मोहन यादव की ससुराल किछूटी गांव में विकास की राह में बाधाएं, ग्रामीण झेल रहे दशकों का दर्द
अंबेडकरनगर के किछूटी गांव, जो एमपी सीएम मोहन यादव की ससुराल है, में परिसीमन की विसंगतियों के कारण विकास रुका हुआ है। मझुई नदी के कारण गांव के हिस्सों ...और पढ़ें

HighLights
एमपी सीएम मोहन यादव की ससुराल किछूटी में विकास बाधित।
परिसीमन की विसंगति और मझुई नदी बनी प्रमुख बाधा।
ग्रामीणों को पुल, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी सुविधाओं की मांग।
शिवकुमार तिवारी, अंबेडकरनगर। ग्राम पंचायत किछूटी का विकास परिसीमन की विसंगतियों की भेंट चढ़ गया है। इस गांव में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की ससुराल भी है।
ब्लाक मुख्यालय से गांव की दूरी करीब 20 किमी है। गांव के बीच से प्रवाहित मझुई नदी व भौगोलिक परिस्थितियों ने विकास की धारा को विपरीत दिशा में मोड़ दिया है। इसका दंश गांववासियों को दशकों से झेलना पड़ रहा है। सीधा पहुंच मार्ग तक नहीं है।
गांव के दक्षिणी छोर से प्रवाहित मझुई नदी सुलतानपुर व अंबेडकरनगर की सीमा का निर्धारण करती है। सुलतानपुर के गांवों के बीच इस जिले की इकलौती ग्राम पंचायत है। इसके अन्य मजरे उत्तर दिशा में अंबेडकरनगर के गांवों से सटे हैं। यह गांव पहले दहेमा गांव का हिस्सा था।
2010 में किए गए परिसीमन में दहेमा से किछूटी, कोर्रा, डड़वा को काटकर किछूटी के नाम से नई ग्राम पंचायत गठित की गई। परिसीमन के समय जिम्मेदारों ने मानकों का ध्यान नहीं दिया।
कोर्रा और डड़वा के ग्रामीणों को किछूटी पहुंचने के लिए सुलतानपुर के क्षेत्र से होकर गुजरना पड़ता है। शिक्षा के नाम पर दो परिषदीय विद्यालय ही हैं। ग्राम प्रधान संगीता यादव ने बताया कि गलत परिसीमन से गांव का अपेक्षित विकास नहीं हो पा रहा है।
पांच सौ मीटर के बजाय चार किमी का चक्कर
किछूटी और कोर्रा, डड़वा के बीच की सीधी दूरी करीब पांच सौ मीटर है। बीच में मझुई नदी है। दोनों तरफ से करीब दो किमी खड़ंजा लगा है, लेकिन नदी पर पुल नहीं है। ऐसे में एक दूसरे मजरे तक पहुंचने के लिए सुलतानपुर के क्षेत्र से होकर करीब चार किमी का चक्कर लगाना पड़ता है।
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2011 की जनगणना के मुताबिक ग्राम पंचायत की आबादी 1932 है। पंचायत चुनाव के लिए 1489 और लोकसभा व विधानसभा के लिए 1248 मतदाता हैं। शिक्षा के नाम पर किछूटी में प्राथमिक व कोर्रा में उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। आगे की पढ़ाई के लिए सुलतानपुर जाना पड़ता है। स्वास्थ्य की कोई सुविधा नहीं है।
व्यवसाय, आदि सुलतानपुर के बाजारों पर आधारित है। पानी के लिए इंडिया मार्का हैंडपंप सहारा है। शवदाह गृह नहीं होने से बरसात में अंतिम संस्कार करना बड़ी समस्या है। तहसील, ब्लाक, थाना, विद्युत संबंधी कार्यों के लिए ही लोग भीटी आते हैं।
परिसीमन में शर्त थी कि ऐसे दो गांवों को जोड़कर एक ग्राम पंचायत कदापि न बनाई जाए जिसके बीच से नदी, पर्वत, झील, नाला आदि है, लेकिन यहां मानक बेमानी है। यहां किछूटी और इसके मजरों कोर्रा तथा डड़वा के बीचोबीच मझुई नदी प्रवाहित है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांग
- पीएचसी का निर्माण हो।
- एएनएम सेंटर बनाया जाए।
- राजकीय इंटर कालेज बने।
- साधन सहकारी समिति बने।
- मझुई नदी पर पक्का पुल बने।
- पंचायत भवन बनाया जाए।
- अंत्येष्टि स्थल का निर्माण हो।