अंबेडकरनगर में नदी किनारे अवैध निर्माण पर अधिकारियों की अनदेखी, 16 वर्ष पहले आया था रोक लगाने का आदेश
अंबेडकरनगर में मुख्य सचिव के 16 साल पुराने नदी किनारे निर्माण रोकने के आदेश को अधिकारियों ने अनदेखा किया, जिससे अब जनता के निर्माण अवैध हो गए हैं। ...और पढ़ें

HighLights
मुख्य सचिव का 16 साल पुराना आदेश अधिकारियों ने नहीं माना।
तमसा नदी किनारे दशकों से चल रहा निर्माण अब अवैध घोषित।
अधिकारियों की अनदेखी से जनता के निर्माण पर संकट गहराया।
अरविंद सिंह, अंबेडकरनगर। काश! 16 साल पहले तत्कालीन मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्त के आदेश को अधिकारियों ने गंभीरता से लिया होता, तो आज बेगुनाह लोग बर्बाद होने से बच जाते।
तमसा नदी के किनारे तक भरी गई नींव दशकों से अधिकारियों की अनदेखी का ही नतीजा है। न्यायालय व शासन सख्त हुआ तो सरकारी आदेश हाथ में होने के बाद भी आमजन का निर्माण अवैध हो गया है।
अवैध निर्माण पर सबकी जनता जाती है, लेकिन इनकी मंजूरी देने वाले अधिकारियों पर शासन भी आदेशों की अवहेलना करने को लेकर चुप्पी साधे हुए है।
सवाल उठता है, कि एक-दो दिन में नदियों के किनारे आबादी नहीं बसी। दशकों से निर्माण चल रहा है। इसे रोकना-टोकना दूर अनुमति मिल रही थी। समय पर अधिकारी रोक लगाते से आज यह स्थितियां नहीं बनतीं।
नदी किनारे अवैध निर्माण रोकने के लिए शासन एवं न्यायालय से कहा जाता रहा, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की तमसा नींद नहीं खुली। नतीजतन, अकबरपुर व जलालपुर तहसील में तमसा नदी के किनारे आवासीय कालोनियां बस गईं।
करीब 16 साल पहले 16 मार्च 2010 को मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्त ने सिंचाई विभाग, बाढ़खंड, प्रशासन, पुलिस व नगर पालिका को पत्र जारी कर नदी किनारे निर्माण रोकने का निर्देश दिया था।
खासतौर पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों को नदी किनारे के अवैध निर्माण को बल पूर्वक हटाने के साथ इन्हें मिल रही कल्याणकारी योजनाओं में राशनकार्ड, बिजली व पानी के कनेक्शन की सुविधाएं बंद करने का निर्देश दिया था।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों को शिथिलता एवं लापरवाही करने पर जवाबदेही तय कर कार्रवाई की सख्त चेतावनी दी गई थी। लेकिन, मुख्य सचिव का आदेश फाइलों में आज भी दफन है। सबसे बड़े हाकिम का आदेश भी नदी किनारे के अवैध निर्माण को रोकने में नाकाम रहा।
तीन दशक पहले सरकार ने जताई थी चिंता
करीब 30 वर्ष पहले केंद्र सरकार ने नदियों किनारे बाढ़ क्षेत्रों में अवैध निर्माण होने पर चिंता जताते हुए राज्य सरकार को इस पर लगाम लगाने व अवैध निर्माण हटाने का निर्देश जारी किया था।
तीन फरवरी 1992 को विशेष सचिव आलोक कुमार ने इसका संज्ञान लेकर सभी जिलाधिकारियों को तत्समय पत्र जारी कर नदी किनारे के निर्माण व विकास करने पर पाबंदी लगाने को कहा था। इसके बाद 18 मई 1995, चार अप्रैल 2003 को भी आदेश जारी हुआ।
तत्कालीन मुख्य सचिव ने पिछले आदेशों का अनुपालन न होने पर नाराजगी जाहिर की थी। निर्माण और नक्शा पास करने पर पाबंदी लगाई थी। लेकिन, अधिकारियों ने एक न सुनी भवन निर्माण के लिए नवैयत बदलने समेत नक्शा भी पास किया।
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तीन दशक पहले जिला बनने पर यहां निर्माण तेज हो गया था, लेकिन तक तक सिंचाई विभाग व नगरीय निकाय को जानकारी ही नहीं थी।
तहसील प्रशासन ने वर्ष 2022 में उक्त आदेश खोज निकाला लेकिन अमल अधर में लटक गया। सवाल उठता है कि जब अधिकारी ही नियमों से अनभिज्ञ थे, तो जनता को इसके बारे में जानकारी कैसे होती।
तमसा नदी के प्रवाह क्षेत्र में स्थाई निर्माण की जानकारी ली जाएगी। प्रतिबंधित क्षेत्र में स्थाई निर्माण पर संबंधित विभाग को नियमानुसार कार्रवाई के लिए कहा जाएगा। भवन चिह्नित होने एवं इसपर हुई कार्रवाई की पत्रावली देखी जाएगी।
-ज्योत्सना बंधु, एडीएम