यूपी के 5 जिलों में खुलेंगे मेगा टेक्सटाइल पार्क, अमरोहा-बरेली समेत इन शहरों में पूरा हुआ सर्वे
प्रदेश में हथकरघा उद्योग को गति देने के लिए अमरोहा, बरेली समेत पांच जिलों में मेगा टेक्सटाइल पार्क खोले जा रहे हैं। यह पार्क पीपीपी मॉडल पर स्थापित हो ...और पढ़ें

नौगांवा मार्ग स्थित सहकारी कताई मिल। जागरण आर्काइव
HighLights
उद्यमियों से मांगे गए प्रस्ताव, पार्क खोलने के लिए चिह्नित की गई जमीन
आसिफ अली, अमरोहा। हथकरघा उद्योग को गति देने के लिए प्रदेश में पांच टेक्सटाइल पार्क खोले जा रहे हैं। जिनमें अमरोहा (80 एकड़), बरेली के बहेड़ी (80 एकड़), बिजनौर के नगीना (53 एकड़), वाराणसी रामना व संतकबीर नगर के मगहर में बंद पड़ी सहकारी कताई मिल की जमीनों पर खोला जाना प्रस्तावित है। इन टेक्सटाइल पार्क के स्थापित करने के पीछे हथकरघा उद्योग को फिर से रफ्तार देना है।
बता दें कि अमरोहा व नौगावां सादात में हथकरघा उद्योग दो दशक से दम तोड़ रहा है। यहां पर संचालित लगभग 500 कारखाने बंद हो चुके हैं। जिससे न सिर्फ रोजगार का संकट खड़ा हुआ है बल्कि अमरोहा का प्रसिद्ध कालीन कारोबार भी पिछड़ा है। टेक्सटाइल पार्क खोले जाने के बाद इस कारोबार को गति मिलेगी।
प्रदेश सरकार की संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना के तहत टेक्सटाइल पार्क स्थापित किए जाने की तैयारी तेज हो गई है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश को देश के प्रमुख टेक्सटाइल हब के रूप में विकसित करना है। इसके लिए अमरोहा सहित वाराणसी, बरेली, बिजनौर और संत कबीर नगर में पांच टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क विकसित किए जाएंगे।
सभी परियोजनाएं पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) माडल पर स्थापित होंगी। अमरोहा में प्रस्तावित पार्क के लिए 80 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है। राज्य सरकार का मानना है कि इस परियोजना के शुरू होने से जिले में निवेश बढ़ेगा और वस्त्र उद्योग को नई गति मिलेगी।
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तैयार परिधान, बुनाई, प्रोसेसिंग और अन्य टेक्सटाइल इकाइयों की स्थापना से स्थानीय युवाओं के लिए हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। दरअसल अमरोहा पहले से ही परिधान और वस्त्र कारोबार के लिए जाना जाता है। टेक्सटाइल पार्क बनने से यहां आधुनिक आधारभूत सुविधाएं, कामन इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर व्यवस्था उपलब्ध होगी।
जिससे उत्पादन लागत कम होगी और उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। साथ ही स्थानीय उद्यमियों को अपने कारोबार के विस्तार का अवसर मिलेगा। इन सभी कताई मिलों का सर्वे भी हो चुका है। अब हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग द्वारा स्थानीय स्तर पर उद्यमियों से प्रस्ताव मांगे गए हैं।
दो दशक पहले तक अमरोहा की पहचान आम व ढोलक के साथ कालीन उद्योग के रूप में भी की जाती थी। परंतु पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा इस उद्योग की अनदेखी गई। जिसके चलते कारखाने बंद हो गए थे। प्रदेश सरकार ने यह पहल की है। टेक्सटाइल पार्क खोले जा रहे हैं। यह रोजगार के नए अवसर सृजित करेगा।
- परवेज आरिफ टीटू, अध्यक्ष, हथकरघा एसोसिएशन।
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