन में 94 और विरोध में महज 17 वोट पड़े होने की पुष्टि हुई। एडीएम के साथ एसडीएम सदर प्रतीक्षा सिंह, एसडीएम टांडा, सीओ सदर नीतीश कुमार सहित बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी गांव में लगे थे।

यह है पूरा मामला

वर्ष 2023 में चकबंदी अधिकारी व कर्मचारी गांव में प्रक्रिया शुरू करने के लिए पहुंचे तो ग्रामीण दो खेमों में बंट गए। एक पक्ष चकबंदी चाहने और दूसरा पक्ष नहीं चाहने में शामिल हो गया। इससे दोनों पक्षों ने उच्चाधिकारियों के समक्ष पेश होकर अपनी मांग रखी।

चकबंदी अधिकारी व कर्मचारियों ने कई बार गांव पहुंचकर ग्रामीणों को चकबंदी के पक्ष में सहमत करने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नही मिल सकी। एक पक्ष के राजेश पांडेय आदि ने चकबंदी प्रक्रिया रोकने के लिए गत वर्ष प्रधानमंत्री, केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र भेजा तथा स्थानीय सांसद लालजी वर्मा से मिलकर पत्र सौंपा।

सांसद ने चकबंदी आयुक्त को पत्र भेजकर गांव में चकबंदी प्रक्रिया रोकने को कहा। गांव के उदित नारायण सिंह ने उच्च न्यायालय में रिट किया। न्यायालय ने शासन को निर्णय लेने का आदेश दिया। शासन ने डीएम को निस्तारण का निर्देश दिया था।

इस क्रम में जिलाधिकारी ईशा प्रिया ने एडीएम, एसडीएम सदर व सीओ सदर की समिति गठित कर विवाद के निस्तारण का निर्देश दिया। इस क्रम में एसडीएम के नेतृत्व में मंगलवार को अपराह्न टीम ने गांव पहुंचकर वोटिंग कराई।

छह माह पहले भी प्रशासन ने विवाद निस्तारण का प्रयास किया था। तत्समय एसडीएम सदर व पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में वोटिंग कराई गई थी, लेकिन मतगणना के बाद समर्थन व विरोध में 105 व 105 मत पड़े थे।

चकबंदी नही चाहने वाले पक्ष के राजेश पांडेय ने ग्रामीणों का हस्ताक्षर युक्त पत्र मंगलवार को गांव पहुंची टीम को देना चाहा, लेकिन एडीएम ने मतदान में भाग लेने की बात कहकर पत्र लेने से मना कर दिया। राजेश के मुताबिक उनके पक्ष ने मतदान का बहिष्कार कर दिया। इसके बावजूद मतदान करा दिया गया।

तीन वर्षों से चकबंदी प्रक्रिया को लेकर गांव में चल रहे विवाद के निस्तारण के लिए मतदान के जरिए किसानों से सहमति ली गई। उपस्थित 111 किसानों के सापेक्ष 75 प्रतिशत किसानों ने चकबंदी कराए जाने की सहमति दी है। रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।

-रंजीत सिंह, एडीएम/उपसंचालक चकबंदी

 

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