पुश्तें गुजर गईं पर पूरी नहीं हो सकी चकबंदी, प्रयागराज के 3 गांवों में 30 वर्ष बाद भी लंबित; पूरी नहीं हो सकी प्रक्रिया
प्रयागराज में 45 गांवों में दशकों से चकबंदी प्रक्रिया लंबित है, जिसमें कई पीढ़ियां गुजर चुकी हैं। विभागीय लापरवाही और अभिलेखागार से नक्शे गायब होने के ...और पढ़ें

प्रयागराज में हंडिया के तीन गांवों में तीन दशक से चकबंदी पूरी नहीं हो सकी है।
HighLights
कुल 45 गांवों में चल रही चकबंदी की प्रक्रिया, फूलपुर में सबसे ज्यादा 20 गांव
यमुनापार के ज्यादातर गांवों के लोग सहमत मगर अभिलेखागार से नक्शा गायब
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। जिस चकबंदी का उद्देश्य काश्तकारों के हित की थी, वह अब अहित करने लगी है। चकबंदी की लंबी प्रक्रिया से अब लोग हैरान-परेशान हो चुके हैं। पुश्तें गुजर जा रही हैं मगर चकबंदी पूरी नहीं हो पा रही है।
हंडिया के इन गांवों में अटकी चकबंदी
हंडिया के जमशेदपुर उर्फ लालपुर, रसूलपुर मवैया व बढौली गांवों में 30 वर्ष पहले वर्ष 1996 से चकबंदी चल रही है। जिसका अभी तक प्रथम चरण ही पूरा हो सका है। जमशेदपुर में जब चकबंदी शुरू हुई थी तो लालबिहारी 77 वर्ष के थे, जो दो वर्ष बाद गुजर गए। उनके बेटे गजेंद्रनाथ तब 54 साल के थे, जिनका 19 वर्ष बाद निधन हो गया।इसी तरह अन्य गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया के दौरान कई पीढ़ियां खत्म हो गईं। इसी तहसील के बाबूपुर साथर गांव में वर्ष 2006 में चकबंदी शुरू हुई थी मगर अब तक पूरी नहीं हो सकी है। वहीं करछना के रवनिका उपरहार में 2014 में चकबंदी प्रारंभ हुई।
खास-खास
- 36 गांवों में द्वितीय चक्र की पूरी हो चुकी है प्रक्रिया, नौ में चल रहा पहला चरण
- 40 हजार गाटों के लगभग 90 हजार बीघा भूमि की जिले में चल रही है चकबंदी।
फूलपुर के सबसे ज्यादा 20 गांव
जनपद के 45 गांवों में चकबंदी चल रही है। फूलपुर के सबसे ज्यादा 20 गांव हैं, जबकि कोरांव के आठ, मेजा व हंडिया के सात-सात गांव हैं। करछना, बारा व सोरांव के एक-एक गांवों में चकबंदी चल रही है। फूलपुर के 10 गांवों में 2016 से, सात गांवों में 2018 से तथा तीन गांवों में 2024 से यह प्रक्रिया शुरू कराई गई है। फूलपुर के गांवों द्वितीय चक्र पूरा हो चुका है।
कोरांव के एक गांव में वर्ष 2006 से शुरू है चकबंदी
कोरांव के एक गांव में वर्ष 2006 से तो सात गांवों में वर्ष 2024 से शुरू हुई है, जिसमें छह गांवों में द्वितीय चक्र पूरा हुआ है। मेजा के एक गांव में 2018 से तो छह में 2023 से आरंभ हुी, जिसमें पांच में द्वितीय चक्र हो गया। हंडिया के तीन गांव में वर्ष 2024 से शुरू हुई है जिनमें दो गांवों का दूसरा चक्र हुआ है। बारा व सोरांव के गांवों में वर्ष 2024 में आरंभ हुई है।
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विभाग की लापरवाही
चकबंदी की प्रक्रिया की जटिल होती है मगर विभाग के स्टाफ की लापरवाही और भारी पड़ गई, जिनकी शिकायतें शासन तक पहुंचने लगीं हैं। तभी पिछले हफ्ते मुख्यमंत्री ने अफसरों को चेताया कि चकबंदी के नाम पर किसी को परेशान किया या तो खैर नहीं होगी। इसके बाद चकंबादी वाले गांवों की फाइलें तलब कर ली गईं। पता चला है कि यमुनापार के ज्यादातर गांवों के लोग चकबंदी से सहमत हैं मगर उन गांवों के नक्शे ही अभिलेखागार में नहीं हैं। कुछ गांवों का बंदोबस्त नहीं है।
पिछले वर्षों से चकबंदी की प्रक्रिया को तेज किया गया है। एक वर्ष में आठ गांवों की चकबंदी पूरी हुई है। पांच गांवों में 15 अप्रैल से 15 जुलाई तक अभियान चलाकर कब्जा परिवर्तन कराया गया है। नए चकों पर काश्तकारों को कब्जा दिलाया दिया। जो चकबंदी की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है। शेष गांवों में भी इसके लिए अभियान चलाया जाएगा।
- संजीव कुमार, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी।