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    सोने के लिए मिलता था एक घंटा, शरीर में घोंपते थे पेचकस.. बंधुआ मजदूरी से मुक्त होकर लौटे शिवम ने बयां किया दर्द

    Updated: Sun, 28 Jun 2026 10:03 PM (GMT+05:30)

    शिवम गौतम मुजफ्फरनगर की एक दोना-पत्तल फैक्ट्री से छह महीने बाद बंधुआ मजदूरी से मुक्त होकर घर लौटा। ...और पढ़ें

    यह तस्वीर AI जेनेरेटेड है

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    HighLights

    1. शिवम गौतम मुजफ्फरनगर की फैक्ट्री से छह माह बाद मुक्त।

    2. बंधुआ मजदूरी के दौरान अमानवीय यातनाएं, जबरन काम कराया गया।

    3. परिवार ने 6 महीने तक तलाश की, अब कार्रवाई की मांग।

    संवाद सूत्र, दिबियापुर। मुजफ्फरनगर की एक दोना-पत्तल फैक्ट्री से मुक्त कराए गए 13 बंधक मजदूरों में थाना क्षेत्र के खजुबैया गांव का 22 वर्षीय शिवम गौतम भी शामिल है। शनिवार रात घर पहुंचने पर स्वजन की आंखें खुशी से छलक उठीं, लेकिन शिवम आज भी फैक्ट्री में झेली गई अमानवीय यातनाओं को याद कर सिहर उठता है।

    शिवम ने बताया कि वह गुरुग्राम में सिलाई का काम करता था। एक जनवरी को घर लौटते समय रेलवे स्टेशन पर उसका पर्स और सामान चोरी हो गया। किसी तरह वह दिल्ली पहुंचा, जहां मुजफ्फरनगर के एक युवक ने उसे काम दिलाने का झांसा दिया। बेहतर मजदूरी का भरोसा देकर वह उसे फैक्ट्री ले गया, जहां पहुंचते ही उसे बंधक बना लिया गया।

    शिवम के अनुसार फैक्ट्री में मजदूरों से दिन-रात जबरन काम कराया जाता था। विरोध करने पर मशीन की बेल्ट, बिजली के तार और पेचकस से बेरहमी से पीटा जाता था। कई बार पेचकस शरीर में घोंप दिया जाता था। सोने के लिए मुश्किल से एक से डेढ़ घंटे का समय मिलता था। उसने बताया कि खाने के नाम पर दिनभर में केवल चोकर की चार रोटियां, नमक और लाल मिर्च दी जाती थीं।

    बेटे के मिलने पर मां हुई भावुक

    छह महीने तक सब्जी तक नसीब नहीं हुई। फैक्ट्री की निगरानी के लिए दो पिटबुल कुत्ते लगाए गए थे, जिससे कोई भागने का साहस न कर सके। शिवम ने दावा किया कि दो मजदूरों ने भागने का प्रयास किया था, लेकिन उन्हें पकड़कर इतनी बेरहमी से पीटा गया कि उनकी मौत हो गई। इसके बाद उनके शव बोरे में भरकर कहीं ले गए।

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    इस घटना के बाद सभी मजदूर भय के साये में जीने लगे थे और उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वे कभी जिंदा बाहर निकल पाएंगे। इधर, बेटे की तलाश में उसकी मां राजरानी और पिता वीरेंद्र गौतम छह महीने तक भटकते रहे। पहले थाना पुलिस से मदद मांगी, फिर गुरुग्राम जाकर गुमशुदगी दर्ज कराई। दोनों पति-पत्नी बेटे की तस्वीर वाले पोस्टर लेकर सड़कों पर घूमते रहे और लगातार उसकी तलाश करते रहे।

    राजरानी ने भावुक होकर कहा कि भगवान और पुलिस की मदद से बेटा तो वापस मिल गया, लेकिन उसके साथ जो अमानवीय व्यवहार हुआ, उसे देखकर दिल दहल जाता है। छह महीने में उसका वजन काफी कम हो गया है और वह मानसिक रूप से भी बेहद डरा हुआ है।

    स्वजन ने मजदूरों को सकुशल मुक्त कराने वाली पुलिस टीम का आभार व्यक्त करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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