30 साल बाद भी नहीं तय हो पाया कि यह गांव मेरठ में है या अमरोहा में, 1000 बीघा जमीन पर फंसा पेंच
अमरोहा और मेरठ जिलों के बीच रायबानादल्लीपुर गांव की 1000 बीघा भूमि को लेकर 30 साल पुराना सीमा विवाद अभी भी अनसुलझा है। सर्वे ऑफ इंडिया के सीमांकन के ब ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक चित्र
HighLights
सर्वे आफ इंडिया के सीमांकन के बाद भी नहीं मिल रहे राजस्व नक्शे
संवाद सहयोगी, मंडी धनौरा (अमरोहा)। अमरोहा जनपद के गठन के करीब 30 वर्ष बाद भी रायबानादल्लीपुर गांव की सीमा का विवाद पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है। गंगा खादर क्षेत्र में स्थित इस गांव की करीब 1000 बीघा भूमि को लेकर एक बार फिर अमरोहा और मेरठ जनपद आमने-सामने हैं। हालांकि पूर्व में भी सीमा विवाद की स्थिति केवल रायबानादल्लीपुर गांव में ही सामने आती रही है। यहां भूमि और फसल कटाई को लेकर दोनों जनपदों के किसानों के बीच कई बार मतभेद की स्थिति बन चुकी है।
वर्ष 1997 में अमरोहा जनपद के गठन के बाद से ही रायबानादल्लीपुर की सीमा को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी। करीब छह माह पूर्व भारत सरकार की संस्था सर्वे आफ इंडिया ने दोनों जनपदों की सीमा का वैज्ञानिक तरीके से सीमांकन शुरू किया। सीमांकन के दौरान गांव में कई स्थानों पर सीमा स्तंभ लगाए गए। अब तक 28 पिलर लगाए जा चुके हैं, जबकि कुछ पिलर अभी लगाए जाने बाकी हैं।
सर्वे के दौरान गांव में रह रहे कुछ परिवारों के मकान और भूमि अमरोहा जनपद की सीमा में दर्शाए गए। इन परिवारों का कहना है कि वह लंबे समय से स्वयं को मेरठ जनपद का निवासी मानते आए हैं। सीमांकन के बाद उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई है। अमरोहा तहसील प्रशासन का कहना है कि संबंधित भूमि राजस्व अभिलेखों के अनुसार अमरोहा जनपद की है।
वहीं मेरठ जनपद के अधिकारी भी कुछ हिस्से पर अपना दावा कर रहे हैं। बुधवार को दोनों जनपदों के राजस्व अधिकारी मौके पर पहुंचे और सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शे व पुराने राजस्व अभिलेखों का मिलान कराया, लेकिन दोनों रिकॉर्डों में समानता नहीं बन सकी।
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उपजिलाधिकारी शैलेश कुमार दुबे का कहना है कि दोनों जनपदों के नक्शों और अभिलेखों की जांच पूरी होने के बाद ही सीमा विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। इसके बाद ही भूमि को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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